National Party Status: 2024 के लोकसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी से लेकर नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के मुखिया शरद पवार को तगड़ा झटका लगा है। सोमवार (10 अप्रैल, 2023) को इन दोनों पार्टियों से राष्ट्रीय दल का दर्जा छिन गया। चुनाव आयोग ने बताया कि टीएमसी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई), एनसीपी का नेशनल पार्टी का दर्जा वापस ले लिया गया है। लेकिन अरविंद केजरीवाल के लिए चुनाव आयोग से खुशखबरी आई कि उनके नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी को नेशनल पार्टी का दर्जा मिल गया है।
आप के लिए बड़ी उपलब्धि
आप ने इसे लेकर जश्न मनाना भी शुरू कर दिया है। आज दिल्ली में सीएम अरविंद केजरीवाल इस खास उपलब्धि पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करने जा रहे हैं। पार्टी के लिए संकट की घड़ी में ये खुशखबरी आई है। पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में हैं। केंद्र और दिल्ली सरकार में तलवार तनी हुई है, भाजपा-आप के बीच हर रोज सियासी टकराव होता है, ऐसे में आप को नेशनल पार्टी का दर्जा मिलना केजरवाल और पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए बड़ा बूस्ट साबित होगा। आप का गठन 2012 में हुआ था और 13 साल में ही इसने राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल कर तेजी से तरक्की दिखाई है।
क्या फायदा होगा?
आप के लिए सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि अब वह अपने प्रमुख प्रतिद्वंदी भाजपा से और खुलकर टक्कर ले सकेगी। अब तक उसे क्षेत्रीय पार्टी ही समझा जाता था, लेकिन राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलने के बाद उसका न सिर्फ हौसला बुलंद होगा बल्कि वह दोगुने जोश के साथ लोकसभा चुनाव की तैयारी कर सकेगी। हाल ही में आप ने पंजाब में विजय पताका फहराई है, अब राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलना केजरीवाल और पार्टी की रणनीति में और धार लाएगा।
ममता को बड़ा झटका
एक तरफ जहां केजरीवाल के लिए हौसला बढ़ाने वाली खबर आई है, वहीं टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है। टीएमसी का राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खत्म कर दिया गया है। इससे ममता की पूरी रणनीति ही गड़बड़ा सकती है। इस घटनाक्रम ने 2024 चुनाव के लिए ममता की रणनीति में बाधा डाल दी है। कहा ये जा रहा था कि 2024 में ममता विपक्ष की धुरी बन सकती हैं। अब तक वह एक ऐसी मजबूत नेता नजर आई हैं जिन्होंने अपने राज्य में बीजेपी का रथ थाम लिया। वह आक्रामक अंदाज में बीजेपी को घेर रही हैं और इसी वजह से विपक्ष की पसंद भी हैं।
लेकिन नए हालात में उनकी सियासी हैसियत थोड़ी कमजोर पड़ गई है। अब नए राजनीतिक क्षितिज में अरविंद केजरीवाल उभरकर सामने आए हैं। केजरीवाल ने अब तक बीजेपी का मुकाबला भी जोरदार तरीके से किया है। दिल्ली में केजरीवाल ने ऐसा खूंटा गाड़ा कि बीजेपी की वापसी लंबी हो चली है, फिलहाल उसकी वापसी की संभावना भी नहीं दिखती है। पंजाब में कांग्रेस कमजोर पड़ी तो इसका फायदा बीजेपी को नहीं बल्कि आप को मिला। ऐसे में केजरीवाल 2024 में नई ताकत बनकर उभर सकते हैं।
ममता के लिए क्यों घाटे का सौदा
राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा छिनना ममता के लिए कई मायनों में घाटे का सौदा साबित होगा। इस बीच, खबर है कि तृणमूल कांग्रेस चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देने के लिए कानूनी विकल्पों की तलाश कर रही है। उन्हें और क्या-क्या नुकसान होंगे समझिए-
- ईवीएम या बैलेट पेपर में पहले कुछ नामों के बीच पार्टी का चुनाव चिह्न अब दिखाई नहीं देगा क्योंकि राष्ट्रीय पार्टी के नाम पहले दिखाई देते हैं।
- अब 'अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस' का इस्तेमाल नहीं कर पाएगी टीएमसी।
- जब भी चुनाव आयोग सर्वदलीय बैठक बुलाएगा, टीएमसी को बैठकों के लिए शायद ही बुलाया जाएगा।
- राष्ट्रीय दर्जा वापस लिए जाने से भले ही थोड़ा बहुत लेकिन राजनीतिक चंदा प्रभावित होगा।
क्यों छिना दर्जा?
दरअसल, इन तीनों सियासी दलों (टीएमसी, एनसीपी और सीपीआई) का वोट शेयर देश में छह प्रतिशत से कम था, लिहाजा इनसे नेशनल पार्टी का दर्जा वापस ले लिया गया। किसी भी पार्टी को नेशनल पार्टी का दर्जा पाने के लिए कुछ नियमों को पूरा करना पड़ता है।
- दल को न्यूनतम चार सूबों में छह फीसदी वोट मिला हो।
- संसद के निचले सदन लोक सभा की कुल सीटों में से दो फीसदी सीटें कम से कम तीन प्रदेशों से हासिल हुई हों।
- पार्टी को चार राज्यों में क्षेत्रीय दल का दर्जा मिला हो।
नेशनल पार्टी होने के लाभ
- चुनाव चिह्न देश भर में सुरक्षित रखा जा सकता है।
- चुनावी कैंपेन में दल 40 स्टार प्रचारक रख सकते हैं।
- स्टार प्रचारकों के यात्रा खर्च को कैंडिडेट के चुनावी खर्च में नहीं रखा जाता।
- ऐसे दलों को दिल्ली में सब्सिडी दर पर पार्टी चीफ-पार्टी ऑफिस के लिए सरकारी बंगला किराए पर मिलता है।
- राष्ट्रीय दलों को सरकारी चैनलों पर (आकाशवाणी पर प्रसारण के लिए ब्रॉडकास्ट और टेलीकास्ट ब्रैंड्स मिलते हैं) दिखाए जाने का समय तय रहता है।
