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क्या इजरायली एजेंट थे अहमदीनेजाद? जानें मोसाद के उस 'सीक्रेट प्लॉट' की पूरी कहानी, जिसने ईरान में मचा दी खलबली

NYT रिपोर्ट के मुताबिक, अहमदीनेजाद को अपने पाले में लाने के लिए मोसाद का यह गुप्त खेल यूरोप के देश हंगरी में शुरू हुआ था। इस खुफिया मुलाकात को छिपाने के लिए बकायदा एक जलवायु परिवर्तन कॉन्फ्रेंस का सहारा लिया गया।

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Photo : AP
ईरान के पूर्व राष्ट्रपति अहमदीनेजाद पर बड़ा दावा
Authored by: Amit Mandal
Updated Jul 15, 2026, 13:47 IST

Mahmoud Ahmadinejad : कभी इजरायल और पश्चिमी देशों की तबाही की वकालत करने वाले और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को आक्रामक रफ्तार देने वाले पूर्व ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद (Mahmoud Ahmadinejad) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया गया है। अमेरिकी अखबार 'न्यूयार्क टाइम्स' (NYT) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद (Mossad) ने ईरान में तख्तापलट करने और अहमदीनेजाद को वहां का नया नेता बनाने के लिए एक बेहद गुप्त ऑपरेशन चलाया था। हालांकि, पूर्व राष्ट्रपति अहमदीनेजाद के कार्यालय ने इन दावों को 'हॉलीवुड स्टाइल' के झूठ और मनगढ़ंत कहानियां बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है। आइए जानते हैं क्या है इस सीक्रेट ऑपरेशन की पूरी इनसाइड स्टोरी।

हंगरी में हुई थी 2024 की वो खुफिया बैठक

NYT रिपोर्ट के मुताबिक, अहमदीनेजाद को अपने पाले में लाने के लिए मोसाद का यह गुप्त खेल यूरोप के देश हंगरी में शुरू हुआ था। इस खुफिया मुलाकात को छिपाने के लिए बकायदा एक क्लाइमेट चेंज (जलवायु परिवर्तन) कॉन्फ्रेंस का सहारा लिया गया। लुडोविका यूनिवर्सिटी के रेक्टर गेर्गली डेली ने बताया कि साल 2024 की शुरुआत में हंगरी सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने उन्हें क्लाइमेट कॉन्फ्रेंस आयोजित करने और उसमें अहमदीनेजाद को बुलाने का निर्देश दिया था।

मोसाद चीफ खुद पहुंचे बुडापेस्ट

अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के तत्कालीन प्रमुख डेविड बार्निया (David Barnea) खुद इस सीक्रेट मीटिंग के लिए हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट पहुंचे थे। इस बैठक के तुरंत बाद मोसाद ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) को सूचित किया था कि उनका अहमदीनेजाद से संपर्क स्थापित हो गया है।

साल भर चली ट्रेनिंग

रिपोर्ट के अनुसार, अहमदीनेजाद की 2024 और उसके अगले साल हुई हंगरी यात्राएं वास्तव में इजरायल की उस कोशिश का हिस्सा थीं, जिसके तहत उन्हें एक 'इंटेलिजेंस एसेट' के रूप में तैयार किया जा रहा था ताकि सही समय आने पर उन्हें ईरान की सत्ता सौंपी जा सके।

28 फरवरी: जब एक्शन में आया तख्तापलट का 'ऑपरेशन'

इजरायल का यह 'रेजीम चेंज' (सत्ता परिवर्तन) प्लान इस साल 28 फरवरी को अपने सबसे नाटकीय मोड़ पर पहुंच गया, ठीक उसी दिन जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर समन्वित हमले शुरू किए थे। उसी दिन तेहरान में कड़ी निगरानी में रह रहे अहमदीनेजाद के कंपाउंड पर एक इजरायली हवाई हमला हुआ। इस हमले में उनकी सुरक्षा टीम की इमारत और बख्तरबंद गाड़ी क्षतिग्रस्त हो गई।

मोसाद एजेंटों ने किया रेस्क्यू: हमले के तुरंत बाद मचे हड़कंप के बीच एक काली प्यूजो (Peugeot) कार वहां पहुंची। चार वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, उस कार में मोसाद के एजेंट सवार थे जो अहमदीनेजाद को सुरक्षित निकालकर एक सीक्रेट सेफ हाउस ले गए।

कैसे फेल हुआ मोसाद का यह मास्टरप्लान?

इतनी बड़ी प्लानिंग के बावजूद इजरायल का यह रेजीम चेंज प्लान बहुत जल्द बिखर गया। सूत्रों के मुताबिक, अहमदीनेजाद खुद को बचाए जाने के इस इजरायली तरीके से काफी परेशान हो गए थे और उन्हें इजरायल की मदद से दोबारा सत्ता में लौटने के प्लान पर शक होने लगा था। वह उस सेफ हाउस से कैसे और किन हालातों में निकले, यह अभी भी रहस्य बना हुआ है। फरवरी की इस घटना के बाद वह महीनों तक जनता के सामने नहीं आए। वे हाल ही में ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान बेहद कम समय के लिए दिखाई दिए थे।

NYT की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल के साथ इन खुफिया संपर्कों की भनक ईरानी सरकार को लग चुकी है। इसके बाद से अहमदीनेजाद को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की खुफिया शाखा ने हिरासत में ले रखा है और वह नजरबंद हैं। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने अभी तक इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

खाकी जैकेट से लेकर ब्रांडेड सूट तक: अहमदीनेजाद का बदला रूप

  • महमूद अहमदीनेजाद 2005 से 2013 तक ईरान के राष्ट्रपति रहे थे। राष्ट्रपति पद छोड़ने के सालों बाद उनके तेवर अचानक बदलने लगे थे।
  • उन्होंने इजरायल विरोधी बयानों को कम कर दिया था और ईरान के सुरक्षा बलों की ज्यादतियों की आलोचना शुरू कर दी थी।
  • उन्होंने अपनी पहचान बन चुकी ढीली-ढाली खाकी विंडब्रेकर (जैकेट) को छोड़कर महंगे सिलवाए हुए सूट पहनने शुरू कर दिए थे, दाढ़ी को ट्रिम कर लिया था और अंग्रेजी सीख रहे थे।
  • ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के साथ भी उनके मतभेद जगजाहिर थे, जिसके चलते उन्हें हाशिए पर धकेल दिया गया था। शायद इसी असंतोष का फायदा उठाने की कोशिश मोसाद ने की थी।
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