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Phir Hera Pheri एक्टर ने पिया था अपना ही यूरिन, गिनाए अनगिनत फायदे, चलिए जानते हैं क्या है Urine Therapy

Does Drinking Urine Have Any Real Benefits Explained: हाल ही में परेश रावल और अनु अग्रवाल जैसे सेलिब्रिटी के दावों के बाद मूत्र चिकित्सा फिर चर्चा में है। सेलिब्रिटीज ने बताया है कि उन्होंने अपना खुद का यूरिन पिया और इससे उन्हें फायदा मिला। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या वाकई अपना पेशाब पीना सेहत के लिए फायदेमंद है या नुकसानदायक? इस लेख में डॉक्टर्स से जानिए इसका असली सच, इसके प्रति वैज्ञानिक नजरिया, फायदे-नुकसान..

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एक्टर परेश रावल और अनु अग्रवाल ने पिया अपना यूरिन

Does Drinking Urine Have Any Real Benefits Explained: सोचिए अगर कोई कहे कि वो अपना ही पेशाब (मूत्र) पीता है, तो आपको अजीब नहीं लगेगा? पर आजकल कुछ मशहूर लोग खुद यह बात कह रहे हैं। हाल ही में अभिनेता परेश रावल ने बताया कि उन्होंने अपने घुटने की चोट जल्दी ठीक करने के लिए अपनी पेशाब पी थी। इसके बाद 'आशिकी' फेम अनु अग्रवाल ने भी कहा कि उन्होंने भी ऐसा किया और उन्हें इससे फायदा हुआ।

अब जाहिर है, जब मशहूर लोग इस तरह की बातें करते हैं, तो आम लोग भी सोच में पड़ जाते हैं- क्या वाकई पेशाब पीना सेहत के लिए अच्छा होता है? या यह सिर्फ एक अंधविश्वास है? कुछ लोग इसे “मूत्र चिकित्सा” या “योग की मुद्रा” भी कहते हैं, लेकिन मेडिकल एक्सपर्ट्स इसके खिलाफ चेतावनी देते हैं। उनका कहना है कि पेशाब हमारे शरीर का फालतू और गंदा हिस्सा है, जिसे बाहर निकालना ही बेहतर होता है।

तो आज के इस लेख में हम इसी सवाल का जवाब ढूंढेंगे कि क्या अपना पेशाब पीना फायदेमंद है या नुकसानदायक? और हम यह भी समझेंगे कि लोगों को इस पर विश्वास क्यों होता है और डॉक्टर क्या सलाह देते हैं।

क्या है मूत्र पीने की परंपरा?

मूत्र चिकित्सा (Urine Therapy) या पेशाब पीना कोई नया ट्रेंड नहीं है। यह हजारों साल पुरानी प्रथा है, जिसे कुछ लोग “शिवांबु चिकित्सा” कहते हैं। पुराने समय में योगियों और साधुओं ने इसे अपनाया था और कहा कि इससे शरीर शुद्ध होता है। कुछ लोग मानते हैं कि सुबह की पहली पेशाब का एक हिस्सा पीना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। इसे “अमृत” कहा गया है।

अब सवाल यह है क्या यह सच में फायदेमंद है? क्या आज के जमाने में भी यह तरीका सही है? और अगर मशहूर लोग इसे कर रहे हैं, तो क्या हमें भी करना चाहिए?

क्या होती है यूरिन थैरेपी

क्या होती है यूरिन थैरेपी

हाल ही में क्यों ये मुद्दा चर्चा में है?

परेश रावल का बयान

परेश रावल ने अपने एक इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने अपने घुटने की चोट से जल्दी ठीक होने के लिए अपनी पेशाब पी थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने ये प्रयोग किया और उन्हें फायदा भी हुआ।

अनु अग्रवाल का दावा

परेश रावल के बाद आशिकी फिल्म की मशहूर एक्ट्रेस अनु अग्रवाल ने एक इंटरव्यू में कहा कि “यह योग का एक हिस्सा है जिसे बहुत लोग नहीं जानते। मैंने खुद इसे अपनाया है। पेशाब का पूरा नहीं, एक खास हिस्सा पिया जाता है। इससे स्किन जवान रहती है, झुर्रियां नहीं आतीं, और शरीर अच्छा महसूस करता है।”

इन दोनों बयानों ने सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोरी। लोगों में उत्सुकता तो बढ़ी ही, पर साथ ही कई सवाल भी उठे।

पेशाब में होता क्या है?

अब जरा यह समझते हैं कि पेशाब यानी मूत्र आखिर होता क्या है। अमृता अस्पतला, फरीदाबाद में यूरोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर अनिल शर्मा बताते हैं - हमारा शरीर जब खाना पचाता है, तो कई चीजें बच जाती हैं जो शरीर को नहीं चाहिए होतीं जैसे,

  • यूरिया (प्रोटीन के टूटने से बनता है)
  • नमक, पोटैशियम और दूसरे मिनरल्स
  • दवाइयों के बचे हुए हिस्से
  • पानी
  • और कई बार बैक्टीरिया

ये सब मिलकर मूत्र बनता है, जिसे शरीर बाहर निकालता है। मतलब साफ है कि मूत्र शरीर की गंदगी है, दवा नहीं।

क्या यूरिन पीने से वाकई कोई फायदा मिलता है

क्या यूरिन पीने से वाकई कोई फायदा मिलता है

लोग क्यों पीते हैं अपनी पेशाब?

