Aaj Ka Panchang 17 July 2026: सनातन धर्म में दैनिक पंचांग का विशेष महत्व माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने, नए संकल्प लेने या यात्रा पर जाने से पहले तिथि, नक्षत्र और शुभ मुहूर्त का विचार करना अत्यंत आवश्यक होता है। आज यानी 17 जुलाई 2026 का दिन शुक्रवार है, जो धन की देवी माता लक्ष्मी की आराधना के लिए समर्पित माना जाता है।
आज आषाढ़ शुक्ल पक्ष की तृतीया और चतुर्थी तिथि का अद्भुत संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है। आज के दिन माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने से घर में सुख-समृद्धि और वैभव का वास होता है। यदि आप आज कोई महत्वपूर्ण कार्य करने जा रहे हैं, तो ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति और शुभ समय को जानकर अपने दिन को और अधिक सफल व मंगलमय बना सकते हैं। आइए जानते हैं आज के दिन की पूरी ज्योतिषीय गणना और महत्वपूर्ण मुहूर्त क्या है।
सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय
आज 17 जुलाई 2026 को सूर्योदय का समय सुबह 5 बजकर 34 मिनट पर रहेगा, जबकि सूर्यास्त शाम को 7 बजकर 20 मिनट पर होगा। वहीं चंद्रोदय की बात करें तो आज सुबह 8 बजकर 37 मिनट पर चंद्रमा का उदय होगा और चंद्रास्त रात को 9 बजकर 33 मिनट पर होगा। आज का दिनमान कुल 13 घंटे 46 मिनट और 05 सेकंड का रहेगा, जबकि रात्रिमान 10 घंटे 14 मिनट और 26 सेकंड का रहने वाला है। आज दोपहर में मध्याह्न का समय 12 बजकर 27 मिनट पर रहेगा।
तिथि, नक्षत्र, योग और करण
आज आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि सुबह 6 बजकर 27 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद चतुर्थी तिथि का आरंभ हो जाएगा जो अगले दिन यानी 18 जुलाई की सुबह 4 बजकर 42 मिनट तक रहेगी। इसके बाद पंचमी तिथि शुरू होगी। आज नक्षत्रों में मघा नक्षत्र शाम को 6 बजकर 34 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र शुरू होगा। आज का मुख्य योग व्यतीपात योग है, जो रात 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद वरीयान् योग की शुरुआत होगी। करणों की बात करें तो गर करण सुबह 6 बजकर 27 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद वणिज करण शाम को 5 बजकर 29 मिनट तक सक्रिय रहेगा। इसके बाद विष्टि करण (भद्रा) अगले दिन सुबह 4 बजकर 42 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद बव करण का आरंभ होगा। आज का दिन शुक्रवार है।
हिंदू संवत, चंद्र मास और विक्रम संवत 2083 का मंत्रिमंडल
वर्तमान में विक्रम संवत 2083 चल रहा है, जिसका नाम सिद्धार्थ है। शक संवत 1948 पराभव और रौद्र है, जबकि गुजराती संवत 2082 पिंगल है। आज चंद्र मास आषाढ़ पूर्णिमांत और आषाढ़ अमान्त है। विक्रम संवत 2083 के मंत्रिमंडल में इस वर्ष राजा का पद देवगुरु बृहस्पति के पास है, जो शासन व्यवस्था के स्वामी हैं। रक्षा मंत्री और सेनापति का पद चंद्रमा संभाल रहे हैं। गृह और नीति मंत्री का कार्यभार मंगल के पास है। रबी की फसलों के स्वामी यानी धान्याधिपति बुध हैं, जबकि खरीफ की फसलों के स्वामी यानी सस्याधिपति स्वयं गुरु हैं। बादलों और वर्षा के स्वामी यानी मेघाधिपति चंद्रमा हैं। खजाने और धन के स्वामी यानी धनाधिपति का पद गुरु के पास है। धातुओं और खनिजों के स्वामी यानी नीरसाधिपति भी गुरु हैं। रसों के स्वामी यानी रसाधिपति शनि हैं और फलों के स्वामी फलाधिपति चंद्रमा हैं।
