Delhi Rain and Flood:तीन दिनों की लगातार बारिश के बाद दिल्ली पर अब बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। यमुना नदी का जल स्तर अब तक के उच्चतम स्तर पर है। स्कूल बंद कर दिए गए हैं और कई दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम शुरू हो गया है। मंगलवार को खतरे का निशान 205 मीटर पार करने के बाद यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ता रहा। आज सुबह 8 बजे जल स्तर 208.48 मीटर था, जो 1978 में निर्धारित 207.49 मीटर के पिछले सर्वकालिक ऊंचे स्तर को पार कर गया। दिल्ली और आसपास के इलाकों में भारी बारिश और साथ ही हरियाणा में हथिनी कुंड बैराज से पानी छोड़े जाने से हालात बिगड़े हैं।
अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय राजधानी के कुछ हिस्सों में बाढ़ जैसी स्थिति इसी वजह से है। विशेषज्ञ कहते हैं आज दिल्ली जिस संकट का सामना कर रही है, उसकी कई वजहें हैं। एक तरफ नोएडा में बारिश के दौरान हालात संभाल लिए जाते हैं, लेकिन राजधानी दिल्ली पूरी तरह पानी में डूब जाती है। आखिर ऐसा क्यों होता है, आइए जानने की कोशिश करते हैं।
गाद जमा होना
इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) में प्राकृतिक विरासत प्रभाग के प्रधान निदेशक मनु भटनागर कहते हैं कि कम समय में भारी बारिश से यमुना का स्तर अचानक बढ़ जाता है। लंबे समय तक समान मात्रा में पानी गिरने से ऐसी स्थिति पैदा नहीं होगी क्योंकि इससे पानी को गुजरने का समय मिल जाता है। अगर कम मात्रा में बारिश होती है तो भी बहाव का स्तर ऊंचा हो सकता है।
पानी के बहाव में रुकावट
साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स, पीपल (SANDRP) के एसोसिएट कोऑर्डिनेटर भीम सिंह रावत ने कहा कि यमुना के जल स्तर में अभूतपूर्व वृद्धि का एक प्रमुख कारण गाद जमा होने के कारण नदी के तल का ऊंचा होना है। उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि वजीराबाद से ओखला तक 22 किलोमीटर की नदी के भीतर 20 से अधिक पुल पानी के प्रवाह को बाधित करते हैं, जिससे नदी के तल में गाद जमा हो जाती है और कई रेतीली चट्टानों का निर्माण होता है। ये जगहें सिग्नेचर ब्रिज के नीचे, आईटीओ बैराज और यमुना बैंक के बीच, आईएसबीटी कश्मीरी गेट और पुराने रेलवे ब्रिज के बीच और पुराने रेलवे ब्रिज और गीता कॉलोनी ब्रिज के बीच हैं।हथिनीकुंड बैराज का पानी
सीडब्ल्यूसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, हथिनीकुंड बैराज से छोड़े गए पानी को पिछले वर्षों की तुलना में दिल्ली पहुंचने में कम समय लगा। इसका मुख्य कारण अतिक्रमण और गाद हो सकता है। पहले पानी को बहने के लिए अधिक जगह मिलती थी। अब यह एक संकुचित क्रॉस-सेक्शन से होकर गुजरता है। राष्ट्रीय राजधानी से लगभग 180 किमी दूर हरियाणा के यमुनानगर में बैराज से पानी को दिल्ली तक पहुंचने में लगभग दो से तीन दिन लगते हैं।
बाढ़ क्षेत्र का अतिक्रमण
इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर के देश प्रतिनिधि यशवीर भटनागर ने यमुना में रिकॉर्ड जल स्तर का कारण पूरे ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में तेज बारिश को बताया। उन्होंने कहा कि बाढ़ के मैदानों पर अतिक्रमण से हालात खराब हो सकते हैं।
प्राकृतिक जल निकासी प्रणालियों का संकुचित होना
एनर्जी रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट ने दिल्ली शहर के भीतर बाढ़ की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि में योगदान देने वाले कई कारकों की पहचान की है। इनमें बारिश का असमान वितरण, अनियंत्रित शहरीकरण और प्राकृतिक जल निकासी चैनलों और शहरी झीलों पर अतिक्रमण शामिल हैं। खास चिंता का विषय शहरी जल निकायों का अनियंत्रित भराव है, जो एक व्यापक समस्या बन गई है। उचित नियोजन उपायों के पालन के बिना पूरे शहर में अवैध कॉलोनियों के प्रसार के कारण प्राकृतिक जल निकासी प्रणालियां संकीर्ण हो गई हैं। द एनर्जी रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट ने चेतावनी दी है कि यह शहर की समग्र भलाई के लिए एक महत्वपूर्ण खतरा है और शहरी बाढ़ को खुला आमंत्रण देता है।
