Kya saree se cancer hota hai: आजकल 'साड़ी कैंसर' शब्द को लेकर लोगों में काफी गलतफहमी और डर देखने को मिलता है। कई लोग सोचते हैं कि क्या सच में साड़ी पहनने से कैंसर हो सकता है? लेकिन डॉक्टर्स इस बात को साफ करते हैं कि यह नाम भले ही डरावना लगे, लेकिन इसका साड़ी से कोई सीधा संबंध नहीं है। अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद के कैंसर रोग विशेषज्ञ और सीनियर कंसल्टेंट डॉ. सफला बाघमार के मुताबिक यह एक बहुत ही दुर्लभ स्किन कैंसर है, जो सालों तक कमर पर लगातार रगड़ और अनदेखी सूजन की वजह से विकसित हो सकता है। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
‘साड़ी कैंसर' असल में होता क्या है - Saree Cancer
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि साड़ी कैंसर कोई मेडिकल टर्म नहीं है। डॉक्टर इसे क्यूटेनियस स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा का एक बेहद दुर्लभ रूप मानते हैं। यह नाम इसलिए प्रचलित हो गया क्योंकि कुछ मामलों में यह कमर के उस हिस्से में देखा गया, जहां लंबे समय तक टाइट कपड़े या नाड़ा लगातार रगड़ खाते हैं। डॉ. सफला बाघमार के अनुसार इसे साड़ी से जोड़ना सही नहीं है, क्योंकि असली कारण कपड़ा नहीं बल्कि लंबे समय की स्किन इरिटेशन है।
क्या है ‘साड़ी कैंसर' असली वजह
यह समस्या अचानक नहीं होती, बल्कि धीरे-धीरे कई सालों में विकसित होती है। जब कमर पर एक ही जगह लगातार दबाव पड़ता है जैसे बहुत टाइट नाड़ा या पेटीकोट - तो वहां की त्वचा प्रभावित होने लगती है। शुरुआत में हल्की मोटाई, रंग बदलना या जलन हो सकती है। समय के साथ यह स्थिति क्रॉनिक इन्फ्लामेशन (chronic inflammation) में बदल सकती है। डॉक्टरों के मुताबिक यही लगातार चलने वाली सूजन बहुत ही दुर्लभ मामलों में कैंसर का रूप ले सकती है।
‘साड़ी कैंसर' के शुरुआती लक्षण
इस समस्या की शुरुआत बहुत सामान्य लगती है, इसलिए लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। कमर पर खुजली, त्वचा का काला पड़ना, हल्की पपड़ी या मोटापन इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। कई बार यह ठीक भी हो जाता है, इसलिए लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। लेकिन अगर कोई घाव लंबे समय तक ठीक नहीं हो रहा या बार-बार हो रहा है, तो डॉक्टर को दिखाना जरूरी है। यही समय पर पहचान सबसे बड़ा बचाव है।
भारत में यह कितना दुर्लभ है
ICMR के आंकड़ों के अनुसार भारत में हर साल लाखों नए कैंसर केस सामने आते हैं, लेकिन स्किन कैंसर उनमें बहुत ही छोटा हिस्सा है। और उसमें भी साड़ी से जुड़ा कैंसर बेहद ही दुर्लभ माना जाता है। डॉ. सफला बाघमार कहती हैं कि लोगों को डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि समझने की जरूरत है कि शरीर पर लंबे समय तक चलने वाली जलन या घर्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
साड़ी कैंसर से बचाव कैसे करें
इससे बचाव मुश्किल नहीं है। बस कुछ आदतों का ध्यान रखना जरूरी है। कमर पर बहुत टाइट कपड़े या नाड़ा लंबे समय तक न बांधें, उसकी पोजीशन बदलते रहें और त्वचा को साफ-सुथरा रखें। अगर वहां बार-बार खुजली, दाग या घाव बने तो उसे नजरअंदाज न करें। समय पर डॉक्टर से सलाह लेने से स्थिति गंभीर होने से रोकी जा सकती है।
डॉक्टर की क्या है सलाह
डॉ. सफला बाघमार के अनुसार साड़ी कैंसर नाम भले ही डर पैदा करता हो, लेकिन असल में यह बहुत ही दुर्लभ स्थिति है। यह साड़ी से नहीं बल्कि लंबे समय तक होने वाली त्वचा की रगड़ और सूजन से जुड़ा होता है। सही जानकारी, जागरूकता और समय पर जांच ही इससे बचाव का सबसे आसान तरीका है।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
