Monsoon Session 2026: भारत की संसद का मॉनसून सत्र 2026 शुरू होते ही अभूतपूर्व गतिरोध और भारी हंगामे के आगोश में समाता हुआ नजर आ रहा है। संसद के दोनों सदनों में विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी कर रहे हैं, जिसके कारण सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित हो रही है। दूसरी तरफ, दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों छात्रों का विरोध-प्रदर्शन जारी है, जिसे अब देश की बड़ी सामाजिक और राजनीतिक हस्तियों का खुला समर्थन मिल चुका है। आखिर यह पूरा विवाद क्या है, कहां पेच फंसा है और सरकार व विपक्ष के बीच तकरार इतनी क्यों बढ़ गई है? आइए इसे 5 प्रमुख बिंदुओं में बहुत आसान भाषा में समझते हैं।
हंगामे की मुख्य वजह
इस पूरे विवाद की जड़ में प्रतियोगी परीक्षाओं (NEET, UGC-NET आदि) में लगातार सामने आ रही पेपर लीक की घटनाएं हैं। लाखों युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है। छात्रों का आरोप है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पारदर्शिता बनाए रखने में विफल रही है। जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP Protest) के अनोखे विरोध और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल ने इस आक्रोश को राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया है।
लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई से भड़का राजनीतिक आक्रोश
सोमवार यानी 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। दिल्ली पुलिस ने पथराव, उग्र व्यवहार और BNSS की धारा 163 के उल्लंघन का हवाला देते हुए विभिन्न थानों (जैसे पार्लियामेंट स्ट्रीट, कनॉट प्लेस) में 10 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की हैं। इतना ही नहीं, पुलिस 250 से ज्यादा वीडियो खंगाल रही है। छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई ने जलते में घी का काम किया है।

लोकसभा में अपनी बात रखते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव: (Photo: X/@samajwadiparty)
सामाजिक दिग्गजों की एंट्री
छात्र आंदोलन को उस वक्त नया बल मिला जब महाराष्ट्र से मराठा आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल दिल्ली पहुंचे। उन्होंने कहा, "छात्रों पर अमानवीय लाठीचार्ज बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर सरकार ने युवाओं की आवाज दबाई तो उसे पूरे देश में इसका अंजाम भुगतना होगा।" इसके अलावा आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने भी संवाद की वकालत करते हुए युवाओं की बात संवेदनशीलता से सुनने की अपील की।
राजनीतिक मोर्चे पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी समेत प्रमुख विपक्षी नेताओं ने पुलिस कार्रवाई को "अमानवीय व अस्वीकार्य" करार दिया। उद्धव ठाकरे ने कहा कि वे शुरू से ही सोनम वांगचुक और युवाओं के साथ हैं।
संसद से सड़क तक विपक्ष का कड़ा रुख
संसद के भीतर और बाहर 'INDIA' गठबंधन पूरी तरह एकजुट नजर आ रहा है। प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में उतरे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य वरिष्ठ नेताओं को जब पुलिस ने पीएम आवास के बाहर से हिरासत में लिया, तो विपक्ष और अधिक आक्रामक हो गया। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
विपक्ष की प्रमुख मांगें हैं:
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और अमित शाह का तत्काल इस्तीफा।
- पूरे पेपर लीक कांड की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष या सीबीआई जांच।
- NTA के ढांचे में आमूलचूल बदलाव और कड़ा कानून बनाना।
सरकार का रुख और बहस में फंसा पेच
सत्ता पक्ष यानी केंद्र सरकार का कहना है कि वह छात्रों के भविष्य के प्रति पूरी तरह गंभीर है और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कदम उठा रही है। हम संसद में पेपर लीक मुद्दे पर चर्चा करने को तैयार हैं। वहीं सरकार का आरोप है कि विपक्ष इस संवेदनशील मुद्दे पर रचनात्मक बहस करने के बजाय सिर्फ संसद ठप करके राजनीति चमका रहा है।
