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बिहार में सुलतानगंज का नाम अजगैबीनाथ धाम करने की क्यों हो रही है मांग? जानें इससे जुड़ी हर एक बात

Bihar: क्या बिहार के सुलतानगंज का नाम बदलकर अजगैबीनाथ किया जाएगा? ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि एक बार फिर इस दिशा में पहल तेज हो गई है। आखिर इसके नाम बदलने की मांग क्यों हो रही है। बिहार के डिप्टी सीएम समेत भाजपा के कई नेताओं ने इस मसले पर बयान दिया है।

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क्या बदला जाएगा सुलतानगंज का नाम?

Ajgaibinath Dham: उत्तर प्रदेश के कई रेलवे स्टेशन के नाम बदले गए, जिनमें इलाहाबाद, मुगलसराय, निहालगढ़ समेत कई नाम शामिल हैं। मध्य प्रदेश में भी रेलवे स्टेशन के नाम बदले गए, अब ये पहल बिहार में भी जोर पकड़ रही है। तारीख 4 नवंबर, 2024 और दिन था सोमवार... जब बिहार में भाजपा ने कांवरिया सेवा सम्मान समारोह का आयोजन किया। खास बात ये थी कि इस मौके पर सुलतानगंज-देवघर पथ पर सावन महीने सहित डेढ़-दो महीने तक श्रद्धालुओं को अनवरत सेवा करने वाले संस्थाओं और लोगों के पांव पखारे गए तथा उन्हें सम्मानित किया गया। इसी मौके पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी समेत कई दिग्गज नेताओं ने बिहार के भागलपुर के सुलतानगंज का नाम बदलने की बात कह दी। आखिर ये मांग तेज क्यों हो रही है, इसकी वजह क्या है। आपको सबकुछ समझाते हैं। सबसे पहले आपको समझाते हैं कि किसने क्या कहा।

बिहार सरकार जल्द ही रेल मंत्रालय के पास भेजेगा प्रस्ताव

सम्राट चौधरी ने इस मौके पर ये बताया कि बिहार के भागलपुर के सुलतानगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर अजगैबीनाथ धाम रखा जाएगा। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सुलतानगंज रेलवे स्टेशन का नाम अजगैबीनाथ धाम रखने को लेकर नगर परिषद ने सरकार के पास एक प्रस्ताव भेजा है, जिसे बिहार सरकार जल्द ही भारत सरकार के रेलवे मंत्रालय के पास भेजेगा।

इस मौके पर लोगों को संबोधित करते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष जायसवाल ने कहा कि सुलतानगंज-देवघर पथ पर एक महीने, डेढ़ महीने तक श्रद्धालुओं की अनवरत सेवा करना आसान नहीं है, यह बड़े हिम्मत का काम है और यही सच्चे शिवभक्त हैं। इस समारोह में 10 राज्यों के लोगों को सम्मान करने का अवसर मिला है। उन्होंने इन सभी लोगों का नमन करते हुए कहा कि सच में यही श्रद्धालुओं के सेवा के ब्रांड एंबेसडर हैं।

सुलतानगंज स्टेशन का नाम बदलकर अजगैबीनाथ किया जाए

उन्होंने लोगों को भरोसा देते हुए कहा कि सुलतानगंज और देवघर के रास्ते के विकास के लिए सरकार लगातार सोच रही है। उन्होंने कहा कि यह बात सामने आई है कि सुलतानगंज स्टेशन का नाम बदलकर अजगैबीनाथ किया जाए। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि इस समारोह के बाद इन सेवा करने वालों का हौसला बढ़ेगा। उन्होंने भगवान से ऐसे लोगों को और शक्ति देने की प्रार्थना करते हुए कहा कि नर में नारायण देखकर ये महामानव बन गए इन्हें अपनी नहीं समाज की चिंता है।

नगर परिषद ने पास किया था नाम बदलने का प्रस्ताव

आपको बता दें, इसी साल नगर परिषद ने सुलतानगंज का नाम बदलकर अजगैबीनाथ धाम करने के प्रस्ताव को पास किया था। साल 2007 से ये मुख्य महंत, जूना अखाड़ा समिति, स्थानीय लोगों व पंडा समाज के लोग इस जगह का नाम बदलने की मांग कर रहे थे। सुलतानगंज विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला, अजगैबीनाथ धाम और उत्तरवाहिनी गंगा के लिए प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि एक समय सुलतानगंज हिरण्य पुरी या अजगैबीनाथ धाम के नाम से जाना जाता था। यहां बौद्ध विहार हुआ करते थे, मुगल शासकों ने इसका नाम बदलकर सुलतानगंज कर दिया था।

सुलतानगंज में सावन के महीने में लगने वाला मेला विश्व प्रसिद्ध है। यहां हर दिन लाखों श्रद्धालु उत्तरवाहिनी गंगा में डुबकी लगाते हैं और बाबा अजगैबीनाथ धाम मंदिर में जल लेकर पूजा अर्चना करते हैं। श्रद्धालु जल लेकर 105 किलोमीटर की दूरी पैदल यात्रा कर बैधनाथ धाम जाते हैं। बाबा बैजनाथ को जल अर्पित करते हैं, अजगैबीनाथ मंदिर का काफी पुराना है। अब एक बार फिर सुलतानगंज का नाम बदलने की मांग तेज हो गई है। ऐसे में ये देखना अहम होगा कि इस पर कब फैसला होगा।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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