Aphasia In Hindi: मान लीजिए आपके घर का कोई सदस्य अचानक लोगों को पहचानना बंद नहीं करता, उसे सब कुछ याद भी रहता है, सामने वाला क्या कह रहा है वह समझ भी जाता है, लेकिन अपनी बात ठीक से बोल नहीं पाता। कई बार शब्द मुंह तक आते हैं, लेकिन बाहर नहीं निकलते। ऐसे में परिवार वाले सोचते हैं कि शायद उसकी याददाश्त कमजोर हो गई है या दिमाग पर असर पड़ गया है। लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता।
कुछ लोगों में यह समस्या अफेसिया नाम की बीमारी की वजह से होती है। यह अक्सर ब्रेन स्ट्रोक के बाद देखने को मिलती है। मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, गुरुग्राम के डॉ. शिवम सिंह (प्रमुख, स्पीच और ऑडियोलॉजी विभाग, मेन्स) के अनुसार, अफेसिया में इंसान की सोचने-समझने की क्षमता नहीं जाती, बल्कि अपनी बात दूसरों तक पहुंचाने में दिक्कत होने लगती है। यही वजह है कि इस बीमारी को समझना और समय रहते पहचानना बहुत जरूरी है।
क्या है अफेसिया
अफेसिया एक ऐसी समस्या है जो भाषा और बातचीत करने की क्षमता को प्रभावित करती है। इसमें व्यक्ति के दिमाग में सब कुछ साफ रहता है, लेकिन वह अपनी बात ठीक तरह से बोल या लिख नहीं पाता। कई बार उसे सही शब्द याद नहीं आते, जबकि वह मन ही मन जानता है कि उसे क्या कहना है।
डॉ. शिवम सिंह बताते हैं कि यह कोई मानसिक बीमारी नहीं है और न ही इसका मतलब यह है कि व्यक्ति की याददाश्त खत्म हो गई है। समस्या सिर्फ भाषा के जरिए अपनी बात कहने में होती है।
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ब्रेन स्ट्रोक के बाद क्यों बढ़ जाता है खतरा
अफेसिया का सबसे बड़ा कारण ब्रेन स्ट्रोक माना जाता है। जब स्ट्रोक की वजह से दिमाग के उस हिस्से को नुकसान पहुंचता है जो बोलने और समझने का काम करता है, तब यह परेशानी शुरू हो सकती है। इसके अलावा सिर पर गंभीर चोट लगना, दिमाग में संक्रमण होना, ब्रेन ट्यूमर या कुछ दूसरी तंत्रिका संबंधी बीमारियां भी इसकी वजह बन सकती हैं।
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हर मरीज में अलग दिख सकते हैं लक्षण (aphasia symptoms)
अफेसिया से जूझ रहे सभी लोगों की परेशानी एक जैसी नहीं होती। कुछ लोग दूसरों की बात आसानी से समझ लेते हैं, लेकिन जवाब नहीं दे पाते। कुछ लोग बोलते तो हैं, लेकिन उनकी बात सामने वाले को समझ नहीं आती। वहीं कुछ लोगों को पढ़ने या लिखने में परेशानी होने लगती है। यही कारण है कि कई बार परिवार के लोग शुरुआत में इस समस्या को समझ ही नहीं पाते।
क्या सोचने-समझने की ताकत खत्म हो जाती है
इस बीमारी को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी यही है। बहुत से लोग मान लेते हैं कि मरीज अब कुछ समझ नहीं पा रहा होगा। जबकि सच्चाई यह है कि अफेसिया से पीड़ित व्यक्ति अक्सर सब कुछ समझ रहा होता है।
वह लोगों की बातें सुन सकता है, भावनाएं महसूस कर सकता है और अपने आसपास क्या हो रहा है, यह भी जानता है। परेशानी सिर्फ इतनी होती है कि वह अपने विचारों को शब्दों में ढाल नहीं पाता।
इलाज और सुधार की उम्मीद
अच्छी बात यह है कि सही इलाज और नियमित अभ्यास से कई मरीजों में सुधार देखा जाता है। डॉ. शिवम सिंह के अनुसार, स्पीच और लैंग्वेज थेरेपी इस बीमारी के इलाज का सबसे अहम हिस्सा है।
जितनी जल्दी इलाज शुरू किया जाए, उतना बेहतर परिणाम मिलने की संभावना रहती है। परिवार का सहयोग और धैर्य भी मरीज की रिकवरी में बड़ी भूमिका निभाता है।
इन संकेतों को हल्के में न लें
अगर किसी व्यक्ति को हाल ही में ब्रेन स्ट्रोक हुआ है और वह बोलने, लिखने या अपनी बात समझाने में परेशानी महसूस कर रहा है, तो इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज न करें।
समय पर डॉक्टर से सलाह लेने और सही थेरेपी शुरू करने से मरीज की जिंदगी काफी आसान बन सकती है। याद रखिए, कई बार दिमाग पूरी तरह साथ दे रहा होता है, लेकिन जुबान उसका साथ नहीं दे पाती। यही स्थिति अफेसिया कहलाती है।
