भारतीय संस्कृति में हाथ से खाना खाने की परंपरा सदियों पुरानी है। आज भी हमारे देश में कई लोग चम्मच या कांटे के बजाय अपने हाथों से भोजन करना पसंद करते हैं। अक्सर घर के बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि हाथों से खाने से खाना ज्यादा स्वाद लगता है और पाचन भी बेहतर होता है। लेकिन क्या इस बात के पीछे कोई वैज्ञानिक सच्चाई है या यह सिर्फ एक पुरानी मान्यता है? इस दिलचस्प सवाल का जवाब जाने-माने अमेरिकी फिजिशियन और पेन स्पेशलिस्ट डॉ. कुणाल सूद ने सोशल मीडिया के जरिए दिया है। आइए जानते हैं कि क्या वाकई हाथों से खाने और पाचन तंत्र के बीच कोई सीधा संबंध है।
पाचन से जुड़ी लोकप्रिय धारणा और उसका सच
अक्सर यह माना जाता है कि जब हम अपनी उंगलियों से खाने को छूते हैं, तो शरीर और दिमाग को पहले ही सिग्नल मिल जाता है कि भोजन आने वाला है। लोगों का मानना है कि इससे हमारा पाचन तंत्र खाने को पचाने के लिए पहले से तैयार हो जाता है। डॉ. कुणाल सूद के अनुसार, यह बात कुछ हद तक सही तो है, लेकिन इसका कारण उंगलियों का कोई जादुई असर नहीं है, बल्कि हमारे शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया है। विज्ञान के मुताबिक, जैसे ही हम खाने को देखते हैं, उसकी खुशबू लेते हैं या उसे छूते हैं, हमारा दिमाग सक्रिय हो जाता है।
क्या हाथों से खाने से पाचन बेहतर होता है?
डॉ. सूद बताते हैं कि जब आप खाने को देखते, सूंघते या हाथ से छूते हैं, तो भोजन का एक कौर मुंह में जाने से पहले ही आपका दिमाग लार ग्रंथियों, पेट के एसिड और पाचक एंजाइमों को सक्रिय कर देता है। चिकित्सा विज्ञान में इस प्रक्रिया को'सिफेलिक फेज ऑफ डाइजेशन कहा जाता है। यानी आपका शरीर पहले से ही भोजन को पचाने की तैयारी शुरू कर देता है।
हालांकि, इस बात का कोई पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि उंगलियों की नसों में कोई ऐसा खास तंत्र होता है जो सीधे पाचन में सुधार करता है। लेकिन हाथों से खाने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि इससे हमारा सेंसरी अनुभव बहुत बढ़ जाता है। आप खाने के टेक्सचर, गर्माहट और उसकी नरमी को अपनी उंगलियों से महसूस करते हैं। जब आप भोजन के साथ इस तरह पूरी तरह जुड़ते हैं, तो दिमाग पाचन तंत्र को और बेहतर तरीके से तैयार कर पाता है। इसलिए, कांटे-चम्मच के मुकाबले हाथों से खाना हमारे खाने के अनुभव को ज्यादा प्राकृतिक और आनंददायक बना देता है।
