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सूडान क्या करने जाते हैं भारतीय? WDR की रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य, विदेश में कमाई में होता है 120% का इजाफा

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 26, 2023, 02:12 PM IST

World Development Report 2023: रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में रहकर एक जगह से दूसरी जगह माइग्रेशन करने वाले भारतीयों की इनकम में 40 फीसदी की वृद्धि होती है, जबकि, विदेश में 120 प्रतिशत का इजाफा आय में होता है। इसमें सबसे ज्यादा इनकम अमेरिका में बढ़ती है, यहां 500 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है।

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सूडान से भारत वापस लाए जा रहे नागरिक (@MEAIndia)

Photo : Twitter

World Development Report 2023: संघर्षरत सूडान (Sudan Conflict) इन दिनों दुनिया के केंद्र में है। कई देशों के नागरिक वहां छिड़े युद्ध के बीच फंसे हुए हैं। अपने लोगों को निकालने के लिए तमाम देशों की सरकारों ने विशेष निकासी अभियान (Sudan evacuation) भी शुरू किया है, भारत भी इन देशों में से एक है। भारत सरकार ने सूडान से भारतीय नागरिकों के निकासी अभियान को 'ऑपरेशन कावेरी' (Operation Kaveri) नाम दिया है और इस विशेष अभियान के तहत अब तक करीब 500 भारतीयों को बाहर निकाला गया है।

सूडान में छिड़े इस संघर्ष के बीच वर्ल्ड डेवलपमेंट रिपोर्ट (WDR 2023) जारी की गई है, जिसमें विदेश में आय के लिए होने वाले माइग्रेशन (Migration) को लेकर आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि भारत से विदेश में कमाई के लिए जाने वाले भारतीयों की आय में करीब 120% का इजाफा होता हैऐसे में यह सवाल उठता है कि संघर्षरत सूडान(Sudan Crisis) में भारतीय क्यों जाते हैं? वहां आय के साधन क्या हैं? अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में भारतीयों की आय में क्या बढ़ोत्तरी होती है? WDR की रिपोर्ट में अन्य कौन से तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं? आइए जानते हैं...

पहले WDR की रिपोर्ट जान लीजिए

वर्ल्ड डेवलपमेंट रिपोर्ट ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट जारी की है। इसमें कहा गया है कि भारत के अंदर ही माइग्रेशन पर सिर्फ 40% इनकम बढ़ती है, जबकि विदेशों में जाकर नौकरी करने पर आय में 120% का इजाफा होता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय कामगारों को अमेरिका जाने पर सबसे ज्यादा इजाफा होता है। यहां आय में लगभग 500% की वृद्धि होती है। जबकि दूसरे नंबर पर संयुक्त अरब अमीरात है, जहां 300% की वृद्धि दर्ज की जाती है।

रिपोर्ट में और क्या है?

WDR 2023 की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि दुनियाभर में करीब 18.4 करोड़ लोग प्रवासी हैं। इसमें बताया गया है कि भारत, मैक्सिको, चीन और फिलीपींस जैसे प्रवासी आबादी वाले देशों में प्रेषण में वृद्धि हुई है। एक अनुमान के मुताबिक, यूएई में एक भारतीय प्रवासी अपनी आय का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा अपने परिवार को भेजता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत से सबसे ज्यादा माइग्रेशन अमेरिका और खाड़ी देशों में होता है। वहीं बांग्लादेश से भारत आने वाली संख्या भी काफी ज्यादा है।

अब जानिए सूडान क्यों जाते हैं भारतीय?

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, सूडान के हर कोने से हजारों की संख्या में लोग भारत इलाज कराने आते हैं। सूडान के लोगों का भारतीय मेडिकल साइंस में बहुत विश्वास है। यहां आयुर्वेद को भी काफी पसंद किया जाता है। ऐसे में भारतीय लोग यहां से आयुर्वेद, जड़ी बूटियां लेकर सूडान जाते हैं और वहां बेचते हैं। यहां बसे भारतीय निर्यात का काम ज्यादा करते हैं और ये लोग भारत और चीन से वस्तुएं खरीदते हैं।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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