Monsoon Session: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शुक्रवार को कहा कि सरकार लोकसभा में परिसीमन संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए जरूरी दो तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सकेगी तथा बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद उन्हें नहीं लगता कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) और भाजपा की विचारधारा का कभी मिलन हो सकता है।
जयराम रमेश ने 20 जुलाई से आरंभ होने वाले संसद के मानसून सत्र से पहले 'पीटीआई-भाषा' के साथ बातचीत में यह भी कहा कि तमिलनाडु में टीवीके के साथ कांग्रेस के हाथ मिलाने से द्रमुक को कुछ नाराजगी जरूर है, लेकिन उन्हें विश्वास है कि वह समय आने पर विपक्ष के साथ ही खड़ी होगी।
'सरकार अब भी दो-तिहाई बहुमत से दूर'
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सप्ताह में तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में हुई टूट के कारण विपक्ष के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण और चिंताजनक है, लेकिन सरकार अब भी लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने से बहुत दूर है। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार दो-तिहाई बहुमत हासिल कर संविधान में बदलाव करने और आरक्षण व्यवस्था को समाप्त करने की मंशा रखती है।
उन्होंने कहा कि सरकार दो-तिहाई बहुमत की दिशा में बढ़ने की कोशिश कर रही है और यदि ऐसा हुआ तो यह ''कलंकित दो-तिहाई बहुमत'' होगा। उन्होंने दावा किया कि सरकार द्वारा मानसून सत्र में ही परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक और प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्रियों को बर्खास्त करने से जुड़ा विधेयक लाने का प्रयास भी किया जा सकता है।
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उन्होंने कहा कि ऐसे किसी भी संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी, जो सरकार के पास फिलहाल नहीं है। जयराम रमेश ने कहा कि विपक्ष संसद में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाएगा।
उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कोटा में दिए गए बयान का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में ''केंद्रीकरण, निजीकरण और संघीकरण'' जैसी तीन "बीमारियां" फैल गई हैं, जिनसे लाखों लोगों के जीवन पर प्रतिकूल असर पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस की यह मांग जारी रहेगी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ''मंत्री प्रधान'' को हटाएं।
