Migraine Ayurvedic Remedies: माइग्रेन का दर्द जब शुरू होता है, तो कई लोगों का पूरा दिन खराब हो जाता है। ऐसे में ज्यादातर लोग तुरंत दर्द की गोली खा लेते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बार-बार माइग्रेन क्यों होता है? आयुर्वेदाचार्य और हेल्थ इंफ्लुएंसर डॉ. वरलक्ष्मी यानमंद्रा के मुताबिक, आयुर्वेद में माइग्रेन को सूर्यावर्त कहा गया है। उनका कहना है कि जब शरीर में वात और पित्त दोष का संतुलन बिगड़ जाता है, तो माइग्रेन की समस्या हो सकती है। हालांकि, इसका सही कारण को समझकर और कुछ आसान आयुर्वेदिक उपाय अपनाकर राहत पाने की कोशिश की जा सकती है। ऐसे में आप ये तीन नुस्खे आजमा सकते हैं..
पहले जानिए माइग्रेन किन वजहों से बढ़ सकता है
डॉ. वरलक्ष्मी के अनुसार, हर व्यक्ति में माइग्रेन का कारण अलग हो सकता है। कई बार कम नींद लेना, तेज धूप में ज्यादा रहना, दही खाना, कॉफी की ज्यादा आदत या जरूरत से ज्यादा तनाव माइग्रेन को बढ़ा सकता है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि आपको किस वजह से दर्द शुरू होता है। अगर ट्रिगर की पहचान हो जाए, तो उससे बचना आसान हो जाता है।
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पहला उपाय: लहसुन का इस्तेमाल
आयुर्वेदाचार्य सलाह देती हैं कि रात में एक या दो लहसुन की कलियों को गुनगुने पानी में भिगोकर उसका सेवन किया जा सकता है। उनके मुताबिक, लहसुन शरीर में बढ़े हुए वात दोष को संतुलित करने और खून के बहाव को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। इससे कुछ लोगों को माइग्रेन के दर्द में राहत मिल सकती है।
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दूसरा उपाय: अजवाइन भी हो सकती है फायदेमंद
अगर सिरदर्द पाचन की गड़बड़ी से जुड़ा है, तो अजवाइन मददगार हो सकती है। डॉ. वरलक्ष्मी के अनुसार, अजवाइन की चाय पीने या कपड़े में बांधकर उसकी खुशबू सूंघने से पाचन बेहतर रखने में मदद मिल सकती है। इससे पाचन से जुड़ा सिरदर्द कम होने की संभावना रहती है।
तीसरा उपाय: एलोवेरा से मिल सकती है ठंडक
अगर माइग्रेन के दौरान सिर में गर्मी या जलन महसूस होती है, तो डॉ. वरलक्ष्मी सुबह एक चम्मच ताजा एलोवेरा जूस लेने या माथे पर एलोवेरा जेल लगाने की सलाह देती हैं। उनके अनुसार, इससे शरीर को ठंडक मिलती है और पित्त दोष को शांत करने में मदद मिल सकती है।
ध्यान रखें: ये उपाय आयुर्वेदाचार्य डॉ. वरलक्ष्मी यानमंद्रा द्वारा बताए गए हैं। अगर माइग्रेन बार-बार हो रहा है, दर्द बहुत तेज है या लंबे समय तक बना रहता है, तो बिना देर किए डॉक्टर से जांच और सही इलाज जरूर कराएं।
