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प्रकृति के वरदान से कम नहीं है बेहया का पौधा, सेहत को मिलेंगे चौंकाने वाले फायदे, शोध में हुआ खुलासा

प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और औषधीय पौधों की बात करें तो बेहया (थेथर) का नाम कम ही सुना जाता है, लेकिन शोध में इस पौधे के कई चौंकाने वाले लाभ सामने आए हैं। आयुर्वेद में बेहया (जिसे थेथर या बिछिया भी कहा जाता है) को औषधीय गुणों वाला पौधा माना गया है और अब वैज्ञानिक अध्ययन भी इसके फायदों की पुष्टि कर रहे हैं।

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behaya plant benefits

Photo : iStock

रिसर्च गेट के एक अध्ययन के अनुसार, बेहया के पत्तों और जड़ों में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और जीवाणुरोधी गुण पाए गए हैं, जो कई बीमारियों से बचाव में मदद कर सकते हैं। शोध में पाया गया कि बेहया के अर्क (रस) का उपयोग गठिया, मांसपेशियों के दर्द और जोड़ों की सूजन में कारगर साबित हो सकता है।थेथर की पत्तियों का रस पाचन सुधारने, अपच दूर करने और पेट की समस्याओं को कम करने में मदद कर सकता है। शोध के अनुसार, इस पौधे में मौजूद तत्व ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में सहायक हो सकते हैं, जिससे यह मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद हो सकता है। बेहया के पत्तों से निकाला गया रस त्वचा रोगों, घावों और जलन को ठीक करने में मददगार पाया गया है। इसके सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को बढ़ावा मिलता है, जिससे मौसमी बीमारियों से बचाव हो सकता है।

आयुर्वेद में बेहया के फायदे

आयुर्वेद में बेहया को एक प्राकृतिक औषधि माना गया है। इसे पत्तों, जड़ों और फूलों के रूप में औषधीय प्रयोग में लाया जाता है। पारंपरिक चिकित्सा में बुखार, खांसी, चोट और पीलिया जैसी बीमारियों के इलाज में इसका उपयोग किया जाता रहा है। विशेषज्ञों की राय है कि इसका सेवन सीमित मात्रा में करना ठीक होता है और किसी गंभीर बीमारी की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर ली जानी चाहिए। वहीं, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के लिए इसका सेवन करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। शोध में पाया गया है कि इसे सही मात्रा और सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो यह कई स्वास्थ्य समस्याओं का प्राकृतिक समाधान बन सकता है।

खेती के लिए भी बेहद फायदेमंद

इसके साथ ही बेहया के रस का उपयोग अब खेती में भी एक प्रभावी उपाय बन गया है, क्योंकि इसके एंटीबायोटिक, एंटीसेप्टिक और एंटी माइक्रोबियल गुण फसलों को बैक्टीरिया और कीटों से बचाने में मदद करते हैं। यह न केवल कीटों को दूर करता है, बल्कि पशुओं से भी फसलों की सुरक्षा करता है, क्योंकि इसका रस जानवरों के लिए जहरीला होता है, और वे इससे दूर रहते हैं।

इनपुट: भाषा

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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