Caterpillar Fungus: अकसर हम फंगस को बीमारी के रूप में देखते और सुनते हैं, लेकिन क्या कोई फंगस दवा भी हो सकती है। दवा भी ऐसी अचूक कि जिसकी कीमत कई लाखों में हो। जवाब है हां। ऐसी ही एक फंगस है कैटरपिलर फंगस। कोरोना महामारी के बाद ब्लैक फंगस और व्हाइट फंगस ने सभी को डराया। मगर इन सबके बीच अच्छी बात ये भी है कि कुछ फंगस ऐसे भी हैं जो मानव जीवन की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हैं।
आमतौर पर इसका प्रयोग वनौषधियों के तौर पर इंसानी जीवन को सेहतमंद रखने के लिए किया जाता है। इसी कड़ी में आपको एक ऐसे फंगस के बारे में बताने जा रहे हैं। जिसकी कीमत सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे। यहीं नहीं इस फंगस की कीमत दुनिया में सबसे अधिक है। इस फंगस का नाम कैटरपिलर फंगस है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस फंगस की एक किलो की कीमत करीब 10 से 20 लाख रुपए है। हमारे देश में इसकी हिमालयन वियाग्रा, कीड़ा जड़ी व यारशागुंबा के नाम से पहचान है। इस फंगस का जन्म एक खास तरह के कीड़े की इल्लियों ( caterpillars ) से होता है। इस वनौषधि का साइंटिफिक नाम कॉर्डिसेप्स साइनेसिस ( cordyceps sinensis ) है। इस फंगस की कई देशों में भारी मांग है।
ऐसे बनती है कैटरपिलर फंगस
अब सवाल ये कि आखिर सोने से भी महंगी से कैटरपिलर फंगस बनती कैसे है। दरअसल, यह प्रकृति की देन है। पहाड़ी क्षेत्रों में कैटरपिलर एक खास प्रकार की घास खाते हैं। लेकिन कई बार वे जमीन से बाहर नहीं आ पाते और वहीं मर जाते हैं। उनके अंदर यह जड़ी बूटी उगती है। यही कारण है कि इसे कीड़ा जड़ी भी कहा जाता है। यह फंगस हाइपरसेक्सुअलिटी के साथ ही कई रोगों में असरदार है। यह हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है। साथ ही किडनी, लीवर से जुड़ी समस्याओं में भी आराम देती है। यह कार्डियक वैस्कुलर हेल्थ के लिए भी अच्छी है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण भी पाए जाते हैं।
इससे चलती है लोगों की रोजी - रोटी
ये फंगस हमारे देश के अलावा नेपाल,भूटान और चाइना में मिलती है। गौरतलब है कि यह फंगस नेपाल,भूटान और चाइना के पहाड़ी इलाकों समेत अन्य स्थानों पर लोगों की रोजी-रोटी का मेन सोर्स है। सूत्रों के मुताबिक भारत में ये वनौषधि प्रतिबंधित है, यही वजह है किलोग इसे तस्करी के जरिए गुपचुप बेचते हैं। बता दें कि चाइना में इस फंगस का इस्तेमाल यौन संबंधी मामलों में किया जाता है। वहीं खेलों की अगर बात करें तो कई धावक इसे स्टेरॉयड के तौर पर भी उपयोग करते हैं। हालांकि कई घरों में लोग इसका इस्तेमाल चाय व सूप में डालकर भी करते हैं। अंधाधुंध दोहन होने के चलते चिंता की बात ये है कि कैटरपिलर फंगस अब तेजी से घट रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसके घनत्व में 30 प्रतिशत तक की कमी आई है। जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) ने इसे लाल सूची में दर्ज कर दिया है।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
