Times Now Navbharat
live-tv
Premium

न्यूयॉर्क और पेरिस के दिग्गजों को पीछे छोड़ ग्लोबल मंच पर चमका पटना का ‘बिहार म्यूजियम’, जानिए क्यों दुनिया भर में हो रही इसकी चर्चा

पटना का बिहार म्यूजियम जर्मनी की ट्रैवल मैगजीन की 'वर्ल्ड्स 100 बेस्ट म्यूजियम' सूची में 9वें स्थान पर पहुंच गया है। इतना ही नहीं इस पायदान पर पहुंचे इस संग्रहालय से पेरिस के लूव्र और न्यूयॉर्क के मेट्रोपोलिटन म्यूजियम भी पीछे छूट गए हैं। आइए जानते हैं इसकी खासियत।

Image
टॉप 10 सूची में आया पटना का बिहार म्यूजियम
Authored by: निशांत तिवारी
Updated Nov 1, 2026, 14:47 IST
Follow on Google News

जब भी दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित और भव्य संग्रहालयों की बात आती है, तो जेहन में सबसे पहले पेरिस का मशहूर 'लूव्र' या न्यूयॉर्क का 'मेट्रोपोलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट' जैसे नाम आते हैं। लेकिन हाल ही में सांस्कृतिक गलियारों से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जर्मनी की प्रतिष्ठित स्वतंत्र ट्रैवल गाइड पत्रिका ‘वर्थ अ जर्नी’ (Worth a Journey) द्वारा जारी वर्ष 2026 की 'वर्ल्ड्स 100 बेस्ट म्यूजियम' की वैश्विक सूची में भारत के पटना स्थित 'बिहार म्यूजियम' ने शानदार छलांग लगाते हुए नौवां स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि इस प्रतिष्ठित सूची में जगह पाने वाला यह अकेला भारतीय संस्थान तो है ही, साथ ही एशिया महाद्वीप से शीर्ष 10 में जगह बनाने वाला इकलौता संग्रहालय भी है। खास बात यह है कि इसने रैंकिंग के मामले में पेरिस के ऐतिहासिक लूव्र और न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित मेट जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है। आखिर इस संग्रहालय में ऐसा क्या खास है जो इसने पूरी दुनिया को अचंभित कर दिया है?

प्राचीन धरोहर और आधुनिक वास्तुकला का अद्भुत संगम

साल 2015 में जनता के लिए खोले गए इस भव्य संग्रहालय को महज एक दशक के भीतर ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतनी बड़ी पहचान मिल जाना गर्व का विषय है। लगभग 13 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैले इस परिसर की वास्तुकला अपने आप में एक कलाकृति है। इसे जापान के मशहूर वास्तुकार फुमिहिको माकी ने मुंबई की प्रसिद्ध फर्म स्टूडियो ओपोलिस के साथ मिलकर डिजाइन किया है। जापानी न्यूनतम शैली और भारतीय पारंपरिक भव्यता का यह समन्वय देखने वालों को पहली नजर में ही मोह लेता है।

बिहार म्यूजियम

बिहार म्यूजियम

दीदारगंज यक्षी और इतिहास का जीवंत सफर

जैसे वेटिकन म्यूजियम की पहचान माइकलएंजेलो की बनाई सिस्टिन चैपल की सीलिंग पर बनाए चित्र हैं, पेरिस के लूव्र की पहचान 'मोनालिसा' की पेंटिंग से है, न्यूयॉर्क का म्यूजियम ऑफ मॉडर्न आर्ट विन्सेंट वैन गॉग की द स्टारी नाइट के लिए फेमस है, वैसे ही बिहार म्यूजियम की शान 'दीदारगंज यक्षी' की वह अनमोल प्रतिमा है, जिसे लगभग दो हजार साल पहले चुनार के एक ही बलुआ पत्थर को तराश कर बनाया गया था। इसके अलावा यहां निम्नलिखित प्रमुख आकर्षण पर्यटकों को मंत्रमुग्ध करते हैं। मौर्य, गुप्त और पाल काल से लेकर मुगल व सूर वंश तक के दुर्लभ सिक्के, मूर्तियां, प्राचीन पांडुलिपियां और हथियार यहां संरक्षित हैं। संग्रहालय की दीर्घाएं इंसानी सभ्यता के शुरुआती दौर से लेकर आधुनिकता तक के सफर को बहुत ही वैज्ञानिक और कलात्मक ढंग से बयां करती हैं। इसके अलावा यहां की अनूठी डायस्पोरा गैलरी दर्शाती है कि कैसे बिहार की माटी से जुड़े लोगों ने दुनिया के अलग-अलग कोनों में जाकर अपनी अमिट छाप छोड़ी है।

बिहार म्यूजियम की शान दीदारगंज यक्षी

बिहार म्यूजियम की शान दीदारगंज यक्षी

महज प्रदर्शन नहीं, एक 'इंटरएक्टिव' अनुभव

बिहार म्यूजियम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पारंपरिक संग्रहालयों की तरह केवल पुरानी वस्तुओं को कांच के बक्से में बंद करके नहीं रखता, बल्कि दर्शकों को इतिहास के साथ सीधे संवाद करने का मौका देता है। यहां की आधुनिक तकनीक, विजुअल स्क्रीनिंग, ऑडियो-विजुअल इफेक्ट्स और लघु फिल्में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर किसी के लिए इतिहास को जीवंत कर देती हैं। इसके अलावा, विशेष रूप से बच्चों के लिए बनाई गई चिल्ड्रेंस गैलरी में लोक कला, विज्ञान और प्रकृति से जुड़ी रोचक प्रदर्शनियां स्थापित की गई हैं। परिसर में पारंपरिक बिहारी व्यंजनों का लुत्फ उठाने के लिए रेस्टोरेंट और स्थानीय हस्तशिल्प खरीदने के लिए सोविनियर शॉप भी मौजूद हैं।

बिहार म्यूजियम एशिया में नंबर 1 स्थान पर

बिहार म्यूजियम एशिया में नंबर 1 स्थान पर

वैश्विक पटल पर भारत और बिहार का बढ़ता मान

इस वैश्विक रैंकिंग के जरिए बिहार की पहचान केवल पारंपरिक राजनीतिक या आर्थिक चर्चाओं तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि अब यह दुनिया के कला प्रेमियों के नक्शे पर चमक रहा है। जर्मनी की इस प्रतिष्ठित पत्रिका द्वारा 140 से अधिक देशों के हजारों सांस्कृतिक स्थलों के मूल्यांकन के बाद बिहार म्यूजियम को यह मुकाम मिला है। यह इस बात का प्रमाण है कि जब दूरदर्शी सोच, बेहतरीन डिजाइन और समृद्ध इतिहास का मेल होता है, तो सरहदें छोटी पड़ जाती हैं। यदि आप इतिहास, वास्तुकला और कला के अनूठे संसार में 'टाइम ट्रैवल' करना चाहते हैं, तो यह विश्वस्तरीय संग्रहालय आपकी बकेट लिस्ट में जरूर होना चाहिए।

End of Article