Times Network India Health Summit 2025: टाइम्स नेटवर्क इंडिया हेल्थ समिट 2025 का समापन एक बेहद महत्वपूर्ण और विचारशील पैनल चर्चा के साथ हुआ। इस बार का मुख्य विषय था - "भारत की स्वास्थ्य तकनीक क्रांति: स्थानीय से वैश्विक की ओर।" इस पैनल में ऐसे विशेषज्ञ शामिल हुए जो सिर्फ बदलाव की बातें नहीं कर रहे हैं, बल्कि जमीन पर उसे लागू भी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कैसे भारत की हेल्थ टेक कंपनियां गांवों और कस्बों में काम करते-करते अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रही हैं। इस चर्चा ने यह साबित कर दिया कि भारत अब सिर्फ 'कैच अप' नहीं कर रहा, बल्कि हेल्थ टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में लीड कर रहा है।
पैनल में शामिल हुए ये हेल्थ एक्पसपर्ट्स
इस सेशन के होस्ट डॉ. कार्तिक अनंतराम थे, जो अपोलो हॉस्पिटल्स में वाइस प्रेसिडेंट (इंटरनेशनल) हैं। पैनल डिस्कशन में इन हेल्थ एक्सपर्ट्स ने हिस्सा लिया,
- डॉ. विधि भनुशाली (सीईओ और को-फाउंडर - Scan)
- निशान अली (फाउंडर और सीईओ- Neurologic.AI)
- हारी थालापल्ली (सीईओ- Call Health)
- विक्रम वुप्पला (फाउंडर और सीईओ- Nephro Plus)
भारत की तकनीक अब वैश्विक पहचान बना रही है
डॉ. विधि भनुशाली ने भारत की डेंटल टेक्नोलॉजी यात्रा पर रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि एक समय था जब भारत हर दांतों से जुड़ी चीज विदेश से मंगाता था। लेकिन आज हम अपने यहां विकसित तकनीक दुनिया को एक्सपोर्ट कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि गांवों तक पहुंच बनाने में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और इनोवेशन ने बड़ी भूमिका निभाई है।
AI और ग्रामीण भारत
Neurologic.AI के सीईओ निशान अली ने बताया कि कैसे असम जैसे राज्यों में, जहां न्यूरोलॉजिस्ट नहीं मिलते, वहां AI से स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों की पहचान और इलाज संभव हुआ है। मशीन स्कैन पढ़कर जोखिम का अनुमान लगाती है और डॉक्टर समय रहते इलाज शुरू कर पाते हैं। इससे जान बचाना आसान हुआ है।
डिजिटल और फिजिकल हेल्थ का सही मेल
Call Health के सीईओ हारी थालापल्ली ने बताया कि उनका मॉडल मरीजों की सुविधा के हिसाब से बना है। जो इलाज ऑनलाइन हो सकता है, वो वर्चुअल तरीके से दिया जाता है। लेकिन जहां फिजिकल हस्तक्षेप की जरूरत होती है, वहां टीम घर तक पहुंचती है। उन्होंने डेटा सिक्योरिटी और फ्रॉड रोकने की जरूरत पर भी जोर दिया।
मरीज नहीं, ‘अतिथि’ हैं
Nephro Plus के विक्रम वुप्पला ने बताया कि उनके क्लिनिक में मरीजों को ‘गेस्ट’ कहकर बुलाया जाता है ताकि उन्हें सम्मान और गरिमा का अनुभव हो। उनकी सेवाएं आज 85 भारतीय शहरों और 4 देशों में चल रही हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय कीमतों पर इतना असरदार मॉ्डल बनाना ही हमारी ताकत है।
भारत में अंगदान की चुनौती और बदलाव की जरूरत
विक्रम ने यह भी कहा कि भारत में अंग दान को लेकर जागरूकता बहुत कम है। उन्होंने नॉर्डिक देशों का उदाहरण देते हुए सुझाव दिया कि ड्राइविंग लाइसेंस को अंगदान से जोड़ा जाना चाहिए। इससे ट्रांसप्लांट की कमी को दूर किया जा सकता है।
Times Network India Health Summit 2025 Sesson Link - यहां आप पूरा सेशन देख सकते हैं:
