अमेरिका ने ईरान की परमाणु साइटों पर एयर स्ट्राइक कर दी है, इस सबके बीच सबकी निगाहें अब ईरान के संभावित कदमों की ओर है, गौर हो कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) वैश्विक तेल आपूर्ति (Global Oil Supply) के लिए महत्वपूर्ण है, जिसे बंद करने की धमकी ईरान दे रहा है, बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य अगर बंद होता है तो दुनिया भर के लिए तमाम दुश्वारियां खड़ी हो जाएंगी जानें कैसे...
होर्मुज जलडमरूमध्य रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नौवहन मार्ग है, जिसका विश्व के बड़े भाग में तेल परिवहन में योगदान है। ईरान लंबे समय से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी देता रहा है अपने दुश्मन अमेरिका द्वारा सैन्य हमलों के बाद एक नई धमकी में ईरान ने कथित तौर पर तत्काल जवाबी कार्रवाई का आह्वान किया है।

oil ship in Strait of Hormuz
होर्मुज जलडमरूमध्य कहां है?
यह जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच एक संकीर्ण समुद्री गलियारा बनाता है और सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और ईरान जैसे प्रमुख उत्पादकों से कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का मुख्य निर्यात मार्ग है, यह फारस की खाड़ी से खुले समुद्र तक समुद्री मार्ग प्रदान करता है।
संघर्ष वैश्विक तेल व्यापार के लिए कितना विनाशकारी!
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्तमान में कई बड़े तेल टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर निकलने का प्रयास कर रहे हैं। अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की ताजा धमकी ने इस बात की चिंता बढ़ा दी है कि यह संघर्ष वैश्विक तेल व्यापार के लिए कितना विनाशकारी हो सकता है।
दुनिया की दैनिक तेल खपत का लगभग 20 फीसदी
होर्मुज जलडमरूमध्य सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, इराक और कुवैत जैसे खाड़ी उत्पादकों के लिए प्राथमिक निर्यात मार्ग के रूप में कार्य करता है और यह मार्ग दुनिया की दैनिक तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत इसके माध्यम से गुजरने की अनुमति देता है।

oil ship
जान लें भारत पर क्या और कितना होगा असर ?
ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दे तो इसका भारत पर क्या असर होगा? जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को हिंद महासागर से जोड़ता है यानी साफ है कि किसी भी तरह की नाकाबंदी से तेल की कीमतें बढ़ेंगी और मुद्रास्फीति में भी बढ़ोत्तरी होगी।
बताते हैं कि भारत के तेल आयात का दो तिहाई से ज़्यादा हिस्सा और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) आयात का लगभग आधा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 90 फीसदी आयात करता है, और इनमें से 40 फीसदी से अधिक आयात मध्य पूर्व से आते हैं, जिनमें से लगभग सभी होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते हैं।
परिष्कृत उत्पादों के निर्यात में कटौती
केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने हाल ही में में कहा था कि भारत फारस की खाड़ी के बाहर से कच्चा तेल मंगाने और अपने परिष्कृत उत्पादों के निर्यात में कटौती करने की योजना बना रहा है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य में अवरोध उत्पन्न होने की संभावना है।
कहलाता है 'दुनिया की तेल नस'
दुनिया की एक तिहाई तरलीकृत प्राकृतिक गैस LNG इसी मार्ग से होकर गुजरती है यही वजह है कि जलडमरूमध्य महत्वपूर्ण है और कई लोग इसे 'दुनिया की तेल नस' भी कहते हैं इस बार की परिस्थितियों को देखकर लग रहा है कि ईरान वास्तव में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी देने की पुरानी रणनीति का सहारा ले रहा है अगर होर्मुज जलडमरूमध्य की सप्लाई बाधित हुई, तो दुनिया में ईंधन की कीमतें आसमान छू सकती हैं, महंगाई बढ़ सकती है।