सूर्य और चंद्र राशि का गोचर व नक्षत्र पद
आज चंद्रमा पूरे दिन सिंह राशि में संचरण करेंगे। चंद्रमा के नक्षत्र पदों में मघा नक्षत्र का पद सुबह 7 बजकर 08 मिनट तक रहेगा और उसके बाद दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का पद प्रभावी रहेगा। सूर्य देव आज कर्क राशि में विराजमान रहेंगे। सूर्य का नक्षत्र आज मघा नक्षत्र शाम को 6 बजकर 34 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र रात 12 बजकर 22 मिनट (18 जुलाई) तक रहेगा। आज की ऋतु वर्षा है और अयन दक्षिणायण है।
17 जुलाई के शुभ मुहूर्त
आज के दिन शुभ, धार्मिक और मांगलिक कार्यों के संपादन के लिए निम्नलिखित शुभ समय उपलब्ध हैं।
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:12 ए एम से सुबह 04:53 ए एम तक
- प्रातः संध्या: सुबह 04:33 ए एम से सुबह 05:34 ए एम तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:00 पी एम से दोपहर 12:55 पी एम तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:45 पी एम से दोपहर 03:40 पी एम तक
- अमृत काल: शाम को 04:18 पी एम से शाम 05:49 पी एम तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम को 07:19 पी एम से शाम 07:39 पी एम तक
- सायाह्न संध्या: शाम 07:20 पी एम से रात 08:22 पी एम तक
- निशिता मुहूर्त: रात 12:07 ए एम (18 जुलाई) से रात 12:48 ए एम (18 जुलाई) तक
- रवि योग: सुबह 05:34 ए एम से शाम 06:34 पी एम तक
17 जुलाई के अशुभ मुहूर्त
आज के दिन इन अवधियों में किसी भी प्रकार के नए, महत्वपूर्ण या मांगलिक कार्यों की शुरुआत करने से बचना चाहिए।
- राहुकाल: सुबह 10:44 ए एम से दोपहर 12:27 पी एम तक
- यमगंड काल: दोपहर 03:54 पी एम से शाम 05:37 पी एम तक
- गुलिक काल: सुबह 07:17 ए एम से सुबह 09:01 ए एम तक
- वर्ज्य काल: सुबह 07:13 ए एम से सुबह 08:44 ए एम तक, और रात को 02:23 ए एम (18 जुलाई) से सुबह 03:57 ए एम (18 जुलाई) तक
- दुर्मुहूर्त: सुबह 08:19 ए एम से सुबह 09:14 ए एम तक, और दोपहर 12:55 पी एम से दोपहर 01:50 पी एम तक
- भद्रा काल: शाम को 05:29 पी एम से अगले दिन सुबह 04:42 ए एम (18 जुलाई) तक (भद्रा का वास मृत्यु लोक में रहेगा)
- गंडमूल काल: सुबह 05:34 ए एम से शाम 06:34 पी एम तक
- बाण (मृत्यु): रात 12:53 ए एम (18 जुलाई) से शुरू होकर पूर्ण रात्रि तक रहेगा
दिशा शूल, चंद्र वास और कुंभ चक्र का विचार
आज शुक्रवार होने के कारण पश्चिम दिशा में दिशा शूल रहेगा, इसलिए इस दिशा में लंबी यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा बहुत जरूरी हो, तो शूल निवारण के उपायों का पालन करते हुए प्रस्थान करें। आज चंद्रमा का वास पूर्व दिशा में रहेगा। अग्निवास की स्थिति सुबह 6 बजकर 27 मिनट तक पाताल में रहेगी, जिसके बाद पृथ्वी पर होगी। राहु का वास आज दक्षिण-पूर्व दिशा में रहेगा।
शिवजी का वास आज सुबह 6 बजकर 27 मिनट तक सभा में रहेगा, उसके बाद अगले दिन सुबह 4 बजकर 42 मिनट (18 जुलाई) तक क्रीड़ा में रहेगा और फिर कैलाश पर होगा। आज के कुंभ चक्र के अनुसार, जब सूर्य नक्षत्र से चंद्र नक्षत्र की दूरी कुंभ के पूर्व में पड़ रही हो तो इसे शास्त्रानुसार अशुभ माना जाता है। कलश पर यह स्थिति जातक के लिए प्रतिकूल परिस्थितियों का कारण बन सकती है।
Disclaimer: यह लेख वैदिक पंचांग की गणनाओं मान्यताओं पर आधारित है। यह जानकारी केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
