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पूर्व डिप्टी जेलर की बेटी ने आखिर राष्ट्रपति से क्यों मांगी इच्छा मृत्यु की इजाजत? जानिए आखिर क्या है सारा विवाद

पूर्व डिप्टी जेलर मीना कन्नौजिया की बेटी नेता शाह ने राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की इजाजत मांगी है। आखिर ऐसी क्या परेशानी आ गई कि शाह को कोई दूसरा विकल्प नहीं सूझ रहा। ये मामला जेल अधीक्षक उमेश सिंह से जुड़ा है। जिसके उपर जेल में महिला कर्मचारियों के शोषण समेत बहुत से आरोप लग चुके हैं।

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वाराणसी जेल के पूर्व अधीक्षक उमेश सिंह से जुड़ा सारा विवाद क्या है?

Explained: वाराणसी जेल में आखिर पूर्व जेल अधीक्षक उमेश सिंह क्या गुल खिला रहा था? वो कहते हैं न यदि कहीं से धुंआ उठ रहा है, तो कहीं न कहीं आग तो लगी ही होगी। इस पूरे कांड के बारे में हम आपको तफसील से बता रहे हैं, लेकिन सबसे पहले इससे जुड़े सबसे ताजा मामला बता देते हैं। वाराणसी जिला जेल की पूर्व ‘डिप्टी जेलर’ मीना कनौजिया की बेटी नेहा शाह ने न्याय की गुहार लगाते हुए राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की इजाजत देने की मांग की है। आखिर नेहा ने राष्ट्रपति से ये मांग क्यों की, आपको बताते हैं।

पूर्व डिप्टी जेलर की बेटी ने बताया, क्यों चाहती है इच्छा मृत्यु

नेहा शाह ने बताया, 'मैंने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर अपने लिए इच्छा मृत्यु की मांग की है। यह मांग इसलिये की गयी है क्योंकि मुझे मालूम है कि जब हुकूमत से आप की जंग होती है तब आप का सफाया होना निश्चित है।' शाह ने कहा, 'जब से मेरी मां का प्रकरण सामने आया है तब से जेल अधीक्षक उमेश सिंह पर बहुत से आरोप लग चुके हैं। मगर इसके बावजूद मुख्यालय लगातार उनको क्लीनचिट दे रहा है।' उन्होंने कहा, 'मैं चाहूं तो खुद को खत्म कर सकती हूं लेकिन अगर मैं ऐसा करती हूं तो इसका इल्जाम मेरी मां पर लगा दिया जाएगा।'

'हमारे परिवार को कहीं का नहीं छोड़ेंगे उमेश सिंह'

नेहा ने कहा, 'मुझे मालूम है कि कुछ ही दिनों में मेरी मां को निलंबित कर दिया जाएगा, क्योंकि उन्होंने बहुत बड़े इंसान के खिलाफ बोला है।' नेहा शाह ने कहा, 'यदि सिंह का निलंबन नहीं होता है तो आने वाले दिनों में अधीक्षक साहब हमारे परिवार को कहीं का नहीं छोड़ेंगे।' नेहा शाह ने पिछले महीने लालपुर पांडेरीपुर थाने में सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि जेल अधीक्षक ‘डिप्टी जेलर’ के तौर पर तैनात उसकी मां को परेशान कर रहे हैं क्योंकि उनकी मां ने जेल प्रशासन द्वारा की जा रही अनियमितताओं और कदाचार के बारे में चिंता जताई थी।

