राजधानी दिल्ली में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA bloc) की रामलीला मैदान में होने वाली मेगा रैली से ठीक पहले राजनीतिक गलियारों में एक और मुलाकात चर्चा का केंद्र बन गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके (Abhijeet Dipke) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद जहां एक ओर CJP ने विपक्ष के 'वोट चोरी' के मुद्दों और मेगा रैली को अपना नैतिक समर्थन दिया है, वहीं दूसरी ओर रामलीला मैदान के मुख्य मंच या प्रदर्शन से दूरी बनाए रखने का भी ऐलान किया है। आइए जानते हैं कि इस सियासी समीकरण और CJP की इस दोहरी रणनीति के पीछे के मायने क्या हैं:
मुलाकात की मुख्य वजह- आभार और एकजुटता
अभिजीत दिपके ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात के बाद स्पष्ट किया कि यह शिष्टाचार और आभार व्यक्त करने के लिए थी। दीपके ने याद दिलाया कि जब उनके संगठन (CJP) ने जंतर-मंतर पर छात्र और युवा आंदोलनों की शुरुआत की थी और जब दिल्ली पुलिस ने सीजेपी नेताओं (जैसे सौरव दास और आशुतोष रंका) को गिरफ्तार किया था, तब ममता बनर्जी ने खुलकर इन युवा कार्यकर्ताओं का साथ दिया था। ममता बनर्जी ने भी इन युवा कार्यकर्ताओं की तारीफ करते हुए उन्हें इस नए राजनीतिक संघर्ष का 'पायनियर' (संस्थापक) बताया और उन्हें पश्चिम बंगाल आकर कार्यक्रम करने का न्योता भी दिया।
समर्थन तो है, पर रैली में शामिल क्यों नहीं?
जब यह सवाल उठा कि क्या CJP रामलीला मैदान में होने वाली 'इंडिया' गठबंधन की रैली में शामिल होगी, तो अभिजीत दिपके ने साफ किया कि CJP इस आंदोलन और कथित 'वोट चोरी' के खिलाफ उठने वाली हर आवाज के साथ पूरी तरह एकजुट है। जो भी संगठन चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ लड़ेगा, CJP उसका समर्थन करेगी। अभिजीत दिपके ने जोर देकर कहा कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' एक स्वतंत्र और तटस्थ मंच है। वे किसी राजनीतिक दल या गठबंधन के स्थायी हिस्से के रूप में खुद को नहीं बांधना चाहते, ताकि उनकी स्वतंत्र युवा विद्रोही छवि और निष्पक्षता पर कोई आंच न आए। वे अपनी अलग पहचान और राजनीतिक स्पेस को सुरक्षित रखना चाहते हैं।
स्थापित राजनीतिक दलों के 'टैग' से बचना
युवा संगठनों और नए राजनीतिक स्टार्टअप्स के लिए यह बेहद जरूरी होता है कि वे पारंपरिक राजनीतिक दलों के खेमे में बंधे हुए न दिखें। CJP यह संदेश देना चाहती है कि वे किसी खास पार्टी या गठबंधन के इशारे पर काम करने वाला मोहरा नहीं हैं, बल्कि युवाओं और जनता के मुद्दों पर अपनी स्वतंत्र शर्तों पर संघर्ष करने वाला संगठन है। संक्षेप में कहें तो, मुद्दा और वैचारिक समर्थन साझा होने के बावजूद, अपनी स्वतंत्र पहचान और राजनीतिक स्पेस को सुरक्षित रखने के लिए ही CJP ने इस रैली से दूरी बनाई है।
इसके राजनीतिक मायने क्या हैं?
हाल के समय में पारंपरिक राजनीतिक दलों और जमीनी युवा संगठनों के बीच एक नया तालमेल देखने को मिल रहा है। विपक्षी दल (जैसे TMC और कांग्रेस) इन युवा चेहरों को अपने साथ जोड़कर अपनी स्वीकार्यता बढ़ाना चाहते हैं, वहीं युवा संगठन भी अपने मुद्दों को बड़े मंचों तक भुनाने से पीछे नहीं हटते। अगर CJP सीधे तौर पर किसी राजनीतिक मोर्चे जैसे 'इंडिया' ब्लॉक का हिस्सा बन जाती, तो उसकी स्वतंत्र आलोचनात्मक छवि पर सवाल उठ सकते थे। इसलिए, समर्थन का ऐलान करके भी मुख्य विरोध प्रदर्शन से दूर रहना उनकी एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति है, जिससे वे राजनीतिक दलों के 'टैग' से बचते हुए अपनी स्वतंत्र जमीन मजबूत कर रहे हैं।
विपक्ष की मेगा रैली से स्वतंत्र दूरी
जहां एक ओर 'इंडिया' गठबंधन रामलीला मैदान में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ बड़ी रैली कर रहा है, वहीं CJP ने इस मुद्दे के समर्थन जैसे कथित 'वोट चोरी' के खिलाफ आवाज के बावजूद अपनी स्वतंत्र और गैर-दलीय पहचान बनाए रखने के लिए इस रैली के मंच और मुख्य प्रदर्शन से दूरी बनाई हुई है। कुछ समय पहले जंतर-मंतर के प्रदर्शनों के दौरान CJP के प्रमुख नेताओं जैसे सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी और बाद में उनकी जमानत व रिहाई का दौर चला है, जिसके बाद अब पार्टी अपनी आगे की रणनीतियों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर संगठनात्मक रूप से सक्रिय हो रही है।
