Importance of Mental Health on International Youth Day: युवा उम्र को आमतौर पर एनर्जी, नए आइडिया और सपनों से भरा दौर माना जाता है। लेकिन आज की तेज रफ्तार जिंदगी में कई युवा बिना ज्यादा शारीरिक मेहनत के भी लगातार थका हुआ महसूस करते हैं। वजह सिर्फ काम या पढ़ाई का दबाव नहीं है। कई बार हमारी रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें भी दिमाग को लगातार व्यस्त रखती हैं।
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सोने से पहले फोन चलाना, एक ही बात को बार-बार सोचते रहना, हर कुछ मिनट में नोटिफिकेशन चेक करना या काम के बीच खुद को आराम न देना धीरे-धीरे मानसिक थकान बढ़ा सकता है। खास बात यह है कि इन आदतों को हम अक्सर सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। International Youth Day पर जानिए कि, युवाओं की मेंटल हेल्थ को कौनसी चीजें ओवरलोड कर हैं और उसका ख्याल कैसे रखें।
1. हर बात को बार-बार सोचते रहना
किसी बातचीत को बार-बार याद करना, छोटी गलती पर घंटों सोचना या आने वाले समय की हर संभावना के बारे में परेशान होते रहना दिमाग को लगातार काम में लगाए रखता है। थोड़ी चिंता सामान्य है, लेकिन जब सोचने का सिलसिला रुक ही न पाए तो मानसिक थकान महसूस हो सकती है। हर समस्या का जवाब उसी वक्त ढूंढना जरूरी नहीं। युवाओं को अपनी ओवरथिंकिंग की आदत में हल्का सुधार करना चाहिए।
2. फोन से दिमाग को एक मिनट की छुट्टी न देना
सुबह आंख खुलते ही फोन और रात में सोने से ठीक पहले स्क्रीन, आज यह रूटीन काफी आम है। लगातार सोशल मीडिया, मैसेज और वीडियो देखने से दिमाग को बार-बार नई जानकारी मिलती रहती है। इसका आसान तरीका है कि दिन में कुछ समय ऐसा रखा जाए जब फोन हाथ में न हो। शुरुआत सिर्फ 20-30 मिनट से भी की जा सकती है।
3. नींद को हमेशा आखिरी प्राथमिकता देना
बस एक एपिसोड और, एक वीडियो और कहते-कहते रात काफी हो जाती है। फिर सुबह जल्दी उठना पड़ता है और दिनभर सुस्ती बनी रहती है। अच्छी नींद सिर्फ शरीर के आराम के लिए नहीं, बल्कि दिमाग के लिए भी जरूरी है। सोने और जागने का समय लगभग तय रखने की कोशिश करना एक छोटी लेकिन काम की आदत हो सकती है।
4. हर समय कुछ न कुछ करते रहना
खाली बैठना आज कई लोगों को समय बर्बाद करने जैसा लगता है। काम खत्म हुआ तो फोन, फोन खत्म हुआ तो वीडियो और फिर कोई दूसरा काम। यानी दिमाग को लगातार कुछ न कुछ चाहिए। लेकिन आराम का मतलब आलस नहीं है। कुछ मिनट बिना स्क्रीन, बिना काम और बिना किसी लक्ष्य के शांत बैठना भी मानसिक ब्रेक बन सकता है।
5. खुद की तुलना दूसरों से करते रहना
सोशल मीडिया पर किसी की नौकरी, फिटनेस, घूमना या लाइफस्टाइल देखकर अपनी जिंदगी कम अच्छी लगने लगती है। समस्या यह है कि हम अपनी पूरी जिंदगी की तुलना किसी दूसरे की चुनी हुई कुछ तस्वीरों से करने लगते हैं। हर किसी की टाइमलाइन अलग होती है। इसलिए दूसरों की उपलब्धियों को अपनी कमी मानने के बजाय अपनी छोटी प्रगति पर ध्यान देना दिमाग के लिए ज्यादा स्वस्थ नजरिया हो सकता है।
मानसिक थकान हमेशा किसी बड़ी समस्या की वजह से नहीं होती। कभी-कभी लगातार भागती दिनचर्या ही दिमाग को ब्रेक नहीं लेने देती। इसलिए युवाओं के लिए हेल्थ का मतलब सिर्फ एक्सरसाइज और डाइट नहीं, बल्कि नींद, स्क्रीन टाइम, आराम और अपनी सोच के साथ सही रिश्ता बनाना भी है।