अब उमेश सिंह के खिलाफ कार्रवाई होनी तय

पिछले कई दिनों वाराणसी जेल के पूर्व डिप्टी जेलरों के शोषण के मामले में तूल पकड़ रखा है, जिसके सीधे तार पूर्व जेल अधीक्षक उमेश सिंह से जुड़े हुए हैं। इल्जाम लगे कि जिला कारागार में वो डिप्टी जेलर को अपना शिकार बनाता था। मामले में सबसे बड़ा अपडेट ये भी है कि जांच में कई बिंदुओं पर प्रमाण मिले हैं कि उमेश सिंह पर महिला डिप्टी जेलर द्वारा लगाए गए उत्पीड़न के आरोप सही पाए गए हैं। दो दिन पहले ही मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी कहा गया है कि महिला डिप्टी जेलरों के शोषण में दोषी मिले पूर्व अधीक्षक पर कार्रवाई तय है और माना जा रहा है कि शासन अब जेल उमेश सिंह को निलंबन कर देगा। संयुक्त सचिव शिवगोपाल सिंह ने डीजी कारागार से आरोपी अधीक्षक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की संस्तुति की है।

दरअसल, उमेश सिंह के खिलाफ लगे आरोप के बाद कारागार मुख्यालय स्तर पर गठित आंतरिक शिकायत समिति ने मामले की पूरी जांच की। जांच में पीड़िता और अन्य महिला डिप्टी जेलर ने भी शिकायतों को सही करार दिया। इसके आधार पर उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के नियम-7 के तहत अनुशासनिक कार्रवाई करने की संस्तुति की गई।

आखिर क्या है पूरा मामला, जानिए सारा कच्चा-चिट्ठा

ये माजरा साल 2023 का है, महीना था जुलाई का... वाराणसी जिला कारागार में डिप्टी जेलर रत्नाप्रिया की पहली पोस्टिंग हुई, इसी दौरान जेल अधीक्षक उमेश सिंह की भी तैनाती हुई थी। इसी बीच अगस्त के महीने में रत्नाप्रिया की शिकायत ने उमेश सिंह की कुर्सी हिलाकर रख ही, इतना ही नहीं उसका सारा कच्चा चिट्ठा अब दुनिया के सामने आ रहा है। तत्कालीन डिप्टी जेलर रत्नाप्रिया ने 8 अगस्त 2023 को जेल प्रशासन एवं सुधार सेवा के प्रमुख सचिव से पहली बार शिकायक की। इस शिकायत की एक प्रति डीजी जेल, डीआईजी वाराणसी, राष्ट्रीय महिला आयोग और मानवाधिकार आयोग को भी भेजा।

'कारागार मंत्री बनकर तुम्हारा शोषण करूंगा...'

अपनी शिकायत में रत्नाप्रिया ने कई सनसनीखेज आरोप लगाए। जिसमें मानसिक तौर पर प्रताड़ित करने की बात कही गई। ये तक कहा गया कि उमेश सिंह ने उसे धमकी देते हुए ये कहा कि 'कारागार मंत्री बनकर तुम्हारा शोषण करूंगा...'। हालांकि उस वक्त उमेश ने सभी आरोप को खारिज कर दिया, मार्च-अप्रैल 2024 में उसे क्लीन चिट भी मिल गई। इसके बाद डिप्टी जेलर का ट्रांसफर मैनपुरी हो गया। उसे दोबारा जांच के लिए आरटीआई का सहारा लिया। 2 जुलाई 2024 को अपनी 12 पेज की शिकायत में उसने कई प्रमाण दिए। जांच हुई तो तत्कालीन डिप्टी जेलर मीना कन्नौजिया समेत एक अन्य महिला डिप्टी जेलर ने मुख्यालय में उमेश सिंह के खिलाफ आरोपों को सही बताया।

डिप्टी जेलर रत्नाप्रिया की दूसरी शिकायत भी डंप पड़ी थी, इसी बीच दूसरी डिप्टी जेलर मीना कन्नौजिया ने बीते 15 मार्च, 2025 को मुख्यमंत्री के नाम अपना पत्र और एक बयान का वीडियो जारी किया। इसी के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। उमेश सिंह के सारे कांड को मीना कन्नौजिया ने सिलसिलेवार तरीके से बेनकाब करने का दावा किया। उनका ये वीडियो वायरल भी हो गया। जांच तेज हुआ और अब मीना कन्नौजिया की बेटी ने राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की इजाजत मांगी है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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