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'INDIA' के संयोजक की नियुक्ति पर कब होगा फैसला? अब तक नहीं हुई बैठक, समझें 3 सियासी फैक्टर

Opposition Alliance: विपक्षी गठबंधन 'INDIA' के संयोजक की नियुक्ति कब होगी? इस सवाल के जवाब का इंतजार गठबंधन में शामिल सभी सियासी पार्टियां और नेता कर रहे हैं। हाालांकि शिवसेना (यूबीटी) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत का कहना है कि संयोजक की नियुक्ति के लिए कोई बैठक नहीं हुई।

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चार राउंड की बैठक में नहीं हो सका फैसला।

Photo : PTI

INDIA Coordinator News: विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (INDIA) के घटक दलों की 4 राउंड की बैठक हो चुकी है, मगर अबतक कोई बड़े ऐलान नहीं किए गए हैं। ना ही सीट बंटवारे पर कोई बात बनी और ना ही इस गठबंधन के संयोजक के नाम पर मुहर लगी। बैठकों में रणनीति पर चर्चा होती रही, लेकिन लोकसभा चुनाव नजदीक है और अब तक कोई बड़े फैसले नहीं हुए। कहीं न कहीं विपक्षी दलों के गठबंधन का ये ढुलमुल रवैया चुनाव के वक्त बड़ा सिरदर्द साबित हो सकता है। आपको वो सियासी फैक्टर समझाते हैं, जिससे अब तक संयोजक को लेकर बड़ा फैसला नहीं हो सका है।

कहां फंसा है सारा पेंच?

INDIA के संयोजक या अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए कोई बैठक नहीं हुई है। ये जानकारी शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने साझा की है। मतलब ये कि अब तक संयोजक या अध्यक्ष को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है। जाहिर है कि जब इस मुद्दे पर चर्चा ही नहीं हुई तो भला फैसला कैसे होगा?

कौन-कौन रेस में शामिल?

विपक्षी गठबंधन में कुल 28 दल शामिल हैं, जिनमें सबसे बड़ा नाम कांग्रेस का है। कांग्रेस के अलावा, समाजवादी पार्टी, टीएमसी, एनसीपी, शिवसेना, आरजेडी, जेडीयू, आम आदमी पार्टी, आरजेडी, जदयू, सीपीआई और डीएमके के नेताओं पर खास नजर होगी। नीतीश कुमार के नाम का काफी जिक्र हो रहा था। मगर ममता बनर्जी, शरद पवार और खुद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी संयोजक के लिए प्रबल दावेदार हैं। हो सकता है कि यूपीए की तरह INDIA की कमान भी सोनिया के हाथों में दे दी जाए।

कब बनेगी सभी में बात?

INDIA में शामिल पार्टियों को सीट बंटवारे पर समझौता का सबसे अधिक इंतजार है। ऐसे में हो सकता है कि सीट शेयरिंग का फॉर्मूला सेट होने के बाद ही संयोजक के पद के लिए किसी नेता को नियुक्त किया जाए। गठबंधन के घटक दलों ने आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर 19 दिसंबर, 2023 को बैठक की थी और जल्द से जल्द सीट बंटवारे को अंतिम रूप देने का फैसला किया था।

बैठक में कुछ नेताओं (ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल) ने गठबंधन की ओर से प्रधानमंत्री पद के चेहरे के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम भी प्रस्तावित किया था। हालांकि खड़गे ने कहा था कि इस पर फैसला चुनाव में जीत के बाद ही होगा और सबसे पहले चुनावों में जीत दर्ज करना जरूरी है। यह पूछे जाने पर कि क्या जनता दल (यूनाइटेड) नेता एवं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विपक्षी गठबंधन का चेहरा होंगे, राउत ने कहा, 'हाल में INDIA गठबंधन की कोई बैठक नहीं हुई है। यहां तक कि 'INDIA' गठबंधन की दिल्ली में हुई पिछली बैठक के दौरान भी ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं आया था।'

संजय राउत ने कहा, 'दिल्ली में हुई INDIA गठबंधन की बैठक में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा था कि हमें एक चेहरे को आगे लाने की जरूरत है। सर्वसम्मति से चुने गये वरिष्ठ नेता ही इस गठबंधन के संयोजक या अध्यक्ष के रूप में काम करेंगे।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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