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World Polio Day: पोलियो की बूंदें और इंजेक्शन दोनों क्यों हैं जरूरी? जानें OPV और IPV का अंतर

World Polio Day: विश्व पोलियो दिवस पर जानें पोलियो की बूंदें (OPV) और इंजेक्शन (IPV) बच्चों को कैसे सुरक्षा देते हैं। कैस अलग हैं ये दोनों वैक्सीन, जानिए इनका महत्व, अंतर और बच्चों के टीकाकरण की जरूरत।

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विश्व पोलियो दिवस 2026 (Photo - AI)

World Polio Day: पोलियो की दो बूंदें... बचपन की यह याद आज भी करोड़ों लोगों के जेहन में ताजा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पोलियो से बचाव के लिए बच्चों को सिर्फ मुंह से दी जाने वाली वैक्सीन ही नहीं, बल्कि इंजेक्शन भी लगाया जाता है? दरअसल, पोलियो की बूंदें (OPV) और इंजेक्शन (IPV) शरीर में अलग-अलग तरह से सुरक्षा विकसित करने में मदद करते हैं। यही वजह है कि कई टीकाकरण कार्यक्रमों में दोनों को शामिल किया जाता है। हर साल 24 अक्टूबर को मनाया जाने वाला विश्व पोलियो दिवस (World Polio Day) हमें याद दिलाता है कि इस बीमारी के खिलाफ लड़ाई में जागरूकता और समय पर टीकाकरण की कितनी अहम भूमिका है। आइए जानते हैं विश्व पोलियो दिवस के मौके पर OPV और IPV का अंतर।

क्या है पोलियो और कितना खतरनाक है?

पोलियो एक संक्रामक बीमारी है, जो पोलियो वायरस के कारण होती है। यह मुख्य रूप से दूषित पानी या भोजन और संक्रमित मल के संपर्क से फैल सकता है। वायरस शरीर में पहुंचकर तंत्रिका तंत्र पर हमला कर सकता है और गंभीर मामलों में मांसपेशियों को प्रभावित करते हुए लकवे का कारण बन सकता है। इसका कोई विशिष्ट इलाज नहीं है, लेकिन टीकाकरण से इससे बचाव संभव है।

पोलियो के लिए OPV क्या है?

OPV यानी ओरल पोलियो वैक्सीन मुंह के जरिए दी जाती है। इसमें कमजोर किए गए जीवित पोलियो वायरस का इस्तेमाल किया जाता है, जो बीमारी पैदा किए बिना शरीर में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया विकसित करने में मदद करते हैं। इस वैक्सीन की एक खासियत यह है कि यह आंतों में भी प्रतिरक्षा विकसित करती है। इससे वायरस के व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलने की संभावना कम करने में मदद मिलती है। यही कारण है कि पोलियो उन्मूलन अभियानों में OPV की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसे बड़ी संख्या में बच्चों तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है।

पोलियो का इंजेक्शन यानी IPV क्या है?

IPV यानी इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन इंजेक्शन के जरिए दी जाती है। इसमें निष्क्रिय यानी मारे गए पोलियो वायरस का इस्तेमाल होता है, जो शरीर में बीमारी पैदा नहीं कर सकता है। यह वैक्सीन रक्त में एंटीबॉडी विकसित करती है, जो वायरस को तंत्रिका तंत्र तक पहुंचने से रोकने और लकवे से सुरक्षा देने में मदद करती हैं। IPV का एक महत्वपूर्ण फायदा यह है कि इससे वैक्सीन-एसोसिएटेड पैरालिटिक पोलियो का जोखिम नहीं होता।

OPV और IPV में अंतर

इन दोनों वैक्सीन का उद्देश्य पोलियो से सुरक्षा देना है, लेकिन इनके काम करने का तरीका अलग है। OPV आंतों में प्रतिरक्षा विकसित करने और वायरस का प्रसार रोकने में विशेष भूमिका निभाती है, जबकि IPV मुख्य रूप से रक्त में मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पैदा करके लकवे से सुरक्षा देती है। इसलिए दोनों को एक-दूसरे का विकल्प मानना सही नहीं है। किस वैक्सीन की कितनी खुराक और कब दी जानी चाहिए, यह निर्धारित टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार तय होता है।

बच्चों को दोनों वैक्सीन क्यों देनी चाहिए?

पोलियो से बचाव के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा के साथ समुदाय में वायरस का प्रसार रोकना भी जरूरी है। OPV और IPV की अलग-अलग खूबियां इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद करती हैं। हालांकि, हर बच्चे को दोनों वैक्सीन किस क्रम और कितनी खुराक में दी जाएंगी, यह राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम और स्वास्थ्य संबंधी दिशानिर्देशों पर निर्भर करता है। भारत में पोलियो-मुक्त स्थिति हासिल होने के बावजूद नियमित टीकाकरण और निगरानी जरूरी है, क्योंकि दुनिया में पोलियो वायरस का प्रसार पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

डिस्क्लेमर - इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य जागरुकता के लिए है। इसका उद्देश्य किसी एक्सपर्ट की राय का विकल्प बनना नहीं है। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले एक्सपर्ट की राय जरूर लें।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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