Adult Onset Asthma क्या बच्चों के अस्थमा से ज्यादा खतरनाक है? जानिए फेफड़ों को कैसे करता है डैमेज
- Authored by: Vineet
- Updated Jan 25, 2026, 07:01 AM IST
Adult Onset Vs Childhood Asthma: आमतौर पर यह माना जाता है कि बच्चों में होने वाला अस्थमा स्वास्थ्य के लिहाज से ज्यादा गंभीर और खतरनाक होता है। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। बता दें कि एडल्ट ऑनसेट अस्थमा यानी बड़ों में होने वाला अस्थमा ज्यादा गंभीर माना जाता है। चलिए इस पर विस्तार से चर्चा करते हैं...
एडल्ट ऑनसेट अस्थमा क्यों ज्यादा खतरनाक
Adult Onset Vs Childhood Asthma: अक्सर जब अस्थमा की बात होती है तो दिमाग में बच्चों की तस्वीर आ जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई लोगों को पहली बार अस्थमा अडल्ट एज में भी हो सकता है? इसे ही एडल्ट ऑनसेट अस्थमा (Adult Onset Asthma) कहा जाता है। यह समस्या अचानक शुरू होती है और कई बार बच्चों के अस्थमा से ज्यादा गंभीर रूप ले सकती है। दिक्कत ये है कि बड़े लोग इसके शुरुआती लक्षणों को उम्र, थकान या एलर्जी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इसी वजह से फेफड़ों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचता रहता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि एडल्ट ऑनसेट अस्थमा क्या है और ये कितना खतरनाक हो सकता है।
एडल्ट ऑनसेट अस्थमा क्या होता है (Adult Onset Asthma Kya Hota Hai)
एडल्ट ऑनसेट अस्थमा वो स्थिति है जब किसी व्यक्ति को 20 या 30 की उम्र के बाद अस्थमा की समस्या शुरू होती है। इसमें सांस की नलियों में सूजन आ जाती है और सांस लेना मुश्किल होने लगता है। कई बार यह एलर्जी, प्रदूषण, स्मोकिंग या बार-बार होने वाले इंफेक्शन की वजह से ट्रिगर होता है।
बच्चों के अस्थमा से क्यों माना जाता है ज्यादा गंभीर
बच्चों में अस्थमा अक्सर एलर्जी से जुड़ा होता है और समय के साथ कंट्रोल में आ सकता है। वहीं एडल्ट ऑनसेट अस्थमा ज्यादा स्टेबल नहीं होता। इसमें दवाओं का असर देर से होता है और लक्षण ज्यादा तेज हो सकते हैं। यही वजह है कि इसे ज्यादा गंभीर माना जाता है।
फेफड़ों को कैसे करता है नुकसान
जब लंबे समय तक अस्थमा कंट्रोल में नहीं रहता, तो फेफड़ों की एयरवे स्थायी रूप से सिकुड़ सकती है। इससे ऑक्सीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। धीरे-धीरे सांस फूलना रोजमर्रा की समस्या बन जाती है, जिससे जीवन की क्वालिटी पर असर पड़ता है।
इसके आम लक्षण क्या हैं
एडल्ट ऑनसेट अस्थमा में लगातार खांसी, सीने में जकड़न, सांस लेते वक्त सीटी जैसी आवाज और हल्की मेहनत में भी थकान महसूस होना आम लक्षण हैं। रात के समय ये लक्षण ज्यादा परेशान कर सकते हैं।
इसे मैनेज कैसे किया जा सकता है
अच्छी बात ये है कि सही समय पर पहचान और इलाज से इसे कंट्रोल किया जा सकता है। डॉक्टर की सलाह से इनहेलर का नियमित इस्तेमाल, ट्रिगर्स से दूरी और लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव काफी मदद करते हैं। स्मोकिंग से बचना और प्रदूषण में सावधानी रखना बेहद जरूरी है।
कब डॉक्टर से मिलना जरूरी है
अगर सांस फूलने की समस्या बार-बार हो रही है या खांसी लंबे समय से ठीक नहीं हो रही, तो इसे नजरअंदाज न करें। समय पर जांच से फेफड़ों को होने वाले गंभीर नुकसान से बचा जा सकता है।