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India Health Summit 2025: डेंगू के बढ़ते खतरे और बचाव पर डॉक्टर्स ने दी अहम सलाह, जानिए कैसे पहचानें लक्षण और क्या है इलाज

India Health Summit 2025: टाइम्स नेटवर्क इंडिया हेल्थ समिट 2025 में डेंगू की बढ़ती चुनौती पर विशेषज्ञों ने चर्चा की। डॉ. संजीव बागाई और डॉ. अतुल काकर ने डेंगू के शुरुआती लक्षण, सामान्य मिथक और सही इलाज के तरीके बताए। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक पूरी तरह सुरक्षित वैक्सीन नहीं आती, तब तक बचाव ही सबसे बड़ा हथियार है। मॉस्कीटो कंट्रोल, व्यक्तिगत सुरक्षा और जागरूकता से ही हम इस बीमारी से सुरक्षित रह सकते हैं।

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डेंगू अब सिर्फ मानसून की बीमारी नहीं

India Health Summit 2025: आज टाइम्स नेटवर्क इंडिया हेल्थ समिट 2025 में डेंगू के बढ़ते खतरे को लेकर एक महत्वपूर्ण सेशन आयोजित किया गया। इस सत्र का शीर्षक था - 'भारत में डेंगू से लड़ाई: संकट, नियंत्रण और वैक्सीनेशन की उम्मीद'। इसमें देश के कुछ टॉप हेल्थ एक्सपर्ट शामिल हुए, जैसे पद्म श्री डॉ. संजीव बागाई, डॉ. के. मदन गोपाल और डॉ. अतुल काकर। उन्होंने बताया कि अब डेंगू सिर्फ मानसून की बीमारी नहीं रही, बल्कि सालभर हर जगह यह चुनौती बनता जा रहा है। विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि डेंगू से लड़ने का सबसे कारगर तरीका है सुरक्षा, जागरूकता और व्यक्तिगत बचाव, क्योंकि सुरक्षित और प्रभावी वैक्सीन अभी पूरी तरह उपलब्ध नहीं है। यह सेशन All Out द्वारा स्पॉन्सर किया गया था।

डेंगू अब सिर्फ मानसून की बीमारी नहीं

डॉ. बागाई ने बताया कि लगभग 55% डेंगू मामले सबक्लिनिकल होते हैं। इसका मतलब है कि असल में संक्रमित लोगों की संख्या रिपोर्ट किए गए मामलों से कहीं ज्यादा है।

उन्होंने कहा, 'डेंगू का टेस्ट दो तरह का होता है - NS1 एंटिजन टेस्ट और IgM/IgG एंटीबॉडी टेस्ट। NS1 टेस्ट पहले दिन पॉजिटिव नहीं दिखाता। जल्दी टेस्ट कराने पर फॉल्स नेगेटिव आता है और केस कम दिखते हैं। इसलिए डेंगू पर ध्यान देना जरूरी है, यहाँ तक कि मलेरिया से भी ज्यादा।'

डेंगू खतरा फैल रहा है

डॉ. मदन गोपाल ने कहा कि डेंगू अब सिर्फ कुछ देशों तक सीमित नहीं है। '1970 के दशक में सिर्फ 7–9 देशों में डेंगू था। आज 100 से ज्यादा देश प्रभावित हैं। यह अब मौसमी या स्थानीय समस्या नहीं रही, बल्कि एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट बन गई है।'

लक्षण पहचानना जरूरी

डॉ. अतुल काकर ने बताया कि शुरुआती पहचान सबसे महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, डेंगू के दो बहुत खास लक्षण हैं,

  • रेट्रो-ऑर्बिटल दर्द – आंख के पीछे तेज दर्द
  • तेज पीठ दर्द

अन्य लक्षण जैसे मांसपेशियों में दर्द, बुखार और उल्टी कई वायरल बीमारियों में दिखते हैं, लेकिन ये दो लक्षण डेंगू के लिए ज्यादा विशिष्ट हैं।

मिथक और सही इलाज

डॉ. बागाई ने साफ कहा, 'योग या घरेलू नुस्खे जैसे करेला जूस, पपीते के पत्ते आदि डेंगू में असर नहीं करते। सिर्फ पैरासिटामोल ही सुरक्षित इलाज है। एस्पिरिन, इबुप्रोफेन या नियासिनमाइड लेने से खून बहने का खतरा बढ़ जाता है।'

उनका कहना था, 'घर पर प्रयोग न करें। सही इलाज के लिए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। यह आपकी और परिवार की सुरक्षा का मामला है।'

वैक्सीन पर चर्चा

डॉ. बागाई ने वैक्सीन की स्थिति भी बताई,

  • Dengvaxia - प्राथमिक संक्रमण में असर नहीं करती, सुरक्षा कुछ सालों में कम हो जाती है।
  • Qdenga - उम्र के सभी समूहों के लिए बनाई गई है, लेकिन सिर्फ डेंगू 1 और 2 टाइप में असरदार है।

ICMR और Panacea Biotec Phase 3 ट्रायल कर रहे हैं, जिसमें 10,000 लोग शामिल हैं। डॉ. बागाई ने चेताया कि डेंगू का इम्यून रिस्पांस जटिल है और गलत प्रतिक्रिया बीमारी को और गंभीर बना सकती है।

बचाव ही सबसे बड़ा हथियार

डॉ. बागाई का अंतिम संदेश था, 'सुरक्षित और असरदार डेंगू वैक्सीन अभी दूर है। तब तक सबसे अच्छा तरीका है बचाव,

  • घर में मच्छर रहित माहौल बनाएं
  • मच्छरदानी का इस्तेमाल करें
  • पानी जमा न होने दें
  • खुद और परिवार को मच्छर से बचाएं
  • वैक्सीन पर जल्दी भरोसा करना खतरनाक हो सकता है।'

निष्कर्ष

हेल्थ समिट में यह साफ हुआ कि डेंगू से लड़ने का असली हथियार है सावधानी और जागरूकता। चाहे वैक्सीन सीमित ही क्यों न हो, सही समय पर लक्षण पहचानना, मिथकों से दूर रहना और व्यक्तिगत बचाव अपनाना ही हर नागरिक को सुरक्षित रख सकता है।

Vineet
विनीत author

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विष... और देखें

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