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रोज पान का एक पत्ता खाने से शरीर में क्या होता है, कब और कैसे खाना चाहिए इसे - डॉ. हंसा ने बताया सही तरीका

डॉ. हंसा योगेंद्र के अनुसार रोज एक सादा पान का पत्ता खाने से पाचन, गैस, पेट के भारीपन और मुंह की दुर्गंध में क्या फायदा मिल सकता है। जानें सही तरीका और सावधानियां।

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पान एक पत्ता रोजाना खाने से क्या होगा, डॉ. हंसा ने बताया कौन खाए और कैसे

Betel Leaf Benefits: पान का नाम सुनते ही अक्सर मीठे पान, सुपारी, चूने या तंबाकू का ख्याल आता है। यही कारण है कि बहुत से लोग पान के पत्ते को भी सेहत के लिए नुकसानदायक मान लेते हैं। जबकि पान का सादा और साफ पत्ता इन सभी चीजों से अलग है। भारत में लंबे समय से इसका इस्तेमाल पूजा-पाठ के साथ ही भोजन के बाद भी किया जाता रहा है।

द योगा इंस्टीट्यूट के एक वीडियो में डॉ. हंसा योगेंद्र ने बताया है कि सही तरीके और सीमित मात्रा में लिया गया ताजा पान का पत्ता पाचन को सहारा दे सकता है। खासतौर पर जिन लोगों को खाना खाने के बाद पेट भारी लगने, गैस या मुंह की दुर्गंध जैसी परेशानी होती है, उनके लिए यह उपयोगी हो सकता है। हालांकि इसे किसी बीमारी की दवा या इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

क्या रोज पान का पत्ता खाना फायदेमंद है

डॉ. हंसा के अनुसार पान का पत्ता शरीर की पाचन प्रक्रिया को सक्रिय करने में मदद कर सकता है। इसे चबाने से मुंह में लार अधिक बनती है। लार भोजन को तोड़ने और पाचन की शुरुआती प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

पान के पत्ते का स्वाद हल्का तीखा और खुशबू तेज होती है। यही वजह है कि इसे खाने के बाद मुंह में ताजगी महसूस हो सकती है। इसमें पाए जाने वाले कुछ प्राकृतिक यौगिकों पर हुए प्रयोगशाला अध्ययनों में एंटीऑक्सीडेंट और रोगाणुरोधी गुण भी देखे गए हैं। हालांकि इसके ज्यादातर चिकित्सकीय फायदों को साबित करने के लिए अभी बड़े स्तर पर अध्ययन किए जाने जरूरी हैं।

पान का पत्ता पाचन में कैसे मदद कर सकता है

वीडियो में पान के पत्ते को पाचन अग्नि से जोड़कर समझाया गया है। आसान भाषा में कहें तो भोजन को ठीक से पचाने की शरीर की क्षमता को आयुर्वेद में अग्नि कहा जाता है। एक साफ और ताजा पत्ता धीरे-धीरे चबाने पर लार और पाचक रसों का स्राव बढ़ सकता है। इससे कुछ लोगों को भोजन के बाद होने वाली इन परेशानियों में राहत महसूस हो सकती है:

  • पेट में भारीपन
  • हल्की गैस या ब्लोटिंग
  • भोजन पचने में समय लगना
  • मुंह का स्वाद खराब रहना
  • सांस से दुर्गंध आना

इसका असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होगा। यदि गैस, एसिडिटी या पेट दर्द लगातार बना रहता है तो केवल घरेलू उपाय पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

सादा पान और बाजार का पान एक नहीं

यहां सबसे जरूरी बात समझना है कि वीडियो में बात सादे पान के पत्ते की हो रही है। सुपारी, तंबाकू, जर्दा, गुटखा या अधिक चूने वाला पान इसका हिस्सा नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की कैंसर अनुसंधान एजेंसी के अनुसार सुपारी यानी अरेका नट कैंसरकारी है। तंबाकू मिलाने पर खतरा और बढ़ जाता है। इसलिए पान के पत्ते के संभावित फायदे को सुपारी या तंबाकू वाले पान से जोड़ना गलत होगा।

सादा पान का पत्तासामान्य बाजार वाला पान
केवल धुला हुआ ताजा पत्तासुपारी, चूना, कत्था या तंबाकू हो सकता है
सीमित मात्रा में लिया जाता हैमीठी सामग्री और फ्लेवर्ड मिक्स अधिक हो सकते हैं
पाचन या मुख की ताजगी के लिए इस्तेमालनियमित सेवन से स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकता है
नशे की सामग्री नहींकुछ प्रकारों में नशे और कैंसर का खतरा

पान का पत्ता खाने का सही तरीका

अगर कोई स्वस्थ व्यक्ति इसे आजमाना चाहता है तो अच्छी गुणवत्ता वाला एक छोटा और ताजा पत्ता लिया जा सकता है। पत्ते को बहते पानी में अच्छी तरह धो लें और उसका डंठल हटा दें। इसे भोजन के बाद धीरे-धीरे चबाया जा सकता है।

इसमें तंबाकू, सुपारी और चूना बिल्कुल न मिलाएं। शुरुआत में आधा पत्ता लेकर यह देखना बेहतर होगा कि शरीर इसे किस तरह स्वीकार करता है। मुंह में जलन, पेट खराब होने या एलर्जी जैसा अनुभव होने पर इसका सेवन रोक देना चाहिए।

किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए

प्राकृतिक चीज होने का अर्थ यह नहीं है कि पान का पत्ता हर व्यक्ति के लिए पूरी तरह सुरक्षित होगा। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं, छोटे बच्चे, बुजुर्ग तथा नियमित दवा लेने वाले लोग इसे रोज की आदत बनाने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

मुंह में छाले, मसूड़ों की बीमारी, पेट में अल्सर या किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को भी सावधानी रखनी चाहिए। डायबिटीज या ब्लड प्रेशर की दवा लेने वाले व्यक्ति इसे बीमारी नियंत्रित करने का घरेलू इलाज न समझें।

आखिर क्या रोज एक पत्ता खाना चाहिए

ताजा और साफ पान का पत्ता सीमित मात्रा में लिया जाए तो यह कुछ लोगों में पाचन और मुंह की ताजगी को सहारा दे सकता है। लेकिन इसे चमत्कारी औषधि कहना सही नहीं होगा। सबसे अहम नियम यही है—पत्ता सादा हो और उसके साथ सुपारी, तंबाकू या जर्दा बिल्कुल न लिया जाए।

पान का पत्ता आपकी दिनचर्या में एक छोटा पारंपरिक विकल्प हो सकता है, मगर पुरानी गैस, कब्ज, एसिडिटी या किसी दूसरी स्वास्थ्य समस्या का पूरा इलाज नहीं। शरीर की प्रतिक्रिया को समझें और कोई असुविधा होने पर इसका सेवन बंद कर दें।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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