Uttar Pradesh Politics: सियासत में कब कौन किस ओर पलटी मारने वाला है, इसकी भविष्यवाणी बड़े से बड़े पंडित भी नहीं कर सकते हैं। एग्जाम्पल तो इतने सारे हैं कि हर कोई गिनती ही भूल जाएगा। मगर उत्तर प्रदेश की सियासत का जिक्र किया जाए, तो इन दिनों एक बार फिर पूर्वांचल के बड़बोले नेता ओमप्रकाश राजभर ने ऐसी पलटी मारी कि हर कोई देखता रह गया। सुर्खियां बटोरने में माहिर ओपी राजभर के पलटने के तुरंत बाद ही दारा सिंह चौहान ने भी उनके पदचिन्हों को अपना लिया और उन्होंने भी भाजपा के आगे मत्था टेक दिया। अब यूपी की सियासत में दिलचस्पी रखने वालों को स्वामी प्रसाद मौर्य के कदम का बेसब्री से इंतजार है। क्या राजभर और दारा सिंह के बाद अब स्वामी भी कमल को अपनाएंगे? इस सवाल का जवाब देना उतरा ही मुश्किल है, जितना मुश्किल रेत से पानी निकालना होगा। हालांकि आपको समझाते हैं कि स्वामी प्रसाद मौर्य के तेवर इन दिनों क्या इशारा कर रहे हैं।
भीम आर्मी के मंच पर स्वामी प्रसाद मौर्य
जिस स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर ये आसार जताए जा रहे हैं कि ओमप्रकाश राजभर और दारा सिंह चौहान के बाद अब वो भी बीजेपी का दामन जल्द ही थाम सकते हैं, वो इन दिनों भीम आर्मी के मंच पर भाजपा के खिलाफ जहर उगलते नजर आ रहे हैं। हालांकि जहर उगलने के बाद भी गले लगाने की प्रथा राजनीति में सबसे मशहूर है, राजभर इसके सबसे सटीक उदाहरण होंगे। अब अगर स्वामी प्रसाद मौर्य भी भाजपा को भला-बुरा कह भी रहे हैं, तो इसकी क्या गारंटी है कि वो कल कमल नहीं ही थामेंगे? खैर, आपको पहले ये बताते हैं कि भीम आर्मी के मंच से स्वामी प्रसाद मौर्य ने भाजपा को क्या खरी-खोटी सुनाई?
स्वामी प्रसाद मौर्य ने चंद्रशेखर के लिए उठाई आवाज
दिल्ली के जंतर मंतर पर समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने भाजपा की डबल इंजन सरकार को जमकर कोसा। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति, आदिवासियों और पिछड़ों पर साजिश के तहत हमला किया जा रहा है। डबल इंजन की सरकार बाबा साहेब अंबेडकर के दिए आरक्षण को भी खत्म करने पर तुली हुई है। स्वामी प्रसाद ने इस मौके पर ये भी कहा कि आदिवासियों के अधिकार पर डाका नहीं डाला जा सकता, पिछड़ों के सम्मान को नहीं कुचला जा सकता।
भाजपा से क्यों खिसिया गए थे स्वामी प्रसाद मौर्य?
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2022 को लेकर सरगर्मी तेज हो रही थी, इसी बीच कोइरी समुदाय में अच्छी पकड़ रखने का दावा करने वाले योगी सरकार के तत्कालीन कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने पहले मंत्री पद छोड़ा और भी भाजपा का दामन छोड़ा और अखिलेश यादव की साइकिल की सवारी पर निकल पड़े। उन्हें ये आसार नजर आ रहे थे कि इस चुनाव में कमल कीचड़ में डूब जाएगा और साइकिल की रफ्तार इस कदर बढ़ेगी कि विजय का सेहरा सपा के सिर पर ही बंधेगा। हालांकि स्वामी प्रसाद मौर्य ने उस वक्त ये दावा किया था कि उनके भाजपा छोड़ने की वजह ये है कि पिछड़ों का सम्मान नहीं होता है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मौर्य को राजभर ने ही सपा के साथ लाया था।
क्या भाजपा के पास मौर्य को वापस लाएंगे राजभर?
आगामी लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर सभी पार्टियां अपनी-अपनी ताकत झोंकने में जुटी हुई है। इस बीच सुभासपा और भाजपा के बीच बात बन गई। इस बीच जब मीडिया ने राजभर से ये सवाल पूछा था कि आप भाजपा के साथ आ गए, आपके आने के बाद दारा सिंह चौहान भी आ गए, क्या अब स्वामी प्रसाद मौर्य का नंबर है? इस सवाल के जवाब में राजभर ने मुस्कुराते हुए कहा था कि इंतजार कीजिए, अभी बहुत कुछ अच्छा होने वाला है।
फाजिलनगर में स्वामी प्रसाद को मिली थी करारी हार
समाजवादी पार्टी ने विधानसभा चुनाव 2022 में मौर्य को कुशीनगर की फाजिलनगर सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था। कहा जाता है कि जब आरपीएन सिंह ने भाजपा का दामन थामा तो पडरौना सीट पर स्वामी प्रसाद मौर्य को हार का डर सताने लगा था। इसी के चलते वो फाजिलनगर चले गए। हालांकि इसका भी कोई फायदा उन्हें नहीं हुआ, चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी सुरेंद्र कुशवाहा के हाथों उन्हें करारी हार झेलनी पड़ी। अब ये सवाल अभी भी बरकरार है कि क्या लोकसभा चुनाव 2024 से पहले स्वामी सपा को छोड़ बीजेपी में आते हैं या नहीं... हालांकि कई दिग्गजों का मानना है कि भाजपा स्वामी प्रसाद मौर्य को तवज्जो नहीं देना चाहती है, क्योंकि केशव प्रसाद मौर्य के जरिए पार्टी ने कुशवाहा समाज में अच्छी खासी पकड़ बना रखी है। अब देखना होगा कि स्वामी अखिलेश के सगे बनकर रहते हैं या फिर भाजपा के पास खिंचे चले आते हैं।
