Signature Forgery Case: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुले संघर्ष में बदलती दिखाई दे रही है। इसी बीच एक कथित “सिग्नेचर फर्जीवाड़ा”सामने आया है, जिसने पार्टी लीडरशिप को मुश्किल में डाल दिया है।
दरअसल, मामला है कि ‘शोभनदेब चटर्जी’ को विपक्ष का नेता बनाने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया गया, जिसमें कई सिग्नेचर ‘फर्जी’ पाए गए। तृणमूल कांग्रेस को शोभनदेब चटर्जी को विपक्ष का नेता बनाने के लिए 70 विधायकों के सिग्नेचर की जरूरत थी। जैसे ही यह प्रस्ताव खड़ा हुआ, कई विधायकों ने यह दावा किया कि उन्होंने उस पर साइन नहीं किया था।
6 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद ममता बनर्जी ने जीते हुए विधायकों की एक बैठक बुलाई थी। इस बैठक में विधायकों ने ममता को यह तय करने की जिम्मेदारी दी कि किसे विधायक दल का नेता और अन्य पदों पर नियुक्त किया जाएगा।
विवाद उस चिट्ठी को लेकर है, जिसके जरिए शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विधानसभा में विपक्ष का नेता (Leader of Opposition) बनाए जाने का समर्थन दिखाया गया था। आरोप है कि इस चिट्ठी में कुछ विधायकों के हस्ताक्षर ऐसे लगाए गए, जिन्होंने दावा किया कि उन्होंने उस दस्तावेज पर साइन ही नहीं किए थे या उस समय मौजूद नहीं थे। आसान भाषा में कहें तो विवाद इस बात पर है कि विपक्ष के नेता के समर्थन वाले दस्तावेज में कुछ विधायकों के हस्ताक्षर असली थे या नहीं।

टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी की फाइल फोटो। ANI
टीएमसी ने दो विधायकों को किया निष्कासित
रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा नाम के दो TMC विधायकों ने कथित तौर पर शिकायत की कि उनके हस्ताक्षर का गलत इस्तेमाल हुआ है। वहीं, निष्कासित नेता संदीपान साहा ने इस मामले में ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि विधायकों की सूची पर पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने ही हस्ताक्षर किए थे। वहीं, विधायक बहारुल इस्लाम ने स्वीकार किया कि 6 मई को वह बैठक में थे ही नहीं, फिर भी उनका हस्ताक्षर वहां मौजूद था।
संदीपान साहा ने अभिषेक बनर्जी पर क्या लगाए आरोप?
साहा ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए कहा," जो लोग वहां मौजूद नहीं थे, उनके हस्ताक्षर जमा करना एक बहुत बड़ी भूल थी। अभिषेक बनर्जी का नाम इसलिए सामने आ रहा है क्योंकि उन्होंने महासचिव के तौर पर विधायकों की सूची पर हस्ताक्षर किए थे। उस सूची में ही इतनी सारी गलतियां थीं। अभिषेक बनर्जी पर सवाल जरूर उठेंगे क्योंकि यह उनकी जिम्मेदारी थी और वे इसे निभाने में विफल रहे।" इसके बाद टीएमसी ने दोनों सांसदों, रितब्रत बनर्जी और संदीपान साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया।

निष्कासित विधायकों ने टीएमसी लीडरशिप पर लगाए गंभीर आरोप। ANI
एसआईटी का गठन
पश्चिम बंगाल आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायकों के हस्ताक्षरों की कथित जालसाजी की जांच के लिए पांच सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।
पश्चिम बंगाल पुलिस के एक सूत्र ने सोमवार को यहां बताया कि विवादित हस्ताक्षर विपक्ष के नेता (एलओपी) की नियुक्ति के लिए विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए नामांकन पत्र का हिस्सा थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले की गहन जांच सुनिश्चित करने के लिए पश्चिम बंगाल पुलिस के एक उप महानिरीक्षक (डीआईजी) के नेतृत्व में उच्च स्तरीय एसआईटी का गठन किया जा रहा है।
टीएमसी ने क्या कहा?
तृणमूल उपाध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य द्वारा हस्ताक्षरित एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि दोनों विधायक बार-बार पार्टी की बैठकों में अनुपस्थित रहे और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे।
विधायकों के हैंडराइटिंग की जांच कर रही सीआईडी
पश्चिम बंगाल सीआईडी हस्ताक्षर जालसाजी के आरोपों की जांच कर रही है। इस घटना को लेकर सीआईडी की टीम अब विधायकों के घर जाकर हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की मदद से सिग्नेचर की जांच कर रही है।
इस मामले में तृणमूल के कई नेताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। सीआईडी ने आज तृणमूल के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी को भी पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन पता चला है कि वे आज सीआईडी के सामने पेश नहीं होंगे।
