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क्या है बंगाल का ‘फर्जी सिग्नेचर’ मामला, जिससे TMC के अंदर ही पड़ गई फूट? समझें अभिषेक बनर्जी पर क्यों उठ रहे सवाल

Signature Forgery Case: पश्चिम बंगाल में कथित सिग्नेचर फर्जीवाड़ा मामले ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही अंदरूनी कलह को खुलकर सामने ला दिया है। विवाद उस प्रस्ताव को लेकर है, जिसके जरिए शोभनदेब चटर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाने के लिए विधायकों का समर्थन दिखाया गया था। आरोप है कि प्रस्ताव में कुछ ऐसे विधायकों के हस्ताक्षर शामिल थे, जिन्होंने दावा किया कि उन्होंने उस दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए थे या उस बैठक में मौजूद ही नहीं थे।

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सिग्नेचर फर्जीवाड़ा मामले की वजह से टीएमसी के भीतर कलह की स्थिति पैदा हो गई है। AI IMAGE

Signature Forgery Case: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुले संघर्ष में बदलती दिखाई दे रही है। इसी बीच एक कथित “सिग्नेचर फर्जीवाड़ा”सामने आया है, जिसने पार्टी लीडरशिप को मुश्किल में डाल दिया है।

दरअसल, मामला है कि ‘शोभनदेब चटर्जी’ को विपक्ष का नेता बनाने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया गया, जिसमें कई सिग्नेचर ‘फर्जी’ पाए गए। तृणमूल कांग्रेस को शोभनदेब चटर्जी को विपक्ष का नेता बनाने के लिए 70 विधायकों के सिग्नेचर की जरूरत थी। जैसे ही यह प्रस्ताव खड़ा हुआ, कई विधायकों ने यह दावा किया कि उन्होंने उस पर साइन नहीं किया था।

6 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद ममता बनर्जी ने जीते हुए विधायकों की एक बैठक बुलाई थी। इस बैठक में विधायकों ने ममता को यह तय करने की जिम्मेदारी दी कि किसे विधायक दल का नेता और अन्य पदों पर नियुक्त किया जाएगा।

विवाद उस चिट्ठी को लेकर है, जिसके जरिए शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विधानसभा में विपक्ष का नेता (Leader of Opposition) बनाए जाने का समर्थन दिखाया गया था। आरोप है कि इस चिट्ठी में कुछ विधायकों के हस्ताक्षर ऐसे लगाए गए, जिन्होंने दावा किया कि उन्होंने उस दस्तावेज पर साइन ही नहीं किए थे या उस समय मौजूद नहीं थे। आसान भाषा में कहें तो विवाद इस बात पर है कि विपक्ष के नेता के समर्थन वाले दस्तावेज में कुछ विधायकों के हस्ताक्षर असली थे या नहीं।

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टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी की फाइल फोटो। ANI

टीएमसी ने दो विधायकों को किया निष्कासित

रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा नाम के दो TMC विधायकों ने कथित तौर पर शिकायत की कि उनके हस्ताक्षर का गलत इस्तेमाल हुआ है। वहीं, निष्कासित नेता संदीपान साहा ने इस मामले में ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि विधायकों की सूची पर पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने ही हस्ताक्षर किए थे। वहीं, विधायक बहारुल इस्लाम ने स्वीकार किया कि 6 मई को वह बैठक में थे ही नहीं, फिर भी उनका हस्ताक्षर वहां मौजूद था।

संदीपान साहा ने अभिषेक बनर्जी पर क्या लगाए आरोप?

साहा ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए कहा," जो लोग वहां मौजूद नहीं थे, उनके हस्ताक्षर जमा करना एक बहुत बड़ी भूल थी। अभिषेक बनर्जी का नाम इसलिए सामने आ रहा है क्योंकि उन्होंने महासचिव के तौर पर विधायकों की सूची पर हस्ताक्षर किए थे। उस सूची में ही इतनी सारी गलतियां थीं। अभिषेक बनर्जी पर सवाल जरूर उठेंगे क्योंकि यह उनकी जिम्मेदारी थी और वे इसे निभाने में विफल रहे।" इसके बाद टीएमसी ने दोनों सांसदों, रितब्रत बनर्जी और संदीपान साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया।

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निष्कासित विधायकों ने टीएमसी लीडरशिप पर लगाए गंभीर आरोप। ANI

एसआईटी का गठन

पश्चिम बंगाल आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायकों के हस्ताक्षरों की कथित जालसाजी की जांच के लिए पांच सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।

पश्चिम बंगाल पुलिस के एक सूत्र ने सोमवार को यहां बताया कि विवादित हस्ताक्षर विपक्ष के नेता (एलओपी) की नियुक्ति के लिए विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए नामांकन पत्र का हिस्सा थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले की गहन जांच सुनिश्चित करने के लिए पश्चिम बंगाल पुलिस के एक उप महानिरीक्षक (डीआईजी) के नेतृत्व में उच्च स्तरीय एसआईटी का गठन किया जा रहा है।

टीएमसी ने क्या कहा?

तृणमूल उपाध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य द्वारा हस्ताक्षरित एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि दोनों विधायक बार-बार पार्टी की बैठकों में अनुपस्थित रहे और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे।

विधायकों के हैंडराइटिंग की जांच कर रही सीआईडी

पश्चिम बंगाल सीआईडी हस्ताक्षर जालसाजी के आरोपों की जांच कर रही है। इस घटना को लेकर सीआईडी की टीम अब विधायकों के घर जाकर हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की मदद से सिग्नेचर की जांच कर रही है।

इस मामले में तृणमूल के कई नेताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। सीआईडी ने आज तृणमूल के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी को भी पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन पता चला है कि वे आज सीआईडी के सामने पेश नहीं होंगे।

सुवेंदु अधिकारी ने टीएमसी पर साधा निशाना

विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी सार्वजनिक रूप से इन दोनों विधायकों का नाम लेते हुए दावा किया कि पार्टी ने अपने ही विधायकों के हस्ताक्षर का दुरुपयोग किया।वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा तृणमूल की एकता तोड़ने की कोशिश कर रही है और उनके विधायकों को उनकी बैठक में आने से रोकने के लिए धमकाया जा रहा है।
Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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