ईरान और इजरायल रिश्तों का इतिहास
ईरान और इजरायल के बीच 1979 से कोई राजनयिक संबंध नहीं हैं और मौजूदा संबंध बेहद शत्रुतापूर्ण हैं। शीत युद्ध के अधिकांश समय तक यह संबंध सौहार्दपूर्ण था, लेकिन 1979 में ईरानी क्रांति के बाद संबंध पूरी तरह खराब हो गए। 1991 में खाड़ी युद्ध की समाप्ति के बाद से दोनों देशों के रिश्ते खुले तौर पर इतने खराब हो गए कि इनका सामान्य होना असंभव हो गया। ईरान, खुले तौर पर इजरायल को एक शैतान देश कहता है और उसे ध्यान में रखकर लगातार अपना परमाणु कार्यक्रम आगे बढ़ाता रहा है।
इजरायल को ईरान से खतरा
इजरायल हमेशा से ईरान को एक ऐसे देश के रूप में देखता है जो उसे खत्म करने पर आमादा है। ईरान ने भी हर मौके पर इजरायल को खाक करने की धमकी दी है। जब इजरायल ने लेबनान स्थित हिज्बुल्लाह को तबाह किया तो इसका सीधा असर ईरान पर पड़ा। ईरान ही हिज्बुल्लाह जैसे आतंकी संगठन को खाद-पानी यानी पैसा और संसाधन मुहैया कराता रहा है। उधर, ईरान ने हालिया दिनों में संकेत दिया कि उसका परमाणु कार्यक्रम जोर-शोर से चल रहा है। अमेरिका के साथ बातचीत के बावजूद ईरान पर शक गहराता रहा है कि वह परमाणु बम बनाने के करीब है। इजरायल ने ईरान से परमाणु सीक्रेट भी चुराने का दावा किया।

ईरान-इजरायल संघर्ष हुआ तेज
13 जून 2025 को ऑपरेशन राइजिंग लायन शुरू
ईरान से अस्तित्व के खतरे का दावा करते हुए इजरायल ने ईरान पर बड़ा हमला किया। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 13 जून 2025 को ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा की थी। उन्होंने बताया कि इस अभियान का नाम ऑपरेशन राइजिंग लायन रखा गया। नेतन्याहू ने बताया कि इस अभियान को शुरू करने का मकसद ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों से पैदा हो रहे खतरे को खत्म करना है। इस हमले में इजरायल ने ईरान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व को खत्म कर दिया। न सिर्फ सैन्य अधिकारियों को, ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों को भी इजरायल ने खत्म कर दिया। खुफिया एजेंसी मोसाद की मदद से इसे अंजाम दिया गया।
13 जून को इजरायल ने ईरानी सैन्य और परमाणु स्थलों को निशाना बनाकर, उन्होंने कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों और परमाणु वैज्ञानिकों को खत्म कर दिया। ईरान ने इजरायल पर सैकड़ों मिसाइलों और ड्रोनों को दागकर जवाबी कार्रवाई की, जिनमें से कुछ ने देश की एयर डिफेंस सिस्टम को भेद दिया। अब तक के युद्ध में ईरान में सैकड़ों लोग मारे गए हैं और 1,000 से अधिक घायल हुए हैं और इजरायल में दो दर्जन लोग मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं।
ईरान जोर देकर कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। लेकिन इजरायल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने अस्तित्व के लिए खतरे के रूप में देखता है, और उसने कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए उसका सैन्य अभियान जरूरी है। ट्रंप और इजरायली नेताओं ने तर्क दिया है कि वह जल्दी से एक परमाणु हथियार बना सकता है, जिससे यह एक आसन्न खतरा बन सकता है।
ईरान की मिसाइलों में क्लस्टर बम
ईरान-इजराइल के बीच जारी संघर्ष में क्लस्टर बम वाली मिसाइलों के इस्तेमाल की पहली रिपोर्ट आई। 19 जून को खबर आई कि ऐसे ही एक हमले में ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइल दागकर इजरायली अस्पताल को भारी नुकसान पहुंचाया। इन मिसाइलों में क्लस्टर बम लगे हुए थे। क्लस्टर हथियारों में वारहेड होते हैं जो हवा में फटकर बमों को बिखेर देते हैं और नीचे गिरने के बाद लोगों को बड़ा नुकसान पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। ईरान इसी तरह की मिसाइलों का इस्तेमाल कर इजराइल को नुकसान पहुंचा रहा है। क्लस्टर म्यूनिशन का मतलब है कि एक ही वारहेड में दर्जनों छोटे-छोटे विस्फोटक लगाकर हमले को अंजाम देना। ये बम नीचे आबादी वाली जगहों में गिरकर तबाही मचाते हैं। ईरान के ताजा हमले में दिखा कि वारहेड 7 किमी की ऊंचाई पर फट गए, जिससे 16 किमी के दायरे में विस्फोटक फैल गए और भयानक तबाही मचाई।

ईरान पर हमले तेज
अमेरिका ने ईरान पर 'बंकर-बस्टिंग बम' बरसाए
वहीं, अब अमेरिका ने ईरान पर B-2 बमवर्षकों से हमला किया। न्यूक्लियर साइट फोर्डो पर हमला करने के लिए कई अमेरिकी B-2 बमवर्षकों का इस्तेमाल किया गया, जो कि किलेबंद स्थल में 30,000 पाउंड के 'बंकर-बस्टर' हथियार लेकर गए। अमेरिका और इजराइल के अधिकारियों ने कहा है कि अमेरिकन स्टील्थ बॉम्बर और 30,000 पाउंड वजनी बंकर-बस्टिंग बम ने जमीन के अंदर गहरे में स्थापित ईरानी परमाणु केंद्रों को नष्ट कर दिया। बंकर-बस्टिंग बम को जीबीयू-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनिट्रेटर के रूप में जाना जाता है, जिसका इस्तेमाल जमीन के भीतर लक्ष्य को भेदने और विस्फोट में किया जाता है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा, हमने ईरान के तीन परमाणु केंद्रों फोर्दो, इस्फहान और नतांज पर सफलतापूर्वक हमला किया। हमले को अंजाम देने के बाद सभी विमान ईरान के हवाई क्षेत्र से बाहर आ गए हैं। ट्रंप ने बाद में पोस्ट में लिखा, यह अमेरिका, इजराइल और दुनिया के लिए ऐतिहासिक क्षण है। ईरान को अब इस युद्ध को समाप्त करने के लिए सहमत होना चाहिए। धन्यवाद!
इजरायल की मिसाइलें और बम
जेरिको-3 (Jericho-3)
स्पाइक (Spike)
GBU-39/B स्लिम बम
ड्रोन - हेरॉन (Heron)
ईरान की मिसाइलें
फतह-1 (Fattah-1)
फतह-2 (Fattah-2)
खोरमशहर-4 (Kheibar)
इमाद (Emad) और कद्र (Qadr)
कासेम बासिर (Qasem Basir)
ड्रोन
शाहेद-136 (Shahed-136)
अरश (Arash)
गाजा (Gaza)
