Ahoi Ashtami Mata Images 2026: आज 1 नवंबर 2026 को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जा रहा है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की कामना से अहोई माता की पूजा करती हैं। अहोई अष्टमी की पूजा में माता का चित्र बनाने की भी खास परंपरा है। महिलाएं घर की दीवार पर गेरू से अहोई माता की तस्वीर बनाती हैं। इस चित्र में अहोई माता के साथ स्याहू (सेही) और उनके सात पुत्रों की तस्वीर भी बनाई जाती है। इसके बाद चित्र के सामने पूजा की थाली सजाकर अहोई माता की व्रत कथा सुनी जाती है।
अहोई अष्टमी पर पूजा के लिए बाजार में अहोई माता के कैलेंडर और तस्वीरें भी मिल जाती हैं, लेकिन कई घरों में आज भी महिलाएं दीवार पर अपने हाथों से माता का चित्र बनाती हैं। इसके लिए गेरू और चावल के घोल का इस्तेमाल किया जाता है। चित्र बनाने के बाद उसके सामने जल से भरा कलश, चावल, मूली, सिंघाड़े और मिठाई रखी जाती है। अगर आप भी आज अहोई अष्टमी की पूजा के लिए दीवार पर अहोई माता का चित्र बनाना चाहती हैं, तो यहां जानें आसान तरीका और पूजा की पूरी तैयारी।

अहोई माता का चित्र
अहोई अष्टमी पर अहोई माता का चित्र कैसे बनाएं
अहोई अष्टमी के दिन सबसे पहले घर की उस दीवार को साफ करें, जहां आप पूजा करना चाहती हैं। अब दीवार पर गेरू से एक साफ जगह तैयार करें। गेरू का इस्तेमाल करके अहोई माता का चित्र बनाएं। माता के साथ स्याहू यानी साही और उनके सात पुत्रों की तस्वीर भी बनाएं। चित्र में सभी आकृतियों को साफ और सुंदर तरीके से बनाएं, ताकि पूजा के समय माता और उनके परिवार की तस्वीर स्पष्ट दिखाई दे। अगर आपको हाथ से चित्र बनाना नहीं आता है, तो बाजार से अहोई माता का कैलेंडर या पूजा वाला चित्र भी ला सकती हैं। इसे साफ जगह पर दीवार पर लगाकर पूजा की तैयारी करें। कई महिलाएं पूजा के लिए चांदी की अहोई भी रखती हैं, जिसे स्याहू कहा जाता है।

अहोई माता का चित्र
अहोई माता का चित्र बनाने के लिए क्या-क्या चाहिए
दीवार पर अहोई माता का चित्र बनाने के लिए इन चीजों की जरूरत होगी।
- गेरू
- चावल का घोल या सफेद रंग
- साफ पानी
- छोटा ब्रश या रूई
- अहोई माता, स्याहू और उनके सात पुत्रों का चित्र बनाने के लिए पेंसिल (वैकल्पिक)
गेरू से माता और स्याहू का चित्र बनाएं। जरूरत के अनुसार चावल के घोल से चित्र में सफेद रंग भर सकते हैं। चित्र बनाने के बाद उसे सूखने दें और फिर पूजा की तैयारी करें।

अहोई माता का चित्र
अहोई माता के चित्र के सामने कैसे करें पूजा
अहोई माता का चित्र तैयार होने के बाद उसके सामने एक चौकी या पूजा का स्थान बनाएं। वहां जल से भरा कलश रखें। पूजा की थाली में रोली, अक्षत, फूल, दीपक और मिठाई रखें। इसके साथ मूली, सिंघाड़े, चावल और दूध-भात भी रख सकते हैं। कई घरों में पूजा के समय चांदी की अहोई या स्याहू माला रखी जाती है। शाम के शुभ मुहूर्त में अहोई माता को रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं और माता को भोग लगाएं। इसके बाद अहोई अष्टमी की व्रत कथा सुनें। कथा सुनते समय हाथ में सात गेहूं के दाने रखने की परंपरा भी है। कथा पूरी होने पर अहोई माता की आरती करें और अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की प्रार्थना करें।

अहोई माता का चित्र
अहोई अष्टमी पर स्याहू और उनके सात पुत्रों का चित्र क्यों बनाते हैं
अहोई अष्टमी की पूजा में स्याहू यानी साही और उनके सात पुत्रों का विशेष महत्व है। इसके पीछे अहोई माता के व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा है। कथा के अनुसार, एक साहूकार की पत्नी जंगल में मिट्टी खोद रही थी। इसी दौरान अनजाने में उसकी खुरपी से स्याहू के एक बच्चे की मृत्यु हो गई। इससे दुखी होकर स्याहू ने साहूकार की पत्नी को संतान के वियोग का श्राप दिया। बाद में साहूकार की पत्नी ने अहोई माता की पूजा और प्रार्थना की। माता की कृपा से उसे संतान सुख मिला। इसी कथा की याद में अहोई अष्टमी पर अहोई माता के साथ स्याहू और उनके सात पुत्रों का चित्र बनाया जाता है। माताएं इस दिन उनकी पूजा करके अपनी संतानों की खुशहाली और लंबी आयु की कामना करती हैं।

अहोई माता का चित्र
अहोई अष्टमी 2026 पर पूजा का शुभ मुहूर्त
आज 1 नवंबर 2026 को अहोई अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 36 मिनट से 6 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। पूजा की कुल अवधि 1 घंटा 18 मिनट है। तारों के दर्शन का समय शाम करीब 6 बजे है। तारे दिखाई देने पर उन्हें जल से अर्घ्य देकर अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत का पारण करें।अष्टमी तिथि 1 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 51 मिनट पर शुरू हुई है और 2 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट पर समाप्त होगी। आज अहोई माता का चित्र बनाकर विधि-विधान से पूजा करें और संतान के सुखी व स्वस्थ जीवन की कामना करें।
