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'पाकिस्तान कश्मीर का मुद्दा नहीं उठाता तो...', फारूक अब्दुल्ला के बयान पर विवाद, LG पर भी साधा निशाना

बारामूला में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारुख अब्दुल्ला ने अपने बयान से नई सियासी बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा किपाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीरियों का मुद्दा उठाता है, इसलिए वे बच रहे हैं। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर स्वास्थ्य क्षेत्र में फैसलों में देरी और मेडिकल संस्थानों की स्वायत्तता खत्म करने का भी आरोप लगाया

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कश्मीर मुद्दे को लेकर फारूक अब्दुल्ला का विवादित बयान।

जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान का नाम लेकर कुछ ऐसा कह दिया है, जिस पर केंद्र शासित प्रदेश में राजनीतिक विवाद खड़ा हो सकता है। बारामूला में पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीरियों का मुद्दा उठाता है, इसलिए जम्मू-कश्मीर के लोग सुरक्षित हैं। इस दौरान उन्होंने भारत की नीयत पर भी सवाल उठाए।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि पाकिस्तान कई जगहों पर जाकर कश्मीरियों की बात करता है। इसी वजह से जम्मू-कश्मीर के लोग बच रहे हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो कश्मीरियों के प्रति भारत की नीयत ठीक नहीं है। उनके इस बयान ने जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में देरी को लेकर प्रशासन पर हमला

नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष ने अपने संबोधन में जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य क्षेत्र की स्थिति और प्रशासनिक फैसलों में देरी को लेकर भी मौजूदा व्यवस्था पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पढ़ाई करने वाले मेडिकल छात्रों को अस्पतालों में दो साल तक सेवा देनी होती है। ऐसा नहीं करने पर उन्हें 40 लाख रुपये देने पड़ते हैं।

फारूक अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था से जुड़ी फाइल पिछले एक साल से उपराज्यपाल के पास लंबित है, लेकिन अब तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर निर्णय लेने में इतनी देरी क्यों हो रही है।

मेडिकल संस्थानों की स्वायत्तता खत्म करने का आरोप

फारूक अब्दुल्ला ने मेडिकल संस्थानों के कामकाज में बदलाव को लेकर भी प्रशासन पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पहले मेडिकल संस्थानों के निदेशक और उनकी समितियां यह तय करती थीं कि किन उपकरणों की जरूरत है और किन डॉक्टरों की नियुक्ति की जानी चाहिए।

उनके मुताबिक, मौजूदा प्रशासन ने इन संस्थानों के अधिकार कम कर दिए हैं। फारूक ने दावा किया कि जब उन्होंने इस मुद्दे पर संबंधित अधिकारी से सवाल किया, तो उन्होंने स्वीकार किया कि संस्थानों की स्वायत्तता खत्म कर दी गई है। उन्होंने कहा कि जब संस्थानों को अपने स्तर पर फैसले लेने का अधिकार ही नहीं रहेगा, तो उनके कामकाज पर इसका असर पड़ेगा। इसी संदर्भ में उन्होंने दिल्ली से न्याय मिलने की उम्मीद पर भी सवाल उठाया।

'अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं लोग'

नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष ने लोगों से अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोगों को मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने का साहस रखना चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर लोग अपने अधिकारों के लिए खड़े नहीं होंगे, तो उनका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग देश के दुश्मन नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हम देश के साथ आगे बढ़ेंगे और देश के लिए कुर्बानी भी देंगे। लेकिन आज सत्ता में बैठे लोगों से मैं कहता हूं कि वे खुद को सुधारें। फारूख ने कहा कि उन्हें केवल जनता को ही नहीं, बल्कि अल्लाह को भी जवाब देना है। इसी वजह से वह लोगों के सामने अपनी बात सच के साथ रखते हैं।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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