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Egg Freezing: प्रियंका-कृति ही नहीं, इन एक्ट्रेसेस ने भी फ्रीज करवाए एग्स, जानें क्या है ये प्रक्रिया, साइड इफेक्ट्स और किसे करवाना चाहिए

बच्चा कब करना है, यह हर महिला का अपना फैसला है। कुछ महिलाएं भविष्य के लिए अपने एग्स सुरक्षित रखती हैं, ताकि बाद में मां बनने की कोशिश की जा सके। जानिए आसान भाषा में एग फ्रीजिंग क्या है, इसमें क्या परेशानी हो सकती है।

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एग फ्रीजिंग क्या होता है

Egg Freezing: आजकल शादी और बच्चों को लेकर हर महिला की टाइमलाइन एक जैसी नहीं होती। कोई पहले करियर बनाना चाहती है, कोई शादी के बाद कुछ साल रुकना चाहती है और कोई अभी मां बनने के लिए तैयार नहीं होती। ऐसे में एग फ्रीजिंग का नाम सुनने को मिलता है।

हाल में कृति सेनन ने बताया कि उन्होंने फिल्म मिमी की तैयारी के दौरान अपने एग्स फ्रीज करवाए थे। इससे पहले प्रियंका चोपड़ा भी बता चुकी हैं कि उन्होंने अपने 30 की उम्र की शुरुआत में यह प्रक्रिया कराई थी। इसी के साथ मोना सिंह, तनीषा मुखर्जी और ईशा गुप्ता समेत कुछ दूसरी एक्ट्रेसेस ने भी अपने एग्ज फ्रीज करवाएं हैं।

एग फ्रीजिंग क्या होता है

आसान भाषा में कहें तो एग फ्रीजिंग में महिला के एग्स को भविष्य के लिए सुरक्षित रख दिया जाता है। बाद में जब वह बच्चा चाहती है, तो डॉक्टर इन सुरक्षित एग्स की मदद से प्रेग्नेंसी की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि एग फ्रीज करवाने के बाद आगे चलकर बच्चा होना तय हो जाता है।

एग्स फ्रीज कैसे किए जाते हैं?

इसे बिल्कुल आसान तरीके से समझें, तो एग फ्रीजिंग की प्रोसेस में कुछ समय के लिए महिला को ऐसी दवाएं दी जाती हैं, जिनसे एक से ज्यादा एग्स तैयार हो सकें। डॉक्टर कुछ दिनों तक उनकी निगरानी करते हैं।

जब एग्स तैयार हो जाते हैं, तो एक छोटी मेडिकल प्रक्रिया के जरिए उन्हें बाहर निकाला जाता है। इसके बाद उन्हें बहुत ठंडे तापमान में सुरक्षित रख दिया जाता है। बाद में जरूरत पड़ने पर इन्हीं एग्स का इस्तेमाल प्रेग्नेंसी की कोशिश में किया जा सकता है।

किसे करवाना चाहिए एग्ज फ्रीज

हर महिला को एग फ्रीजिंग की जरूरत नहीं होती। यह उन महिलाओं के लिए एक विकल्प हो सकता है जो अभी बच्चा नहीं चाहतीं, लेकिन आगे चलकर मां बनने की संभावना को बचाकर रखना चाहती हैं।

कुछ महिलाओं को ऐसी बीमारी या इलाज का सामना करना पड़ सकता है, जिसका असर आगे उनकी प्रेग्नेंसी की क्षमता पर पड़ सकता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर एग फ्रीजिंग का ऑप्शन कंसीडर करते हैं। एग फ्रीज करने के फैसले में उम्र भी अहम होती है। कम उम्र में एग्ज फ्रीज करवाने से फ्युचर में प्रेगनेंट होने की संभावना ज्यादा होती है।

एग फ्रीजिंग के साइड इफेक्ट

कुछ महिलाओं को इस दौरान पेट फूलना, भारीपन, थकान, मूड में बदलाव या हल्का दर्द महसूस हो सकता है। क्योंकि शरीर में कुछ समय के लिए दवाओं का असर होता है, इसलिए हर किसी का अनुभव अलग हो सकता है। वहीं किन्हीं स्थितियों में ज्यादा दवाओं के कारण अंडाशय पर ज्यादा असर भी पड़ सकता है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि, ये प्रक्रिया किसी एक्सपेरियंस डॉक्टर से ही करवाएं।

प्रेगनेंसी की गारंटी

एग फ्रीजिंग भविष्य के लिए एक सुरक्षित विकल्प हो सकता है। लेकिन इसे बच्चे की गारंटी नहीं माना जा सकता। आगे की प्रेगनेंसी कई बातों पर निर्भर करती है, जिसमें एग फ्रीज करवाते समय उम्र और सुरक्षित किए गए एग्स की संख्या भी शामिल है।

एग्ज फ्रीज करवाने का फैसला हर महिला का अपना होना चाहिए। ये कोई सोशल मीडिया ट्रेंड नहीं है। आप अपनी जरूरत और स्थिति के हिसाब से इस विकल्प को कंसीडर कर सकती हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। एग फ्रीजिंग हर महिला के लिए जरूरी या उपयुक्त नहीं होती। प्रक्रिया, फायदे, संभावित जोखिम और अपनी स्थिति समझने के लिए योग्य डॉक्टर या फर्टिलिटी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

Avni Bagrola
अवनी बागरोलाauthor

अवनी बागरोला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के लाइफस्टाइल सेक्शन में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। फैशन, ब्यूटी, ट्रेंड्स, पर्सनल स्टाइलिंग और मॉडर्न लाइफस्टाइल से जुड़े कंटेंट पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें जेन Z और स्टाइल-सेवी ऑडियंस के बीच खास पहचान दिलाती है। अवनी की लेखन शैली सरल, ट्रेंडी और यूज़र-फ्रेंडली है, जो पाठकों को तेजी से बदलते फैशन व लाइफस्टाइल ट्रेंड्स को समझने में मदद करती है। अब तक 3000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुकी अवनी क्रिएटिव अप्रोच, अपडेटेड नॉलेज और रियल-टाइम ट्रेंड सेंस के लिए जानी जाती हैं।

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