High Glycemic Index Carbs And Lung Cancer: आजकल हम सब जानते हैं कि ज्यादा शुगर और रिफाइंड कार्ब्स खाना सेहत के लिए अच्छा नहीं होता, लेकिन अब एक नई स्टडी ने इससे भी बड़ा खतरा सामने रखा है। बेयलर विश्वविद्यालय और एमडी एंडरसन कैंसर सेंटर ह्यूस्टन की रिसर्च बताती है कि हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) वाले कार्ब्स, जो ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाते हैं, फेफड़ों के कैंसर का खतरा भी बढ़ा सकते हैं। यह बातें सुनकर थोड़ा चौंकना तो बनता ही है, क्योंकि ऐसे फूड्स अक्सर हमारी रोजमर्रा की डाइट में शामिल होते हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि स्टडी ने क्या पाया और हमें क्या सावधानियां रखनी चाहिए।
नई स्टडी क्या कहती है
इस स्टडी में ज्यादा ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फूड्स को फेफड़ों के कैंसर के बढ़ते खतरे से जोड़कर देखा गया। शोधकर्ताओं का कहना है कि जो कार्ब्स तुरंत शुगर बढ़ाते हैं, वे शरीर में ऐसे मेटाबॉलिक बदलाव लाते हैं, जो कैंसर सेल्स को बढ़ावा दे सकते हैं। यह निष्कर्ष कई लोगों के लिए चौंकाने वाले हैं क्योंकि GI हाई फूड्स आमतौर पर हमारी प्लेट में सबसे ज़्यादा जगह लेते हैं।
हाई GI वाले कार्ब्स का फेफड़ों पर असर
हाई GI कार्ब्स जैसे कि सफेद ब्रेड, मैदा, मीठे स्नैक्स और रिफाइंड फूड्स शरीर में ब्लड शुगर को अचानक ऊपर पहुंचा देते हैं। इससे इंसुलिन और IGF (Insulin Growth Factor) नामक हार्मोन में उछाल आता है। स्टडी बताती है कि IGF का लेवल बढ़ने से कैंसर सेल्स की ग्रोथ को मजबूती मिलती है, जिससे फेफड़ों के कैंसर का रिस्क बढ़ सकता है। यानी शुगर स्पाइक सिर्फ डायबिटीज ही नहीं, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का रास्ता भी खोल सकता है।
स्टडी में क्या असर देखा गया?
रिपोर्ट के मुताबिक, रिसर्च में हजारों लोगों के डेटा का विश्लेषण किया गया। पाया गया कि जिन लोगों की डाइट में हाई GI फूड्स ज्यादा थे, उनमें फेफड़ों के कैंसर का खतरा उन लोगों की तुलना में काफी अधिक था, जो लो-जीआई फूड्स खाते थे। खास बात यह है कि यह प्रभाव सिर्फ स्मोकर्स में ही नहीं, बल्कि नॉन-स्मोकर्स में भी देखा गया। यानी हाई GI कार्ब्स सभी के लिए समान रूप से जोखिम बढ़ाते हैं।
नॉन-स्मोकर्स में भी क्यों बढ़ रहा रिस्क?
आमतौर पर फेफड़ों का कैंसर धूम्रपान से जुड़ा माना जाता है, लेकिन इस अध्ययन ने दिखाया कि सिर्फ स्मोकिंग ही कारण नहीं है। शोधकर्ताओं का कहना है कि नॉन-स्मोकर्स में भी हाई GI कार्ब्स के कारण सूजन (inflammation), हार्मोनल बदलाव और मेटाबॉलिक डिसफंक्शन बढ़ सकता है, जो फेफड़ों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए यह मिथ तोड़ना जरूरी है कि फेफड़ों का कैंसर सिर्फ धूम्रपान से होता है।
किन लोगों में खतरा ज्यादा देखा गया
स्टडी के अनुसार, ऐसे लोग जिनकी डाइट में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट ज्यादा होते हैं, जिनकी फिजिकल एक्टिविटी कम है, या जिनका BMI असंतुलित है, उनमें यह जोखिम अधिक पाया गया। इसके अलावा जो लोग लगातार प्रोसेस्ड फूड, मीठे ड्रिंक्स और हाई GI स्नैक्स खाते हैं, उनके फेफड़ों पर दबाव और अधिक बढ़ जाता है। यह finding हमारे रोजमर्रा के खाने पर ध्यान देने की बड़ी चेतावनी देता है।
एक्सपर्ट्स क्या सलाह देते हैं
रिसर्च से जुड़े एक्सपर्ट्स का कहना है कि अपनी डाइट का GI लेवल कम रखना सबसे पहला कदम है। इसके लिए साबुत अनाज, दालें, ब्राउन राइस, ओट्स, फल-सब्जियां और फाइबर युक्त चीजें ज्यादा खानी चाहिए। ऐसी चीजें ब्लड शुगर को धीरे-धीरे बढ़ाती हैं, जिससे कैंसर सेल्स के बढ़ने की संभावना कम होती है। साथ ही नियमित एक्सरसाइज, स्मोकिंग से दूरी और हेल्दी लाइफस्टाइल भी बहुत जरूरी है।
