एक्सप्लेनर्स

कौन हैं प्रो. वी. कामकोटी? जिन्हें प्रियंका गांधी ने संसद में कहा 'गोमूत्र एक्सपर्ट', क्या है 2025 का पूरा मामला

Who is Kamakoti: संसद में नीट पेपर लीक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई नई शिक्षा टास्क फोर्स पर सवाल उठाए। इस दौरान उन्होंने बिना नाम लिए IIT मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटी को 'गोमूत्र विशेषज्ञ' कहकर संबोधित किया, जिससे राजनीतिक बहस छिड़ गई।

Image

​जानिए प्रो. कामकोटी की प्रोफाइल और विवाद की वजह (Photo: X/@priyankagandhi/AI)

Who is Kamakoti: जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले छात्रों के आंदोलन को लेकर लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध समाप्त होने के बाद संसद में नीट (NEET Paper Leak) पेपर लीक और शिक्षा सुधारों पर चर्चा शुरू हुई। इसी दौरान लोकसभा में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Parliament Speech) के एक बयान ने नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया।

प्रियंका गांधी ने सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए गठित नई समिति (टास्क फोर्स) की योग्यता पर सवाल उठाते हुए एक सदस्य को अप्रत्यक्ष रूप से 'गोमूत्र विशेषज्ञ' (Gaumutra Visheshagya) कह दिया।

उनका यह इशारा IIT मद्रास के प्रतिष्ठित निदेशक प्रो. वी. कामकोटी की तरफ माना जा रहा है। इसके बाद से ही सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक यह सवाल उठ रहा है कि आखिर प्रो. वी. कामकोटी कौन हैं और उनका नाम इस विवाद में कैसे आया।

Photo: (X/@priyankagandhi)

Photo: (X/@priyankagandhi)

प्रियंका गांधी ने संसद में क्या कहा?

प्रियंका गांधी ने सरकार को घेरते हुए कहा कि सिर्फ नई समितियां बना देने से शिक्षा क्षेत्र की समस्याएं हल नहीं होंगी, क्योंकि इससे पहले बनी 'राधाकृष्णन समिति' की सिफारिशों को भी पूरी तरह लागू नहीं किया गया। उन्होंने नई टास्क फोर्स के सदस्यों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें पूर्व आईबी (IB) प्रमुख, एक आईटी कंपनी के मालिक और एक 'गोमूत्र विशेषज्ञ' को शामिल किया गया है। उन्होंने पूछा कि ये लोग शिक्षा और छात्रों की समस्याओं के बारे में क्या जानते हैं?

कौन हैं प्रो. वी. कामकोटी?

  • राजनीतिक बयानों से इतर, प्रो. वी. कामकोटी देश के अग्रणी और बेहद सम्मानित कंप्यूटर वैज्ञानिकों में से एक हैं।
  • कामकोटी ने IIT मद्रास से ही कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में एम.एस. (M.S.) और पीएचडी (PhD) की डिग्री हासिल की। साल 2001 में वे इसी संस्थान में फैकल्टी के रूप में जुड़े और जनवरी 2022 में IIT मद्रास के निदेशक बने।
  • वे कंप्यूटर आर्किटेक्चर, इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी और VLSI डिजाइन के बड़े विशेषज्ञ हैं। भारत के अपने स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर विकास कार्यक्रम में भी उनकी मुख्य भूमिका रही है।
  • प्रो. कामकोटी 'नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी बोर्ड' (NSAB) के सदस्य रह चुके हैं। इसके अलावा, उन्होंने वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा गठित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टास्क फोर्स की अध्यक्षता भी की है।
  • उनके 150 से अधिक रिसर्च पेपर अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं और उन्होंने कई पीएचडी शोधार्थियों को मार्गदर्शन दिया है।

प्रमुख पुरस्कार और सम्मान

  • डीआरडीओ एकेडमिक एक्सीलेंस अवॉर्ड (DRDO Academic Excellence Award)
  • अब्दुल कलाम टेक्नोलॉजी इनोवेशन नेशनल फेलोशिप
  • वासविक इंडस्ट्रियल रिसर्च अवॉर्ड (VASVIK Award)
  • आईबीएम फैकल्टी अवॉर्ड (IBM Faculty Award)
  • आईईएसए टेक्नो विजनरी अवॉर्ड

आखिर 'गोमूत्र' से क्यों जोड़ा गया प्रो. कामकोटी का नाम?

यह पूरा मामला जनवरी 2025 का है। चेन्नई में आयोजित 'गौ संवर्धन' के एक कार्यक्रम में बोलते हुए प्रो. कामकोटी ने गोमूत्र के पारंपरिक और औषधीय उपयोग पर बात की थी। उन्होंने एक संन्यासी का उदाहरण देते हुए दावा किया था कि गोमूत्र में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण होते हैं, जो पाचन तंत्र और बुखार जैसी समस्याओं में राहत दे सकते हैं।

उनके इस बयान का एक वीडियो वायरल होने के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे 'छद्म विज्ञान' (Pseudoscience) बढ़ावा देना करार दिया था। हालांकि, उनके समर्थकों का कहना था कि प्रो. कामकोटी जैविक खेती और देसी मवेशियों के संरक्षण के वैज्ञानिक संदर्भ में बात कर रहे थे।

विवाद के बाद आई थी प्रतिक्रियाएं

जब 2025 में यह विवाद पहली बार उठा था, तब तमिलनाडु भाजपा के नेताओं ने प्रो. कामकोटी का बचाव करते हुए कहा था कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग के शीर्ष विशेषज्ञ हैं। किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत धार्मिक आस्था या विचारों का सम्मान किया जाना चाहिए और किसी शैक्षणिक संस्थान के प्रमुख का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए।

monu jha
मोनू झाauthor

मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कंटेंट, ऑफबीट खबरों और सोशल मीडिया ट्रेंड्स को पहचानने में बेहद दक्ष हैं। यूनीक एंगल तलाशने और कहानियों को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करने की उनकी क्षमता उन्हें डिजिटल कंटेंट स्पेस में अलग पहचान देती है। मोनू कुमार 4,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं, जिनमें कई वायरल रिपोर्ट्स, ट्रेंड-बेस्ड अपडेट्स और सोशल मीडिया-फोकस्ड कंटेंट शामिल हैं।

और पढ़ें
End of Article