Spine Problem Signs In Hindi: आजकल लोगों में गर्दन, कमर और पीठ दर्द की शिकायत बहुत आम हो गई है। पहले यह समस्या ज्यादातर बढ़ती उम्र के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि इसकी बड़ी वजह हमारी बदलती लाइफस्टाइल है। घंटों मोबाइल चलाना, लैपटॉप पर लगातार काम करना और एक ही जगह लंबे समय तक बैठे रहना रीढ़ की सेहत पर असर डाल रहा है। कई लोग गर्दन में दर्द, पीठ में खिंचाव या पैरों में हल्का सुन्नपन महसूस होने पर इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। मैक्स हॉस्पिटल वैशाली के न्यूरोसर्जन (ब्रेन एंड स्पाइन) डॉ. गौरव बत्रा के मुताबिक, कई बार यही छोटे-छोटे लक्षण रीढ़ से जुड़ी समस्या की शुरुआत भी हो सकते हैं। अगर इन संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए, तो बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है।
लंबे समय तक गलत तरीके से बैठना बन रहा बड़ी वजह
आज के समय में ज्यादातर काम बैठकर किए जाते हैं। ऑफिस में कंप्यूटर के सामने लंबे समय तक बैठना या घर पर मोबाइल में झुककर लगे रहना हमारी आदत बन चुका है। जब हम बार-बार गलत पॉश्चर में बैठते हैं तो धीरे-धीरे गर्दन, पीठ और कमर की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ने लगता है। शुरुआत में हल्का दर्द या जकड़न महसूस होती है, लेकिन अगर इसे नजरअंदाज किया जाए तो यही परेशानी आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए काम करते समय शरीर को सीधा रखकर बैठना और बीच-बीच में थोड़ा चलना-फिरना जरूरी है।
स्लिप डिस्क से भी बढ़ सकती है परेशानी
रीढ़ की हड्डी कई छोटी-छोटी डिस्क से मिलकर बनी होती है। ये डिस्क शरीर को झटकों से बचाने का काम करती हैं और हड्डियों को सहारा देती हैं। जब इनमें से कोई डिस्क अपनी जगह से खिसक जाती है, तो इसे स्लिप डिस्क कहा जाता है। इस स्थिति में कमर में तेज दर्द हो सकता है। कई बार यह दर्द कमर से होते हुए पैरों तक पहुंच जाता है। इसके साथ पैरों में झनझनाहट, कमजोरी या सुन्नपन भी महसूस हो सकता है। भारी सामान उठाना, अचानक चोट लगना या लंबे समय तक गलत पॉश्चर में बैठना इसकी वजह बन सकता है।
नसों पर दबाव पड़ने से दिखते हैं ये संकेत
कभी-कभी रीढ़ की हड्डी के आसपास मौजूद नसों पर दबाव पड़ने या उनमें सूजन आने से भी दर्द शुरू हो जाता है। ऐसी स्थिति में दर्द सिर्फ कमर या पीठ तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पैरों तक फैल सकता है। कुछ लोगों को पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी महसूस होने लगती है। चलने या लंबे समय तक खड़े रहने में भी परेशानी हो सकती है। अगर ऐसे लक्षण बार-बार महसूस हों तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
हर मरीज को सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती
रीढ़ की समस्या सुनते ही कई लोग घबरा जाते हैं और उन्हें लगता है कि अब ऑपरेशन ही एकमात्र इलाज होगा। लेकिन ऐसा हर बार जरूरी नहीं होता। डॉ. गौरव बत्रा बताते हैं, 'कमर और पीठ दर्द के ज्यादातर मामलों में सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती। सही दवाइयों, फिजियोथेरेपी, नियमित व्यायाम और लाइफस्टाइल में बदलाव से ही मरीजों को काफी राहत मिल जाती है। सर्जरी केवल उन्हीं मामलों में की जाती है, जब नसों पर लगातार दबाव बना रहता है या पैरों में कमजोरी बढ़ने लगती है।'
आजकल इलाज के आधुनिक और सुरक्षित विकल्प मौजूद
अगर किसी मरीज को ऑपरेशन की जरूरत भी पड़ती है, तो अब इलाज पहले की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और आसान हो गया है। आधुनिक न्यूरोसर्जरी में मिनिमली इनवेसिव तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है, जिनमें छोटा चीरा लगाकर सर्जरी की जाती है। इसका फायदा यह होता है कि ऑपरेशन के बाद दर्द कम रहता है, मरीज को अस्पताल में कम समय रुकना पड़ता है और वह जल्दी अपने सामान्य जीवन में लौट सकता है।
रीढ़ को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये आदतें
रीढ़ की समस्याओं से बचने के लिए रोजमर्रा की कुछ छोटी-छोटी आदतों पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। हमेशा सही पॉश्चर में बैठने की कोशिश करें और लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने से बचें। इसके अलावा नियमित व्यायाम करना, वजन को नियंत्रित रखना और काम के बीच-बीच में ब्रेक लेकर शरीर को स्ट्रेच करना भी फायदेमंद होता है। अगर गर्दन या पीठ में दर्द लंबे समय तक बना रहे या पैरों में सुन्नपन महसूस हो, तो देर किए बिना डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। सही समय पर जांच और इलाज से रीढ़ से जुड़ी गंभीर समस्याओं से बचाव किया जा सकता है।
Expert View: डॉ. गौरव बत्रा, मैक्स हॉस्पिटल वैशाली के ब्रेन एंड स्पाइ नन्यूरोसर्जन हैं। उन्हें इस क्षेत्र में लगभग 20 साल से अधिक का अनुभव है।
