Devendra Nath Mahato: जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के विरोध में अनशन कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत सोमवार को अचानक बिगड़ गई। स्वास्थ्य में लगातार गिरावट के बाद चिकित्सकों की सलाह पर उन्हें देर शाम इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में भर्ती होने से पहले देवेंद्र नाथ महतो एंबुलेंस से विधानसभा घेराव कर रहे छात्रों के बीच पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि वह पिछले नौ दिनों से लगातार अनशन पर हैं। अनशन की शुरुआत में देवेंद्र नाथ महतो ने पानी का सेवन भी बंद कर दिया था। हालांकि, सोनम वांगचुक की सलाह के बाद उन्होंने पानी और नमक लेना शुरू किया। इसके बावजूद लंबे समय से जारी अनशन का उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ा और उनकी हालत लगातार कमजोर होती चली गई। सोमवार को उनकी तबीयत और बिगड़ने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया।
झारखंड विधानसभा के पास पहुंचे छात्र
गौरतलब है कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने सोमवार को मार्च के दौरान कई अवरोधक तोड़ दिए और झारखंड विधानसभा के पास पहुंच गए, जिसके बाद पुलिस ने पानी की बौछार की, आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। विधानसभा की कार्यवाही दोपहर के समय दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। प्रदर्शनकारियों के अंतिम अवरोधक के पास पहुंचने पर पुलिस ने कार्रवाई की। यह अवरोधक विधानसभा की ओर जाने वाली सड़क पर जगन्नाथपुर मंदिर के पास लगाया गया था। कई प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई में वे घायल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने अवरोधक तोड़ने के बाद विधानसभा के गेट नंबर एक के बाहर पहुंचकर धरना शुरू कर दिया। बता दें कि आंदोलन के 17वें दिन सुबह करीब साढ़े 10 बजे पुराने विधानसभा भवन के बाहर से मार्च शुरू हुआ।
हेमंत सोरेन के 51वें जन्मदिन के दिन निकली मार्च
यह मार्च मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के 51वें जन्मदिन के दिन निकाला गया। इस दौरान देवेंद्र नाथ महतो एंबुलेंस से मार्च में शामिल हुए। उनके हाथ में पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत शिबू सोरेन का चित्र था। विधानसभा मार्च के मार्ग में कंटीले तार वाले अवरोधक लगाए जाने पर आपत्ति जताते हुए महतो ने कहा कि छात्रों के साथ हुए अन्याय को लेकर उनमें आक्रोश बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, "सरकार हमारी आवाज दबाने पर तुली हुई है। अब हम कोई बातचीत नहीं करेंगे।" तिरंगे और "जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करो या सीबीआई जांच कराओ", "जेएसएससी पर छापा मारने से सीआईडी क्यों बच रही है?" और "निष्पक्ष जांच कराओ, सच्चाई सामने लाओ" जैसे नारों वाली तख्तियां लिए हजारों युवक-युवतियों ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच एक के बाद एक अवरोधक तोड़ दिए। कई प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई में वे घायल हुए हैं।
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पुलिस ने की पानी की बौछार और लाठीचार्ज
मार्च के जगन्नाथपुर मंदिर पहुंचने पर पुलिस ने पानी की बौछार की तो प्रदर्शनकारी तिरंगे लहराते हुए नाचने लगे। हालांकि, जब उन्होंने आगे बढ़ने की कोशिश की तो स्थिति बिगड़ गई और पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। भीड़ को रोकने में नाकाम रहने पर पुलिस ने विधानसभा से करीब 200 मीटर दूर प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागे। छात्रों ने 11 अगस्त को विधानसभा तक फिर मार्च निकालने की घोषणा की। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि सरकार उन 13 परीक्षाओं में से केवल तीन को रद्द करने पर सहमत हुई है, जिन्हें वे रद्द करने की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारी झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं। वे 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा सहित कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) या राज्य के बाहर के उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के एक पैनल से कराने की भी मांग कर रहे हैं।
