India Health Survey: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) ने भारत में लोगों की सेहत और पोषण को लेकर एक नई रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक देश में बच्चों की सेहत, माताओं की देखभाल और टीकाकरण के मामले में कई बड़े सुधार हुए हैं। लेकिन, मोटापा और डायबिटीज से जुड़ी बीमारियों में बढ़ोतरी को लेकर एक नई चिंता भी उभरकर सामने आई है।
इस सर्वे के अनुसार छोटे बच्चों में कुपोषण की स्थिति पहले के मुकाबले बेहतर हुई है। 5 साल से कम उम्र के बच्चों में ठिगनापन 35.5% से घटकर 29.3% हो गया है। गंभीर कमजोरी के मामले भी 7.7% से घटकर 5.2% रह गए हैं। इसका मतलब है कि बच्चों के पोषण स्तर में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि बच्चों के टीकाकरण में सुधार हुआ है। 12 से 23 महीने के बच्चों में पूरा टीकाकरण अब 87.1% तक पहुंच गया है, जो पहले 83.8% था। इसके अलावा माताओं की सेहत में भी सुधार दिखा है। गर्भवती महिलाओं की जांच अब 95.9% तक पहुंच गई है। ज्यादा महिलाएं अब आयरन और फोलिक एसिड की गोलियां भी ले रही हैं, जिससे गर्भावस्था सुरक्षित बन रही है।
अस्पताल में डिलीवरी और स्वास्थ्य बीमा में बढ़ोतरी हुई है। देश में अब अधिकतर प्रसव अस्पतालों में हो रहे हैं। संस्थागत प्रसव की दर बढ़कर 90.6% हो गई है। साथ ही स्वास्थ्य बीमा का दायरा भी बढ़ा है। अब लगभग 60.2% परिवारों के पास स्वास्थ्य बीमा है, जबकि पहले यह 41% था। इसमें आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का बड़ा योगदान माना जा रहा है।
नई चुनौती
जहां एक तरफ सेहत के कई संकेत सुधरे हैं, वहीं दूसरी तरफ एक बड़ी समस्या भी सामने आई है जिसपर ध्यान दिया जाना बेहद जरूरी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अब देश में मोटापा, डायबिटीज और दिल की बीमारियों जैसे गैर-संचारी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं जो खतरे की घंटी है। इसका मतलब साफ है कि भारत अब एक दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है। एक तरफ कुपोषण से लड़ाई, और दूसरी तरफ बढ़ते वजन और खराब जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां। रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि भारत ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी प्रगति की है, लेकिन अब ध्यान सिर्फ पोषण और इलाज पर ही नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम पर भी देना होगा।
