Delhi PG Collapse News: दक्षिण दिल्ली के छात्र बहुल क्षेत्र सत्य निकेतन में 6 सितंबर को हुए दर्दनाक हादसे के बाद अब आसपास की इमारतों को खाली कराए जाने और छात्रों के पलायन का दौर शुरू हो गया है। 6 सितंबर (रविवार) दोपहर करीब 1:30 बजे सत्य निकेतन में स्थित 'हॉस्टल डेज' नामक एक 5-मंजिला पीजी (पेइंग गेस्ट) इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई थी। 27 घंटे से अधिक चले लंबे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद 7 लोगों के शव बरामद किए गए, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं।
इस हादसे के बाद नगर निगम (MCD) और प्रशासन की कार्रवाई तथा इलाके में बने अन्य जर्जर और अवैध निर्माण वाले पीजी में सुरक्षा को लेकर खौफ का माहौल है। इसके चलते मंगलवार (8 सितंबर) को आसपास की अन्य इमारतों और पीजी में रह रहे बड़ी संख्या में छात्र अपने बैग और सामान समेटकर कमरे खाली करते देखे गए।
छात्रों के सामने सबसे बड़ा संकट नया ठिकाना कहां मिलेगा
सत्य निकेतन में इमारतों के सील होने और बिजली-पानी काटे जाने के बाद सामान समेटकर सड़कों पर खड़े छात्रों के सामने सबसे बड़ा संकट नया ठिकाना तलाशने का है। इस पलायन ने दिल्ली विश्वविद्यालय के आसपास छात्रों के आवास से जुड़ी पुरानी और विकराल समस्याओं को एक बार फिर सतह पर ला दिया है।
डीयू (DU) हॉस्टलों में बेहद सीमित सीटें
दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस कॉलेजों में देश भर से हजारों छात्र पढ़ने आते हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के हॉस्टलों में सीटों की संख्या नाममात्र है। हॉस्टल की मेरिट लिस्ट इतनी ऊंची जाती है कि 90%-95% छात्रों को भी कमरे नहीं मिल पाते, जिसके कारण वे निजी पीजी (PG) पर निर्भर रहने के लिए मजबूर हैं।
आसपास के इलाकों में मनमाना किराया
सत्य निकेतन खाली करने के बाद छात्र पास के क्षेत्रों जैसे आनंद निकेतन, मोती बाग, साउथ एक्सटेंशन या मालवीय नगर का रुख कर रहे हैं। लेकिन हादसे के तुरंत बाद इन इलाकों में किराए अचानक आसमान छूने लगे हैं। जो पीजी कमरे पहले 12,000 से 15,000 रुपये में मिलते थे, उनके लिए अब 20,000 से 25,000 रुपये तक मांगे जा रहे हैं।
ब्रोकरों और पीजी मालिकों का शोषण
छात्रों की मजबूरी का फायदा उठाकर प्रॉपर्टी डीलर भारी ब्रोकरेज मांग रहे हैं। इसके अलावा, कई पीजी मालिक एडवांस में जमा कराई गई सिक्योरिटी डिपॉजिट (जो अमूमन 15,000 से 30,000 रुपये तक होती है) तुरंत लौटाने में आनाकानी कर रहे हैं, जिससे छात्रों के पास नए कमरे के लिए तुरंत पैसे की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है।
पढ़ाई और सुरक्षा का दोहरा दबाव
सेमेस्टर परीक्षाएं और पढ़ाई का दबाव सिर पर है, ऐसे में अचानक कमरा खाली करने से छात्रों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो गई है। कई छात्र मजबूरी में अस्थायी तौर पर अपने दोस्तों के छोटे कमरों में शरण ले रहे हैं या फिर कुछ दिनों के लिए अपने होमटाउन वापस लौटने का मन बना रहे हैं।
कैसे हुआ हादसा?
दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से सटे सत्य निकेतन इलाके में यह 40 से 50 साल पुरानी इमारत बिना किसी ठोस पिलर स्ट्रक्चर के बनी हुई थी। अवैध निर्माण व मरम्मत: प्रॉपर्टी टैक्स रिकॉर्ड्स के अनुसार, यह ढांचा 1970-80 के दशक का बना हुआ था, जिस पर बाद में अतिरिक्त मंजिलें बना दी गईं। हादसे के समय इमारत के बेसमेंट या निचले हिस्से में अतिरिक्त जगह बनाने के लिए बिना सुरक्षा मानकों के मरम्मत कार्य कराया जा रहा था। पिछले दिनों दिल्ली-एनसीआर में हुई भारी बारिश की वजह से पुरानी इमारत की नींव और दीवारें कमजोर हो गई थीं। रविवार दोपहर अचानक पूरी 5-मंजिला इमारत भरभराकर ढह गई।
प्रशासनिक कार्रवाई और गिरफ्तारियां
हादसे के बाद दिल्ली सरकार, पुलिस और हाईकोर्ट सख्त रुख अपना रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने पीजी का संचालन और मालिकाना हक रखने वाले परिवार—हरिराम गुप्ता (81), उनकी पत्नी उर्मिला (75) और बेटे महेश (52) को गिरफ्तार कर लिया है।
अधिकारियों पर गाज: एमसीडी (MCD) के साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत 5 अधिकारियों को लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है।
5वीं मंजिल वाले अवैध निर्माण होंगे सील: दिल्ली सरकार और MCD ने पूरी दिल्ली में बिना इजाजत 5वीं मंजिल बनाने वाली इमारतों तथा नियमों का उल्लंघन कर चलाए जा रहे पीजी को सील करने का अभियान शुरू किया है।
हाईकोर्ट की टिप्पणी: दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले में उच्चस्तरीय जांच का आदेश देते हुए कहा कि सरकार और नागरिक निकाय अपनी जवाबदेही से भाग नहीं सकते।
छात्रों में डर और पलायन
सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस (जैसे जीसस एंड मैरी, वेंकटेश्वर कॉलेज) के छात्रों के रहने का मुख्य केंद्र है। दिल्ली विश्वविद्यालय के हॉस्टलों में सीमित सीटें होने के कारण हजारों छात्र इन्हीं अनधिकृत और तंग पीजी में रहने को मजबूर हैं। हादसे के बाद प्रशासन द्वारा आसपास की खतरनाक घोषित की गई इमारतों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। कई इमारतों की बिजली-पानी की आपूर्ति काट दिए जाने और अपनी सुरक्षा की चिंता के कारण मंगलवार को छात्रों को मजबूरी में अपने-अपने पीजी खाली कर दूसरे सुरक्षित स्थानों या अपने घर लौटना पड़ा।
