शहर

फिट हुए ओरंगुटान, लाइट मूड में काट रहे टाइम, क्वारंटीन खत्म होते ही जूलॉजिकल पार्क में होंगे शिफ्ट

ओडिशा के बालासोर के बिचित्रापुर जंगल से बचाए गए पांच ऑरंगुटान शावकों की सेहत में सुधार हो रहा है। फिलहाल उन्हें नंदनकानन जू में तापमान नियंत्रित क्वारंटीन सुविधा में रखा गया है। करीब एक से डेढ़ महीने की क्वारंटीन अवधि पूरी होने के बाद उन्हें बड़े बाड़े में शिफ्ट किया जाएगा

Image

ओरंगुटान की सेहत में सुधार

भुवनेश्वर : ओडिशा के बालासोर जिले के जंगल से बचाए गए पांच ओरंगुटान को जल्द ही नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में बड़े बाड़े में शिफ्ट किया जाएगा। फिलहाल पांचों को तापमान नियंत्रित क्वारंटीन सुविधा में रखा गया है, जहां वे धीरे-धीरे स्थानीय वातावरण के अनुकूल हो रहे हैं। ओडिशा के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) और मुख्य वन्यजीव वार्डन प्रेम कुमार झा ने बताया कि पांचों ओरंगुटान की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि पूरी तरह स्वस्थ होने और क्वारंटीन अवधि पूरी होने के बाद उन्हें बड़े बाड़े में रखा जाएगा।

अधिकारियों के मुताबिक, ओरंगुटान करीब एक से डेढ़ महीने तक क्वारंटीन में रह सकते हैं। पांचों को एक साथ रखने के लिए जरूरत पड़ने पर उनके लिए अलग से विशेष बाड़ा भी तैयार किया जा सकता है। यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें भविष्य में चिड़ियाघर के प्रदर्शनी बाड़े में रखा जाएगा, झा ने कहा कि इस संबंध में फैसला क्वारंटीन अवधि पूरी होने और उनकी स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करने के बाद लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि अगर उन्हें दर्शकों के लिए प्रदर्शित किया जाता है तो इसके लिए कुछ वैधानिक मंजूरियां लेना जरूरी होगा।

लाइट मूड में ओरंगुटान

पांचों ओरंगुटान शावकों को 8 सितंबर को बालासोर जिले के बिचित्रापुर जंगल से बचाया गया था। इसके बाद उन्हें नंदनकानन जू लाया गया। अधिकारियों के अनुसार, उनके तनाव को कम करने और देखभाल के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। रेस्क्यू के बाद से पांचों ओरंगुटान अलग-अलग तरह का व्यवहार दिखा रहे हैं। इनमें खेलना, थोड़े समय के लिए मूड में बदलाव और एक-दूसरे से घबराकर चिपके रहना शामिल है। अधिकारियों का कहना है कि उनकी गतिविधियों और स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है।

नंदनकानन जू में पहले से ही ओरंगुटान के लिए एक विशेष बाड़ा मौजूद है। यह बाड़ा 2019 में 41 वर्षीय मादा ओरंगुटान की मौत के बाद से खाली है। उसे 2003 में पुणे से नंदनकानन लाया गया था। इस बीच, पांचों ओरंगुटान बालासोर के जंगल तक कैसे पहुंचे, इसकी जांच जारी है। ओडिशा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) की संयुक्त टीम मामले की जांच कर रही है। अधिकारी इस बात का भी पता लगा रहे हैं कि कहीं इसके पीछे किसी अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क की भूमिका तो नहीं है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

और पढ़ें
End of Article