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80 फीसद बर्फीली जमीन वाले ग्रीनलैंड को क्यों खरीदना चाहते हैं ट्रंप? राष्ट्रीय सुरक्षा या कुछ और है वजह

Greenland Facts : । 21 लाख वर्ग किलोमीटर का क्षेत्रफल वाला ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है। इसका 80 फीसद हिस्सा हमेशा बर्फ से ढंका रहता है। यह अटलांटिक और आर्कटिक महासागर के बीच स्थित है। इसका तटवर्ती इलाका काफी उबड़-खाबड़ है, यहां के पर्वतीय इलाका ज्यादार बंजर है। इसके अलावा करीब 80 फीसद इलाका बर्फीला है।

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डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बेटे को भेजा था ग्रीनलैंड।

Greenland Facts : अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड खरीदने की बात कही है। इसे हासिल करने के लिए उन्होंने सैन्य ताकत का इस्तेमाल करने से भी इंकार नहीं किया है। ट्रंप का कहना है कि राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड पर अधिकार होना जरूरी है। ग्रीनलैंड कनाडा के पास है। ऐसे में वह अमेरिका के भी करीब है। ट्रंप ने कहा है कि ग्रीनलैंड के चारो तरफ रूस और चीन के युद्धपोत घूम रहे हैं। ग्रीनलैंड में अमेरिका का सैन्य एवं स्पेस बेस भी है। ऐसे में खतरा बढ़ता जा रहा है। ट्रंप ने ग्रीनलैंड का जायजा लेने के लिए अपने सबसे बड़े बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर को वहां भेजा। जूनियर मंगलवार को वहां पहुंचे और वहां लोगों से मिले। जूनियर ने कहा कि उनके पिता ने ग्रीनलैंड के लोगों को 'हेलो' कहने के लिए भेजा है।

डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है ग्रीनलैंड

ग्रीनलैंड एक संसाधन संपन्न डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है। यहां अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा तो नहीं लेकिन दुनिया में यूएस के जितने भी बडे़ सैन्य अड्डे हैं उनमें से यह एक है। यहां अमेरिका का एक स्पेस सेंटर भी है। इस लिहाज से ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए काफी रणनीतिक अहमियत रखता है। ट्रंप का कहना है कि ग्रीनलैंड आर्थिक या सैन्य तरीके से अमेरिका का हिस्सा बन जाएगा।

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अमेरिका इसे पहले भी खरीदना चाहता था

सवाल है कि आखिर ट्रंप ग्रीनलैंड को खरीदने या इस पर अपना कब्जा करने की इतनी दिलचस्पी क्यों दिखा रहे हैं तो इसकी भी एक वजह है। ऐसी कई रिपोर्टें आई हैं जिनमें ग्रीनलैंड में तेल, गैस और अन्य बहुमूल्य खनिजों के होने की प्रबल संभावना जताई गई है। ट्रंप पवन ऊर्जा, क्लाईमेट चेंज जैसी चीजों पर खर्च को अनर्गल बता चुके हैं। वह तेल और गैस के लिए 'ड्रिल ड्रिल ड्रिल' पर जोर दे रहे हैं। उनका इरादा और योजना ग्रीनलैंड में ड्रिल कराकर तेल और गैस का भंडार करना और फिर उसे दुनिया भर को बेचना है। दरअसल, एक्सपर्ट्स का कहना है कि आर्किटक और ग्रीनलैंड में बर्फ जिस तरह से पिघल रही है, उससे दुर्लभ खनिज तत्वों का दोहन करना बहुत आसान हो जाएगा। हालांकि, ट्रंप ऐसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं हैं जिन्होंने ग्रीनलैंड को खरीदने का सुझाव दिया है। 1860 के दशक में अमेरिका के 17वें राष्ट्रपति एंड्रयू जॉनसन ने भी इसी तरह का विचार रखा था।

ग्रीनलैंड, डेनमार्क की कॉलोनी रह चुका है लेकिन साल 1979 में इसने अपने कामकाज के लिए एक संसदीय प्रणाली बना ली। एक स्वायत्त क्षेत्र और देश होने के बावजूद इसकी विदेश और रक्षा नीति डेनमार्क नियंत्रित करता है। तो सैन्य बेस को लेकर ग्रीनलैंड की अमेरिका के साथ भी एक संधि है। यह संधि ग्रीनलैंड को सुरक्षा गारंटी देती है।

80 फीसद इलाका बर्फा में ढंका रहता है

अब बात करते हैं ग्रीनलैंड की भौगोलिक बनावट की। 21 लाख वर्ग किलोमीटर का क्षेत्रफल वाला ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है। इसका 80 फीसद हिस्सा हमेशा बर्फ से ढंका रहता है। यह अटलांटिक और आर्कटिक महासागर के बीच स्थित है। इसका तटवर्ती इलाका काफी उबड़-खाबड़ है, यहां के पर्वतीय इलाका ज्यादार बंजर है। इसके अलावा करीब 80 फीसद इलाका बर्फीला है। बर्फ वाली कई जगहों की मोटाई 11,000 फीट यानी 3,350 मीटर की है। यहां बर्फ की परत करीब 3.5 किलोमीटर तक चौड़ी पाई गई है। बर्फीला पत्थरनुमा आकृतियां मध्य से दक्षिण और नार्वे तक फैली हुई हैं।

