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ईरान की ‘पहले हमला’ वाली रणनीति क्या है? नई बैलिस्टिक मिसाइल से क्यों बढ़ा अमेरिका से टकराव

Iran US War: ईरान, अमेरिका के साथ जंग में अब नए और घातक हथियार भी सामने ला रहा है और नई रणनीति भी, जिससे यह जगं खत्म होने के बजाय और बढ़ती दिख रही है।

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ईरान की बदलती रणनीति से अमेरिका के लिए बढ़ रही हैं मुश्किलें (AI Photo)
Compiled by: शिशुपाल कुमार
Updated Sep 8, 2026, 16:56 IST
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Iran US War: ईरान अमेरिका के बीच जारी जंग, अब अलग ही मोड़ लेती दिख रही है। ईरान जहां नए-नए हथियार और मिसाइल निकाल रहा है, वहीं अमेरिका ईरान से जुड़े तेल टैंकरों को निशाने बना रहा है। लेकिन इन सबके बीच ईरान ने अब एक ऐसी रणनीति को बदलने का ऐलान किया है, जिससे खाड़ी देशों में और जंग विकराल हो सकता है। ईरान का साफ कहना है कि अब वो 'पहले हमला न करने की नीति' से पीछे हट रही है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की अपनी रिपोर्ट कह रही हैं, कि ईरान अपनी सैन्य क्षमताओं को लेकर पहले से ज्यादा आत्मविश्वास में है और लंबे संघर्ष के लिए तैयार दिख रहा है। यानी ईरान अब सिर्फ हमले का जवाब देने की बात नहीं कर रहा, बल्कि संभावित खतरे को पहले ही खत्म करने की रणनीति की बात कर रहा है। आखिर यह रणनीति क्या है? नई मिसाइल कितनी ताकतवर है और अमेरिका के लिए यह चिंता का विषय क्यों है?

नई मिसाइल और बदली रणनीति

ईरान ने हाल ही में अपने हथियारखाने से एक नए हथियार को निकाला है। इस हथियार को प्रयोग उसने अमेरिका के खिलाफ करने के बाद नीति बदलने की घोषणा की है। ईरान के सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि उसकी नई बैलिस्टिक मिसाइल ‘कासेम बसीर’ उसकी रक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव दिखाती है। इसके साथ ही तेहरान ने एक नई नीति का संकेत दिया है-अगर किसी खतरे के पैदा होने की आशंका भी है, तो ईरान उसके सामने आने से पहले ही कार्रवाई कर सकता है। ईरान ने जिस कासेम बसीर मिसाइल को अपनी रणनीति में अहम बताया है, वह ठोस ईंधन वाली बैलिस्टिक मिसाइल है। ईरानी दावों के मुताबिक इसमें पहले की तुलना में बेहतर रेंज और सटीकता है और यह करीब आधा टन का वारहेड ले जा सकती है। इस मिसाइल को पिछले साल पेश किया गया था और उस समय इसकी रेंज कम से कम 1,200 किलोमीटर बताई गई थी। यही वजह है कि इसे ईरान की बढ़ती मिसाइल क्षमता के एक महत्वपूर्ण हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।

तीन रणनीतियों पर ईरान?

तेहरान की नई सोच यह है कि किसी खतरे के वास्तव में हमला बनने का इंतजार नहीं किया जाएगा। यानी अगर ईरान को लगता है कि उसके खिलाफ हमला होने वाला है, तो वह उससे पहले ही सैन्य कार्रवाई कर सकता है। यह पारंपरिक ‘जवाबी हमला’ रणनीति से अलग सोच है। जवाबी हमला में होता ये है कि पहले हमला होने दें, फिर जवाब दें। लेकिन ईरान की नई रणनीति यानी कि 'पहले हमला' में संभावित खतरे को पहले ही निशाना बनाएं।

साथ ही ईरान ने न्यूक्लियर डिटरेंस नीति की ओर भी इशारा किया है। न्यूक्लियर डिटरेंस का मतलब है किइतनी मजबूत परमाणु क्षमता बनाए रखें कि दुश्मन हमला करने से पहले कई बार सोचे। ईरान की ताजा बयानबाजी इन तीनों रणनीतियों के मिश्रण की ओर इशारा करती है।

ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें दुनिया को दिखा चुकी हैं ताकत (फोटो- AP)

ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें दुनिया को दिखा चुकी हैं ताकत (फोटो- AP)

क्या कासेम बसीर ने अमेरिकी युद्धपोत पर हमला किया?

ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख मोहसेन रेजाई ने दावा किया कि नई मिसाइल क्षमता का अमेरिकी युद्धपोत के खिलाफ परीक्षण किया गया है। लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि जिस मिसाइल को अमेरिकी युद्धपोतों के खिलाफ इस्तेमाल किए जाने का दावा किया गया, वह कासेम बसीर ही थी या कोई दूसरी मिसाइल। इसलिए इस दावे को फिलहाल ईरानी पक्ष के दावे के तौर पर ही देखना जरूरी है।

अमेरिका के खिलाफ मिसाइल हमला क्यों बड़ा बदलाव है?

अमेरिका के मुताबिक शनिवार को ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों की तरफ बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उसके युद्धपोत इन हमलों से बच गए। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के तीन तेल टैंकरों को निशाना बनाया। इस घटना को इसलिए गंभीर माना जा रहा है क्योंकि संघर्ष के पिछले करीब छह महीनों में समुद्र में ईरान के हमले मुख्य रूप से व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाते रहे थे। अब सीधे अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बनाए जाने से टकराव का स्तर बढ़ने की आशंका है।

ईरान की परमाणु रणनीति और मिसाइल कार्यक्रम का कनेक्शन

यहां ईरान की ‘न्यूक्लियर रणनीति’ को समझना जरूरी है। ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें अपने आप में परमाणु हथियार नहीं हैं। लेकिन लंबी दूरी की ऐसी मिसाइलें परमाणु हथियार पहुंचाने की क्षमता से जुड़ी हो सकती हैं। ईरान लंबे समय से अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और इजरायल के दबाव में है। उसके बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर भी पश्चिमी देशों की गंभीर चिंताएं रही हैं। इसी वजह से ईरान की मिसाइल क्षमता और उसके परमाणु कार्यक्रम को अक्सर एक साथ देखा जाता है। ईरान अब अपने परमाणु हथियारों को लेकर विश्वसनीय ‘डिटरेंस’ यानी ऐसा डर पैदा करना चाहता है कि कोई देश उस पर हमला करने से पहले संभावित जवाबी कार्रवाई के बारे में सोचे।

ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख मोहसेन रेजाई (फोटो-AP)

ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख मोहसेन रेजाई (फोटो-AP)

ईरान को अपनी सैन्य ताकत पर क्यों बढ़ा भरोसा?

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, महीनों तक चले रुक-रुककर होने वाले संघर्ष ने ईरान को अपनी सैन्य क्षमताओं को परखने का मौका दिया है। ईरान अब यह समझ चुका है कि वह अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ किन तरीकों से हमला कर सकता है और किन क्षेत्रों में दबाव बनाया जा सकता है। यही वजह है कि उसकी भाषा भी पहले के मुकाबले ज्यादा आक्रामक नजर आ रही है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों में आशंका जताई गई है कि ईरान की सरकार आने वाले समय में संघर्ष को और बढ़ाने पर विचार कर सकती है।

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