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मौसम हो गया करण जौहर की फिल्म- दिखा रहा कभी धूप कभी बारिश, लगातार बदलते वेदर में अपनाएं ये हेल्दी हैबिट्स

  • Authored by: Ritu raj
  • Updated Jun 16, 2023, 02:58 PM IST

जलवायु परिवर्तन का मानव स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव देखने को मिल रहा है, जिससे लोग शारीरिक, मानसिक और सामाजिक तौर पर काफी प्रभावित हो रहे हैं। गर्मी के मौसम में दिन प्रतिदिन बढ़ते तापमान के कारण लोग हीटस्ट्रोक की चपेट में आ रहे हैं।

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बदलते वेदर में अपनाएं ये हेल्दी हैबिट्स

जलवायु परिवर्तन का मानव स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव देखने को मिल रहा है, जिससे लोग शारीरिक, मानसिक और सामाजिक तौर पर काफी प्रभावित हो रहे हैं। गर्मी के मौसम में दिन प्रतिदिन बढ़ते तापमान के कारण लोग हीटस्ट्रोक की चपेट में आ रहे हैं। जलवायु परिवर्तन का सबसे ज्यादा असर कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों पर देखने को मिल रहा है। इसकी वजह से लोग मलेरिया और डेंगू बुखार जैसी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। जंगल में लग रही की आग और प्रदूषण की वजह से वायु गुणवत्ता भी खराब हो रही है जिससे सांस लेने में लोगों को काफी दिक्कत हो रही हैं और हृदय रोगों का खतरा बढ़ता जा रहा है।

जलवायु परिवर्तन के कारण खाद्य उत्पादन और पानी की उपलब्धता में रुकावटें बढ़ते जा रही है जिसकी वजह से कुपोषण, खाद्य असुरक्षा और जलजनित रोगों का खतरा बढ़ता जा रहा है। जलवायु परिवर्तन की वजह से हो रही घटनाओं, जैसे कि नेचुरल डिजास्टर का सीधा असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इसकी वजह से लोग तनाव, चिंता और अवसाद के शिकार हो रहे हैं।

वायु प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ, गले में जलन और खांसी के रूप में देखने को मिल रहा है। लगातार हो रहे जलवायु परिवर्तन की वजह से लोग बीमार भी काफी हो रहे हैं। इतना ही नहीं जलवायु परिवर्तन की वजह से अल्जाइमर रोग का भी खतरा बढ़ता जा रहा है। लगातार बढ़ते तापमान की वजह से हर साल लोगों की 50 से 58 घंटे की नींद खराब हो सकती है। इसकी वजह से भी लोगों को कई तरह की बीमारियां हो सकती है।

हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि बढ़ते तापमान और बारिश में कमी की वजह से मलेरिया, डेंगू और लाइम रोग का खतरा बढ़ता जा रहा है। गर्म तापमान की वजह से ओजोन प्रदूषण को बढ़ावा मिलता है, जिसे अक्सर स्मॉग के रूप में जाना जाता है, जो वायुमार्ग को नुकसान पहुंचाता है और अस्थमा और पुराने फेफड़ों के विकारों जैसे वातस्फीति और ब्रोंकाइटिस के खतरे को बढ़ाता है। ओजोन प्रदूषण की वजह से सबसे ज्यादा अस्थमा का खतरा रहता है।

हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि “मौसम में बदलाव मूल रूप से हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली और मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम को प्रभावित करता है। लगातार बदलते मौसम के कारण वायरल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इसकी वजह से बीमार पड़ने की संभावना काफी बढ़ जाती है। बढ़ते तापमान की वजह से श्वसन रग, साइनसाइटिस, अस्थमा और ब्रोंकाइटिस, दस्त, मांसपेशियों में दर्द, डेंगू, मलेरिया जैसी समस्याएं बढ़ जाती है।

जलवायु परिवर्तन को लेकर हेल्थ एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि, हमें जितना संभव हो प्रकृति के करीब रहने की जरूरत है। हर एक दिन अपनी प्रतिरक्षा में निवेश करें। बदलते मौसम में खुद को स्वस्थ रखने के लिए प्रतिक्षा प्रणाली का मजबूत होना बेहद जरूरी है। इसके लिए आप खुद को हमेशा हाइड्रेट रखें, पर्याप्त नींद लें, ध्यान करें, स्ट्रेस लेवल कंट्रोल करने की कोशिश करें, व्यायाम करें, स्वस्थ आहार लें।

रितु राज
Ritu rajauthor

<p>ऋतु राज टाइम्स नाऊ नवभारत डिजिटल में लाइफस्टाइल डेस्क में बतौर चीफ कॉफी एडिटर कार्यरत हैं। उनकी हेल्थ और लाइफस्टाइल की खबरों पर अच्छी पकड़ है। यहां वो एक्सप्लेनर और लाइफस्टाइल की ट्रेंडिंग खबरों को लोगों के लिए परोसने का काम करते हैं। उनकी फूड, पैरेंटिंग, ब्यूटी पर अच्छी पकड़ है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की। वो बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से ताल्लुक रखते हैं। ऋतु राज ने पिछले 6 सालों में एनडीटीवी, जनसत्ता जैसे बड़े संस्थानों में अलग अलग बीट्स पर काम किया है। हालांकि उनकी खास रूची न्यूज, लाइफस्टाइल और एंटरटेनमेंट में रही है। ऋतु राज एक वॉयस ओवर आर्टिस्ट भी रहे हैं। उन्होंने एनडीटीवी में वॉयस ओवर आर्टिस्ट के तौर पर भी काम किया है। यहां उन्होंने लोकसभा चुनाव 2019 को भी कवर किया और खबरों को धार देना सीखा। साल 2021 में एनडीटीवी से इस्तीफा देने के बाद ऋतुराज ने जनसत्ता के साथ जुड़े और यहां वेब स्टोरीज पर अपनी रफ्तार बनाई और अलग अलग एंगल से खबरों को बनाना सीखा।</p>

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