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कौन हैं LAC पर चीनी सेना से आंख से आंख मिलाने वाले शौर्य कमांडो, कैसे काम करती है ITBP की यह खास फोर्स

अरुणाचल प्रदेश में LAC पर भारत-चीन के बीच एक होने वाली तनातनी की खबरें एक बार फिर चर्चा में हैं और इसी बीच ITBP के 'शौर्य कमांडो' भी चर्चा में आ गए हैं। जानिए कैसे काम करती है ITBP की यह विशेष घातक यूनिट और कैसे यह सीमा सुरक्षा को मजबूत बना रही है।

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ITBP की इस घातक टुकड़ी
Authored by: निशांत तिवारी
Updated Oct 24, 2026, 15:48 IST
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समुद्र तल से 15 से 18 हजार फीट की ऊंचाई, हड्डियां जमा देने वाली कड़ाके की ठंड, ऑक्सीजन का गिरता स्तर और सामने चीनी सेना (PLA) की दुस्साहसिक पैंतरेबाजी, ऐसी परिस्थिति में जहां सामान्य इंसान का सांस लेना भी दूभर हो जाता है, वहां भारत माता के कुछ ऐसे जांबाज प्रहरी खड़े हैं जो चीनी सैनिकों की गलत हरकत को पलक नाकाम करते रहते हैं। इन शूरवीरों को नाम दिया गया है, 'शौर्य कमांडो'।

राजस्थान के अलवर में आयोजित आईटीबीपी के वार्षिक अभिनंदन समारोह में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक (DG) शत्रुजीत सिंह कपूर ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर कई स्थानों पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच आमना-सामना और तनातनी की स्थिति अब भी बनी हुई है। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने सीमा पर ड्रैगन की आक्रामकता को मुंहतोड़ जवाब देने वाले 'शौर्य कमांडो' की अदम्य वीरता और उनके शानदार प्रदर्शन की जमकर सराहना की। आइए समझते हैं कि आखिर कौन हैं ये 'शौर्य कमांडो', कैसे इनका गठन हुआ और यह दस्ता आधुनिक युद्ध तकनीक के साथ सीमा पर भारत का अभेद्य कवच कैसे बना हुआ है।

कौन हैं शौर्य कमांडो और कैसे हुआ इनका गठन?

साल 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में हुई खूनी झड़प के बाद LAC पर गश्त और सीमा सुरक्षा का पूरा ढांचा बदल गया। पारंपरिक लंबी दूरी की गश्त के बजाय अब बात-बात पर आमने-सामने आने और त्वरित सामरिक दांव-पेंच की जरूरत महसूस होने लगी। इसी रणनीति के तहत ITBP ने अपनी टुकड़ियों में से ही चुनकर सबसे चुस्त, शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत जवानों को विशेष प्रशिक्षण देकर 'शौर्य कमांडो' का दस्ता तैयार किया।

शौर्य कमांडो की एक खासियत यह भी है कि इनको भारतीय सेना की अग्रिम पंक्ति 'घातक' प्लैटून की तर्ज पर डिजाइन किया गया है। इन कमांडोज को माइनस डिग्री तापमान में बिना हथियार के हाथ से मुकाबला करने, पर्वतारोहण, घातक हथियार चलाने, तेजी से हमला करने और अत्यधिक तनाव की स्थिति में संयम बनाए रखने की कठोर ट्रेनिंग दी जाती है।

भारत-चीन सीमा पर ITBP के जवान

भारत-चीन सीमा पर ITBP के जवान

कैसे काम करती है शौर्य कमांडोज की यह खास फोर्स?

ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के अनुसार, शौर्य कमांडो की तैनाती की रणनीति बहुत ही व्यवस्थित और सूक्ष्म बनाई गई है। वर्तमान में चीन सीमा पर तैनात ITBP की प्रत्येक बटालियन के साथ कम से कम एक शौर्य कमांडो टीम को जोड़ा गया है। अरुणाचल प्रदेश जैसे संवेदनशील इलाकों में इनकी अभूतपूर्व सफलता को देखते हुए दो अतिरिक्त इकाइयां तैयार की गई हैं और भविष्य में हर बटालियन के विशेष दस्ते को पूरी 'कंपनी' के रूप में अपग्रेड करने की योजना है। ITBP का ऑपरेशन्स विंग आने वाले समय में शौर्य कमांडोज की एक अलग, समर्पित स्टैंडअलोन बटालियन बनाने पर काम कर रहा है। यह ऐसी स्ट्राइक फोर्स होगी जिसे आपात स्थिति में एयरलिफ्ट कर सीधे किसी भी फ्लैशपॉइंट यानी तनावग्रस्त सीमा क्षेत्र पर उतारा जा सकेगा।

अरुणाचल प्रदेश में वर्तमान स्थिति और शौर्य कमांडोज का रोल

अरुणाचल प्रदेश के एलएसी सेक्टर, जैसे बुमला, मेचूका और अन्य संवेदनशील इलाके में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) अक्सर भारतीय इलाकों में गश्त रोकने या यथास्थिति बदलने की नापाक कोशिशें करती रहती है। ऐसी परिस्थितियों में जब दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने होते हैं, तब शौर्य कमांडो 'फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस' के रूप में सामने आते हैं। वे बिना किसी बड़े सैन्य संघर्ष को न्योता दिए, चीनी सैनिकों को धक्का देकर या उनकी राह रोककर भारतीय क्षेत्र की अखंडता को बनाए रखते हैं। उनका मनोवैज्ञानिक दबाव और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता ही सीमा पर भारत का पलड़ा भारी रखती है।

सीमा पर मुस्तैद ITBP के जवान

सीमा पर मुस्तैद ITBP के जवान

आधुनिक टेक्नोलॉजी के साथ शौर्य कमांडोज की जुगलबंदी

ITBP प्रमुख ने रूस-यूक्रेन और मध्य पूर्व के युद्धों से सीख लेते हुए स्पष्ट किया कि केवल पारंपरिक तरीकों से आधुनिक होती चीनी सेना का मुकाबला करना कठिन है। इसलिए ITBP तकनीक-संचालित मॉडल अपना रही है:

ड्रोन क्रांति (Drone Revolution): ITBP ने अपने आधुनिकीकरण बजट का 70 प्रतिशत हिस्सा (लगभग 400 करोड़ रुपये के आधुनिकीकरण और 1000 करोड़ की विशेष योजनाओं से) ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम और तकनीक पर खर्च किया है।

इन-हाउस ड्रोन प्लैटून: सीमा पर तैनात प्रत्येक आईटीबीपी बटालियन में एक 'ड्रोन प्लैटून' शामिल की गई है, जिनके पायलट खुद सैनिक ही हैं।

जमीन और आसमान का सही तालमेल: जहां एक तरफ आसमान से ड्रोन गहरी घाटियों और चोटियों पर चीनी सेना की हलचल पर नजर (ISR) रखते हैं, वहीं जमीन पर शौर्य कमांडो पलक झपकते मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करते हैं।

LAC की पकड़ को मजबूत करते हैं शौर्य कमांडो

ITBP का मूल ध्येय वाक्य है "शौर्य, दृढ़ता, कर्म निष्ठा"। अरुणाचल प्रदेश की कठिन और बर्फीली चोटियों पर तैनात शौर्य कमांडो केवल एक सैन्य टुकड़ी नहीं हैं, बल्कि वे भारत के उस अडिग संकल्प का प्रतीक हैं जो यह संदेश देता है कि भारतीय सीमाओं की ओर उठने वाली हर गलत निगाह को सीमा पर ही रोक दिया जाएगा। तकनीक और अदम्य इंसानी साहस के इस मेल ने पर LAC भारत की पकड़ को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और अचूक बना दिया है।

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