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पीरियड्स को लेकर समाज में चलते हैं अजीबो-गरीब भ्रम, जानें इससे जुड़े कुछ मिथक और उनकी सच्चाई

Myth VS Facts about Periods : पीरियड्स को लेकर हमारे समाज में कई तरह की बातें अक्सर चलती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनमें से काफी मिथक भी होते हैं। ऐसे ही पीरियड्स को लेकर चलने वाले 4 मिथक आज हम आपके सामने स्पष्ट करने जा रहे हैं।

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Menstrual Health (Photo - Canva)

पीरियड्स आने पर आपको महिलाओं को घरों में अक्सर कई तरह की रुकावटों का सामना करना पड़ता है। जैसे आचार के डिब्बे को न छूना या खट्टी चीजों को खाने से परहेज करना। आमतौर पर हमारे समाज में पीरियड्स को लेकर कई तरह के भ्रम चलते हैं। जिसमें से ज्यादातर का कोई वैज्ञानिक आधार साबित नहीं होता है। आज हम आपको ऐसे ही 4 मिथक और उनसे जुड़े फैक्ट बताने जा रहे हैं।

1. पीरियड्स में बाल नहीं धोने चाहिए

एक्सपर्ट्स की मानें तो पीरियड्स के दौरान नहाने या बाल धोने से किसी तरह का कोई हेल्थ साइड इफेक्ट नहीं होता है। बाल धोना हो या नहाना हो, पीरियड्स के दौरान आप ये सभी काम कर सकते हैं।

2. एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए

मासिक धर्म के दौरान ज्यादातर एक्सरसाइज करने की मना की जाती है। लेकिन हल्का व्यायाम या योग करने से पीरियड्स के दौरान दर्द और ऐंठन में राहत मिल सकती है। हालांकि बहुत ज्यादा थका देने वाले एक्सरसाइज से बचना चाहिए, लेकिन हल्की एक्सरसाइज फायदेमंद होती है।

3. पीरियड्स एक हफ्ते चलने चाहिए

आमतौर पर धारणा है कि पीरियड्स का क्रम कम से कम 5-7 दिन चलना चाहिए। लेकिन आपको बता दें कि ये महिला-महिला के आधार पर अलग हो सकती है। किसी के लिए ये 3-4 दिन तो किसी के लिए 5-6 दिन हो सकता है।

4. पीरियड्स में दूध-दही नहीं खाना चाहिए

ये बात भी आपने जरूर सुनी होगी, कि पीरियड्स के दौरान दूध, दही का सेवन नहीं करना चाहिए। लेकिन आज हम आपको बताना चाहते हैं, कि इसका कोई मेडिकल प्रमाण नहीं है। बल्कि एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन दिनों में और भी हेल्दी फूड्स का सेवन करना चाहिए।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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