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ग्रीनलैंड में हो सकते हैं कई द्वीप

कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्रीनलैंड की मोटी बर्फ की चादर अपने में तीन बड़े अलग द्वीपों को ढंके हो सकती है। क्योंकि साल 2002 में उत्तरी इलाके में जब बर्फ पिघलनी शुरू हुई तो दिन के उजाले में एक छोटा द्वीप नजर आने लगा। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि बर्फ पिघलना आगे यदि जारी रहता है तो अन्य द्वीप भी उभरकर सामने आ सकते हैं। यही नहीं ग्रीनलैंड में करीब 40 ग्लैशियर हैं जो कि पूरे इलाके में फैले हुए हैं। इनमें से सबसे बड़ा ग्लैशियर पीटरमैन है। हाल ही में पीटरमैन ग्लैशियर का एक टुकड़ा टूटकर अलग हुआ। बर्फ का यह टुकड़ा 100 वर्ग मील जितना बड़ा और 600 फीट चौड़ा था। यह टुकड़ा अब ग्रीनलैंड-कनाडा और नेर्स स्ट्रेट की तरफ धीरे-धीरे सरक रहा है। ग्रीनलैंड में जो पहाड़ हैं या तो आंशिक रूप या पूरी तरह से बर्फ में ढंके हुए हैं। यहां की ऊंची पहाड़ियां पूरी तरह से बर्फीली हैं और जिन चोटियों पर बर्फ नहीं है, वे पूर्वी तटवर्ती इलाके वाटकिंस रेंज में पाई जाती हैं। ग्रीनलैंड की सबसे ऊंची पर्वतीय चोटी जिसका नाम गन्बजोर्न्स जेल्ड है उसकी ऊंचाई 3,700 मीटर यानी 12,139 फीट है।

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ग्रीनलैंड में करीब 20 नदियां बहती हैं

ग्रीनलैंड में जून के महीने में न्यूनतम तापमान माइनस 37 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा रहता है। हाड़ कंपाने वाली इस सर्दी में भी ग्रीनलैंड के कुछ तटवर्ती इलाके ऐसे हैं जहां आप तैर सकते हैं। उनारतोक द्वीप का सुदूर दक्षिणी क्षेत्र ऐसा ही इलाका है। इसके अलावा सुदूर पश्चिम का डिस्को आइलैंड में हजारों की संख्या छोटे गर्म झरने हैं। ग्रीनलैंड में करीब 20 नदियां भी हैं।

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ग्लेशियर के पिघलने से यहां छोटी-छोटी झीलें बनती हैं जो तेजी से बह जाती हैं या सर्दी के मौसम में जमकर ठोस बन जाती हैं। 5 नगर पालिकाएं ग्रीनलैंड का कामकाज देखती हैं। इन नगरपालिकाओं का नाम अवान्नाता, कुजालेक, केकरतालिक, केक्काटा और सारमेरसूक है। यहां का सबसे बड़ा शयर यहां की राजधानी नुउक है। यही शहर ग्रीनलैंड में हर तरह की राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र है। ग्रीनलैंड की आबादी का एक तिहाई हिस्सा इसी शहर में रहता है।

तीन देशों से साझा करता अपनी समुद्री सीमा

दुनिया का सबसे बड़ा यह द्वीप तीन महाद्वीपों नॉर्थ अमेरिका, यूरोप और नॉर्थ अटलांटिक सागर के बीच स्थित है। इसकी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए इसके नॉर्थ अमेरिका महाद्वीप का हिस्सा माना जाता है। खास बात यह है कि ग्रीनलैंड पृथ्वी के दोनों गोलार्ध उत्तरी और पश्चिमी दोनों में स्थित है। उत्तर में यह आर्किटक सागर, पूर्व में ग्रीनलैंड सागर, दक्षिणपूर्व में नॉर्थ अटलांटिक सागर, दक्षिण पश्चिम में डेविस स्ट्रेट, पश्चिम में बैफिन बे और उत्तर पश्चिम में लिंकोल्न सागर से घिरा है। ग्रीनलैंड अपनी समुद्री सीमा कनाडा, आइसलैंड और नॉर्वे से साझा करता है। वर्ल्ड एटलस की रिपोर्ट के मुताबिक ग्रीनलैंड की आबादी 56,225 है। यहां की जीडीपी 3.05 अरब डॉलर और प्रति व्यक्ति आय 54 हजार 470 डॉलर है।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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