सिर और गर्दन के कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एक नई उम्मीद लेकर आया है। हाल ही में विकसित एआई आधारित टूल ‘ईएनई प्रेडिक्टर’ डॉक्टरों को यह समझने में मदद करता है कि इलाज कितना असरदार रहेगा और आगे बीमारी का खतरा कितना है। इस तकनीक से मरीजों को न केवल बेहतर प्रोग्नोसिस मिलता है, बल्कि अनावश्यक दर्दनाक इलाज से भी राहत मिल सकती है।
एआई कैसे देता है बेहतर प्रोग्नोसिस
ईएनई प्रेडिक्टर खास तौर पर ऑरोफैरिंजियल कैंसर के लिए तैयार किया गया है। यह अनुमान लगाता है कि लिम्फ नोड्स के बाहर कैंसर फैलने की कितनी संभावना है। पहले यह जानकारी सर्जरी के बाद ही मिलती थी, लेकिन अब सीटी स्कैन इमेज से ही अंदाजा लगाया जा सकता है, जिससे इलाज शुरू करने से पहले सही दिशा मिलती है।
इलाज की सही दिशा चुनने में मदद
डॉक्टरों के अनुसार यह टूल बताता है कि किसे सिर्फ सर्जरी से फायदा होगा और किसे इम्यूनोथेरेपी या कीमोथेरेपी जैसे आक्रामक इलाज की जरूरत पड़ सकती है। इससे मरीजों पर बिना वजह भारी इलाज का बोझ नहीं पड़ता और परेशानियां कम होती हैं।
साइड इफेक्ट्स का खतरा कम
आक्रामक इलाज कई बार निगलने में दिक्कत, आवाज में बदलाव और थकान जैसी समस्याएं पैदा करता है। एआई टूल यह तय करने में मदद करता है कि कहां कम और कहां ज्यादा उपचार देना बेहतर रहेगा, ताकि उपचार असरदार भी रहे और दर्द भी कम हो।
नॉन-इन्वेसिव तकनीक का बड़ा फायदा
यह टूल नॉन-इन्वेसिव है यानी शरीर में किसी तरह की चीर-फाड़ की जरूरत नहीं होती। सीटी स्कैन और उम्र, ट्यूमर साइज जैसे क्लिनिकल फैक्टर्स के आधार पर जोखिम का अनुमान लगाया जाता है।
1,700 से अधिक मरीजों पर सफल परीक्षण
1,733 मरीजों पर किए गए परीक्षणों में यह पारंपरिक तरीकों से ज्यादा सटीक साबित हुआ। सर्वाइवल रेट, बीमारी दोबारा लौटने का खतरा और फैलाव की संभावना इन सभी पहलुओं की भविष्यवाणी में इसने बेहतर परिणाम दिए।
Inputs: IANS
