Diwali 2023: आने वाला रोशनी का त्योहार, पिछले वर्षों की तरह, बड़े उत्साह और भव्यता के साथ मनाया जाएगा। जबकि दिवाली पर एक भव्य उत्सव मनाना बनता है, इसे अत्यधिक सावधानी और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण बन जाता है। आतिशबाजी दिवाली उत्सव का एक अभिन्न अंग है, लेकिन दुर्भाग्य से, इससे आंखों में चोट आने के मामले भी बढ़ते हैं। इसलिए, परिवार के बड़े-बुज़ुर्गों को दिवाली उत्सव में बच्चों पर नज़र रखने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
आतिशबाजी के कारण होने वाली कई आंखों की चोटों के परिणामस्वरूप स्थायी दृष्टि हानि हो सकती है, जिससे व्यक्ति अँधा हो सकता है। आतिशबाजी से लगातार निकलने वाला धुंआ आंखों में जलन पैदा कर सकता है और इसकी वजह से आंखों में पानी आ सकता है। इन जोखिमों को कम करने के लिए, विशेष रूप से खतरनाक आतिशबाजी जैसे बोतल रॉकेट से बचना, जलती हुई आतिशबाजी से सुरक्षित दूरी बनाए रखना, सुरक्षात्मक चश्मे पहनना और आतिशबाजी करते समय कॉन्टैक्ट लेंस पहनने से बचना महत्वपूर्ण है। यदि आंख में चोट लग जाए, तो यह महत्वपूर्ण है कि आंखों को मले नहीं, किसी भी बाहरी कण को हटाने से बचें, आंखें बंद रखें और अगर आँखों में कोई रसायन गिर जाए तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
आपकी आंखों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए सहित कुछ आवश्यक सुरक्षा सलाह यहां दी गई हैं:
क्या करना चाहिए -
- चिंगारी और छोटे कणों से बचाने के लिए डिज़ाइन किए गए सुरक्षा चश्मे पहनकर अपनी आंखों को सुरक्षित रखें।
- जलाए जा रहे पटाखों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें ताकि आप चिंगारी के घेरे में आने से बच सकें।
- किसी भी खराब आतिशबाजी या आग को बुझाने के लिए हमेशा पानी की एक बाल्टी पास में रखें।
- आतिशबाजी को संभालने और जलाने के लिए एक जिम्मेदार व्यक्ति को रखें जबकि अन्य लोग सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
- खुले मैदानों में पटाखे फोड़ें, बंद जगहों, पार्किंग स्थलों पर पटाखे न जलाएं।
- आंखों या अपने शरीर के किसी भी हिस्से को छूने से पहले सुनिश्चित करें कि हाथ धुले हुए और साफ हों।
- क्या नहीं करना चाहिए:
- बच्चों को बिना गाइडेंस के पटाखे जलाने की अनुमति न दें।
- तेज हवा चलने पर कभी भी आतिशबाजी का उपयोग न करें, क्योंकि हवा चिंगारी को किसी भी दिशा में उड़ा ले जा सकती है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
- अगर आंख में चोट लग जाए तो क्रीम या तेल लगाने से बचें और तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।
आतिशबाजी गतिविधियों के दौरान आंखों से जुड़ी किसी दुर्घटना या चोट आने की स्थिति में, संभावित क्षति को कम करने के लिए तत्काल कार्रवाई करना महत्वपूर्ण है। निम्नानुसार कार्रवाई करनी चाहिए:
- प्रभावित आंख को छूने या मलने से बचें, क्योंकि इससे चोट और बिगड़ सकती है या संक्रमण फैल सकता है।
- सुनिश्चित करें कि आपके हाथ साफ हों, और तभी प्रभावित आंख को आराम से धोने के लिए साफ, ठंडे पानी का उपयोग करें। लगभग 15 मिनट तक आंख को धोएं। यदि उपलब्ध हो, तो आप इस प्रयोजन के लिए एक रोगाणुहीन सेलाइन सॉल्युशन का उपयोग कर सकते हैं।
- आंखों खों को धोने के बाद, चोट वाली आंख को एक साफ, रोगाणुहीन कपड़े या गौज बैंडेज से ढक दें ताकि आंख को आगे कोई क्षति न हो।
- नजदीकी अस्पताल या आई क्लिनिक में जाकर तुरंत चिकित्सा सहायता लें। भले ही आँख धोने के बाद ठीक लग रहा हो, लेकिन किसी गुप्त क्षति का पता लगाने के लिए किसी चिकित्सकीय पेशेवर से इसकी जांच कराना जरूरी है।
- पेशेवर मार्गदर्शन के बिना आंखों पर मलहम, क्रीम या दवाएं न लगाएं।
- यदि आंख में कोई बाहरी कण चला जाए, तो उसे स्वयं निकालने का प्रयास न करें। चिकित्सा सहायता प्राप्त करने की प्रतीक्षा करें।
- इसमें कोई संदेह नहीं है कि पटाखे फोड़ते समय हवा अत्यधिक प्रदूषित हो जाती है और इसकी वजह से पहले से मौजूद स्मॉग की परेशानी और बढ़ जाती हैं, जो उत्तर भारत के कई हिस्सों में देखा जाता है। स्मॉग के कारण विशेषकर बच्चों की आंखें शुष्क हो जाती हैं। इसलिए आंखों की देखभाल केवल उत्सवों के दौरान ही सीमित नहीं होनी चाहिए, यहां तक कि दिवाली के बाद भी, अपने संपूर्ण स्वास्थ्य पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।
आतिशबाजी से अगल-बगल खड़े लोगों को भी नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए यह प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि हम ध्यान से और सावधानी के साथ त्योहार मनाए। इस दिवाली, आइए हम अपने प्रियजनों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए खुशियों की रोशनी बांटे।
Disclaimer: ये लेख बाल नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मधुलिका लाढ़ा द्वारा लिखित है जो संकरा आई हॉस्पिटल, आनंद से जुड़ी हैं। यहां प्रस्तुत जानकारी डॉक्टर की ओर से दी गई है। इसकी पुष्टि टाइम्स नाउ डिजिटल नहीं करता है।
