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National Deworming Day: 1–19 साल के बच्चों को पेट के कीड़ों की दवा देना क्यों जरूरी? डोज मिस हो जाए तो क्या करें

National Deworming Day बच्चों और किशोरों को Worm Infection से बचाने के लिए मनाया जाता है। जानिए किस उम्र तक Deworming दी जाती है, पेट के कीड़े क्यों खतरनाक हैं और डोज छूट जाए तो क्या करें।

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National Deworming Day 2026 (AI Image)

National Deworming Day 2026: मेरा बच्चा तो बिल्कुल ठीक है, फिर उसे Worm की दवा क्यों दी जा रही है? अगर आपके घर में भी यह सवाल उठा है, तो आप अकेले नहीं हैं। अक्सर पेरेंट्स पेट के कीड़ों को सिर्फ पेट दर्द, भूख कम लगने या पेट में कुछ अजीब महसूस होने से जोड़कर देखते हैं। लेकिन हर बार Worm Infection के संकेत इतने साफ हों, यह जरूरी नहीं।

कुछ आंतों के कीड़े शरीर में पहुंचकर बच्चे के पोषण पर असर डाल सकते हैं। लंबे समय तक संक्रमण रहने पर पोषक तत्वों के इस्तेमाल में परेशानी, एनीमिया, कुपोषण और बच्चे के शारीरिक-मानसिक विकास पर असर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यही वजह है कि भारत में बच्चों और किशोरों के लिए National Deworming Programme चलाया जाता है। जो एक तय सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रम है, जिसकी अपनी उम्र सीमा, तारीख और प्रक्रिया है।

कब मनाते हैं नेशनल डिवर्मिंग डे

भारत में National Deworming Day हर साल दो बार आयोजित किया जाता है। पहला राउंड 10 फरवरी और दूसरा राउंड 10 अगस्त को होता है। यह कार्यक्रम 2015 में भारत सरकार ने शुरू किया था और इसका उद्देश्य 1 से 19 साल तक के बच्चों और किशोरों तक डिवर्मिंग की सुविधा पहुंचाना है।

पेट के कीड़े मारना जरूरी क्यों है?

पेट के कुछ कीड़े मिट्टी, दूषित पानी-खाने और खराब स्वच्छता से जुड़े संक्रमणों के जरिए शरीर में पहुंच सकते हैं। ये आंतों में रहकर बच्चे के शरीर में पोषक तत्वों के इस्तेमाल को प्रभावित कर सकते हैं। यही कारण है कि Worm Infection को सिर्फ पेट की छोटी-मोटी समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। NHM के अनुसार, बच्चों के पेट के कीड़े, एनीमिया, कुपोषण और शारीरिक व मानसिक विकास पर असर से जुड़े हो सकते हैं।

कौन-सी दवा दी जाती है और उम्र क्यों मायने रखती है?

National Deworming Programme में Albendazole नाम की टैबलेट का इस्तेमाल किया जाता है। सरकारी गाइडलाइन में 1–2 साल के बच्चों के लिए 400 mg टैबलेट की आधी मात्रा और 2–19 साल के बच्चों के लिए 400 mg की पूरी टैबलेट का यूज किया जाता है।

छोटे बच्चे को टैबलेट देने का तरीका भी अलग हो सकता है। इसलिए पेरेंट्स को अपनी तरफ से डोज तय करने या घर में बची हुई कोई पुरानी दवा देने के बजाय सरकारी कार्यक्रम में दिए गए निर्देशों और स्वास्थ्यकर्मी की सलाह को ही मानना चाहिए।

कहां मिलती है ये दवा

स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए स्कूल में ये सरकारी प्रोग्राम चलाया जाता है। वहीं आंगनवाड़ी केंद्रों में भी इसका आयोजन किया जाता है। साथी ही अगर आज के दिन आप डिवर्मिंग का डोज मिस कर देते हैं। तो National Deworming Programme में Mop-Up Day की व्यवस्था होती है, ताकि छूटे हुए बच्चों को बाद में Deworming दी जा सके। सरकारी गाइडलाइंस में अनुपस्थित या बीमारी के कारण डोज न ले पाने वाले बच्चों की सूची बनाकर उन्हें Mop-Up Day पर शामिल करने का प्रावधान बताया गया है।

दवा के साथ बच्चों को खाना खाने से पहले और टॉयलेट के बाद हाथ धोने, नाखून छोटे और साफ रखने, साफ पानी पीने, फल-सब्जियां अच्छी तरह धोने और मिट्टी में खेलने के बाद हाथ साफ करने की आदत डालना भी उतना ही जरूरी है।

Avni Bagrola
अवनि बागरोलाauthor

अवनी बागरोला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के लाइफस्टाइल सेक्शन में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। फैशन, ब्यूटी, ट्रेंड्स, पर्सनल स्टाइलिंग और आधुनिक जीवनशैली से जुड़े कंटेंट पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें युवा और स्टाइल-सेवी ऑडियंस के बीच खास पहचान दिलाती है। अवनी की लेखन शैली सरल, ट्रेंडी और यूज़र-फ्रेंडली है, जो पाठकों को तेजी से बदलते फैशन व लाइफस्टाइल ट्रेंड्स को समझने में मदद करती है। अब तक 2,500 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुकी अवनी क्रिएटिव अप्रोच, अपडेटेड नॉलेज और रियल-टाइम ट्रेंड सेंस के लिए जानी जाती हैं।

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