अब सवाल आता है कि अगर यह गंदगी है, तो लोग इसे पीते क्यों हैं? तो आपको बता दें कि इसके पीछे कुछ मान्यताएं हैं, जिनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जैसे,

  • यह शरीर को डिटॉक्स करता है
  • इम्युनिटी बढ़ाता है
  • स्किन को क्लीन और जवान बनाता है
  • पेट की बीमारियां ठीक करता है
  • कैंसर या गठिया जैसे रोगों में राहत देता है

कुछ लोग इसे योग का हिस्सा मानते हैं, तो कुछ इसे “प्राकृतिक इलाज” कहते हैं। लेकिन असली सवाल ये है कि क्या ये दावे सही हैं?

डॉक्टर क्या कहते हैं?

अब बात करते हैं मेडिकल एक्सपर्ट्स की। इस पर बेहतर जानकारी के लिए हमने अमृता हॉस्पिटल फरीदाबाद के दो सीनियर डॉक्टर्स से बात की - डॉ. अहमद कमाल और डॉ. अनिल शर्मा, दोनों ही यूरोलॉजी विभाग में सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर हैं। डॉक्टर्स की राय बिलकुल साफ है - “यूरिन पीने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। इससे शरीर को कोई फायदा नहीं होता, उल्टा नुकसान हो सकता है।”

  • पेशाब में बैक्टीरिया हो सकते हैं, जिससे संक्रमण हो सकता है
  • पेशाब में मौजूद नमक और केमिकल्स से डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) हो सकती है
  • किडनी पर ज्यादा दबाव पड़ता है
  • इलाज में देरी हो सकती है, क्योंकि लोग मेडिकल इलाज की जगह मूत्र चिकित्सा पर भरोसा करते हैं

क्या सेलिब्रिटी की बात माननी चाहिए?

डॉक्टर्स का कहना है कि जब कोई फेमस इंसान कोई बात करता है, तो लोग जल्दी मान लेते हैं। परेश रावल और अनु अग्रवाल जैसे लोगों की बातें बहुत लोग सुनते हैं और भरोसा भी करते हैं। लेकिन याद रखें कि वो जो कह रहे हैं, वो उनका व्यक्तिगत अनुभव है।

हर शरीर अलग होता है- जो उन्हें सूट करे, जरूरी नहीं कि आपको भी करे। उनके पास मेडिकल डिग्री नहीं है, इसलिए उनकी बात को इलाज नहीं मान सकते। इसलिए किसी भी मशहूर इंसान की बात को आंख बंद करके ना मानें। सोचें, समझें, और जानकारी लें।

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पेशाब पीने का ट्रेंड कहां से आया?

टीवी और सोशल मीडिया पर आपने बीयर ग्रिल्स (Bear Grylls) जैसे सर्वाइवल एक्पर्ट्स को देखा होगा, जो जंगलों में फंसे होने पर अपनी पेशाब पीते हैं। लेकिन ये सिर्फ इमरजेंसी के हालात होते हैं।

बीयर ग्रिल्स ने खुद कहा कि “ये कोई सलाह नहीं है। यह केवल आखिरी विकल्प होता है जब पीने के लिए कुछ और न हो।” मतलब साफ है कि यह कोई रोजाना अपनाने लायक आदत नहीं है।

क्या यह मन का भ्रम है?

बहुत बार लोग किसी बीमारी से परेशान होकर ऐसे इलाज ढूंढते हैं जो जल्दी असर करें। उन्हें लगता है कि “प्राकृतिक” तरीका शायद बेहतर होगा। और जब कोई कहे कि इससे फायदा हुआ, तो भरोसा और बढ़ जाता है।

लेकिन यह सिर्फ प्लेसबो इफेक्ट भी हो सकता है- यानी कोई असर नहीं हुआ, बस ऐसा महसूस हुआ। इसलिए हमें हमेशा वैज्ञानिक और प्रमाणित तरीकों पर भरोसा करना चाहिए।

सही और सुरक्षित उपाय क्या हैं?

डॉ. अहमद कमाल और डॉ. अनिल शर्मा अगर आप सच में अपनी सेहत सुधारना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए तरीके अपनाइए- ये सुरक्षित, आसान और असरदार हैं,

  • दिन में 7–8 गिलास पानी पिएं
  • ताजे फल-सब्जियां खाएं
  • हर दिन थोड़ा व्यायाम करें
  • भरपूर नींद लें
  • स्ट्रेस कम करें
  • नियमित चेकअप कराएं
  • योग करें- लेकिन पेशाब पीना योग नहीं है!

निष्कर्ष - क्या करना चाहिए?

पेशाब पीना एक पुरानी परंपरा हो सकती है, लेकिन आज के जमाने में इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। कुछ लोग अपने अनुभव के आधार पर इसकी तारीफ करते हैं, लेकिन मेडिकल साइंस इससे सहमत नहीं है। स्वास्थ्य से जुड़ी कोई भी चीज अपनाने से पहले यह जरूरी है कि आप,

  • सोच-समझकर निर्णय लें
  • डॉक्टर से सलाह लें
  • अफवाहों और बिना प्रमाण वाली बातों से दूर रहें

सेहत के साथ कोई रिस्क नहीं लेना चाहिए। अगर वाकई आप ठीक होना चाहते हैं, तो ऐसा तरीका चुनें जो सुरक्षित हो, जांचा-परखा हो और जिसे डॉक्टर भी मानते हों। क्योंकि सेहत सिर्फ भरोसे से नहीं, सही जानकारी और समझदारी से बनती है।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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