Pulse Polio Abhiyan: देशभर में कल यानि कि 3 मार्च से पल्स पोलियो अभियान शुरू हो रहा है। पल्स पोलियो अभियान के दौरान देशभर में 0 से 5 साल तक के बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई जाएगी। अभियान के दौरान घर-घर जाकर और स्वास्थ्य केंद्रों पर पोलियो की दवा बच्चों को फ्री में पिलाई जाएगी। आखिर पोलियो की दवा बच्चों के लिए क्यों जरूरी है, आइए जानते हैं।
पोलियो से जीवन तबाह
भारत समेत कई देशों में पोलियो बच्चों के लिए एक अभिशाप था। जिसे भी शिकार करता उसकी जिंदगी नर्क हो जाती। शरीर नाकाम हो जाता। कम उम्र में दर्दनाक मौत हो जाती और लाखों परिवार इस बीमारी से प्रभावित थे।
पोलियो के लक्षण
शुरुआती दौर में पोलियो एक आम फ्लू जैसा होता है। अधिकांश में लक्षण भी नहीं दिखता है। इसमें गला खराब होना, बुखार, थकान, उल्टी, सिरदर्द और पेट दर्द जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। ये लक्षण 2-3 दिन रहता है और फिर अपने आप ठीक हो जाता है। लेकिन कुछ लोगों पर यह गंभीर असर करता है, जिससे मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी पर असर पड़ता है। शरीर पक्षाघात का शिकार हो जाता है। कोई भी व्यक्ति लकवाग्रस्त या गैर-लकवाग्रस्त पोलियो से प्रभावित हो सकता है। पैरालिटिक पोलियो आम तौर पर गैर-पैरालिटिक पोलियो जैसे लक्षणों के साथ शुरू होता है, लेकिन जल्द ही तीव्र दर्द, मांसपेशियों में कमजोरी और ऐंठन तक बढ़ जाता है। इससे पैर या बांह का पक्षाघात हो सकता है।
पोलियो कैसे फैलता है
पोलियो एक संक्रामक रोग है, जो वायरस के कारण होता है। पोलियो दूषित पानी या भोजन या किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से फैलता है। यही पक्षाघात का कारण भी बनता है।
पोलियो टीकाकरण का महत्व
सीडीसी के अनुसार, बच्चों को पोलियो वैक्सीन की चार खुराक मिलनी चाहिए। पहली खुराक तब दी जानी चाहिए जब वे 2 महीने के हों, फिर 4 महीने के हों। अगली खुराक 6 महीने से 18 महीने के बच्चों और 4 से 6 साल के बच्चों को दी जानी चाहिए।
पोलियो मुक्त भारत
भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैश्विक पोलियो उन्मूलन पहल के बाद वर्ष 1995 में 100% कवरेज के लक्ष्य के साथ यूनिवर्सल टीकाकरण कार्यक्रम के साथ पल्स पोलियो अभियान कार्यक्रम शुरू किया था। जिसके बाद देशभर में सघन अभियान चलाया गया। बच्चों को पोलियो की दवा फ्री में पिलाई गई। इस अभियान का फायदा यह हुआ कि पूरा देश पिछले 12 सालों से पोलियो मुक्त है।
