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मोदी सरकार में कब-कब हुए बड़े रेल हादसे? कांग्रेस ने जारी की लिस्ट; गरमाई सियासत

Train Accident List: क्या आप जानते हैं कि देश में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद कुल कितने बड़े हादसे हुए हैं? गोंडा में रेल हादसे के बाद कांग्रेस ने एक लिस्ट जारी करके लिस्ट साझा की है, जिसके बाद सियासत गरमा गई है। डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस ट्रेन हादसे में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है।

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मोदी सरकार में हुए बड़े रेल हादसों की सूची।

Photo : Times Now Digital

Major Train Accidents During Modi Sarkar: नरेंद्र मोदी ने 26 मई, 2014 को भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी, उसी दिन गोरखधाम एक्सप्रेस ट्रेन हादसे का शिकार हो गई। इसमें 25 लोगों की मौत हो गई थी। कांग्रेस पार्टी ने ये जानकारी उस वक्त साझा की है, जब गोंडा रेल हादसे में चार लोगों की मौत हो गई और 20 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। क्या आप ये जानते हैं कि मोदी सरकार में अब तक कितने बड़े रेल हादसे हुए हैं, उन हादसों में कितने लोगों की मौत हुई और कितने लोग घायल हो गए थे?

कांग्रेस ने शेयर की मोदी सरकार में हुए बड़े रेल हादसे की लिस्ट

एक तरफ उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में बृहस्पतिवार को चंडीगढ़ से डिब्रूगढ़ जा रही एक ट्रेन के कुछ डिब्बों के पटरी से उतर जाने से कम से कम चार लोगों की मौत हो गयी और 20 से अधिक लोग जख्मी हो गये। तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने इस हादसे के बाद मोदी सरकार पर सवाल खड़ा करते हुए बीते 10 सालों में हुए बड़े रेल हादसे की सूची साझा की है और ये पूछा है कि इन हादसों के लिए कौन जिम्मेदार है। कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है,

मोदी सरकार में हुए बड़े रेल हादसे

तारीखट्रेनमौतघायल
26 मई, 2014गोरखधाम एक्सप्रेस25 लोगों की मौत50 से ज्यादा घायल
20 मार्च, 2015जनता एक्सप्रेस58 लोगों की मौत150 से ज्यादा घायल
20 नवंबर, 2016इंदौर-पटना एक्सप्रेस150 लोगों की मौत 150 से ज्यादा घायल
21 जनवरी, 2017हीराखंड एक्सप्रेस41 लोगों की मौत68 से ज्यादा घायल
18 अगस्त, 2017पुरी-हरिद्वार उत्कल एक्सप्रेस 23 लोगों की मौत60 घायल
23 अगस्त, 2017कैफियत एक्सप्रेस-70 लोग घायल
10 अक्टूबर, 2018न्यू फरक्का एक्सप्रेस7 लोगों की मौत60 से ज्यादा घायल
3 फरवरी, 2019सीमांचल एक्सप्रेस7 लोगों की मौत37 घायल
13 जनवरी, 2022बीकानेर-गुवाहाटी एक्सप्रेस9 लोगों की मौत36 घायल
2 जून, 2023बालासोर रेल हादसा296 लोगों की मौत900 से ज्यादा घायल
11 अक्टूबर, 2023नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस4 लोगों की मौत100 से ज्यादा घायल
17 जून, 2024कंचनजंगा एक्सप्रेस15 लोगों की मौत60 से ज्यादा घायल
18 जुलाई, 2024डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस4 लोगों की मौतकई घायल

कांग्रेस पार्टी की ओर से अंत में ये सवाल पूछा गया है कि 'जिम्मेदारी किसकी?' बता दें, उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बताया कि इस हादसे में चार लोगों की मौत की खबर है। फिलहाल राहत एवं बचाव कार्य जारी है। करीब 40 सदस्यीय मेडिकल टीम और 15 एम्बुलेंस मौके पर मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि घटना के सिलसिले में हेल्पलाइन नम्बर 8957400965 और 8957409292 जारी किये गये हैं।

Gonda train accident

गोंडा में ट्रेन हादसा।

हादसे पर भारतीय रेल ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर

  • कमर्शियल कंट्रोल : 9957555984
  • फुर्केटिंग (FKG): 9957555966
  • मरियानी (MXN): 6001882410
  • सिमलगुरी (SLGR): 8789543798
  • तिनसुकिया (NTSK): 9957555959
  • डिब्रूगढ़ (DBRG): 9957555960
  • एलजेएन-8957409292
  • जीडी- 8957400965

ट्रेन हादसे के चलते बदला गया ट्रेनों का रूट

पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि पूर्वोत्तर रेलवे के गोंडा-गोरखपुर रेल खंड पर मोतीगंज तथा झिलाही रेलवे स्टेशनों के बीच बृहस्पतिवार को दोपहर बाद चंडीगढ़ से डिब्रूगढ़ जा रही चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन के कई डिब्बे पटरी से उतर गए। उन्होंने बताया कि राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। हादसे के कारण सम्बन्धित रेल खंड पर कटिहार-अमृतसर एक्सप्रेस और गुवाहाटी-श्रीमाता वैष्णो देवी कटरा एक्सप्रेस का मार्ग परिवर्तन कर दूसरे रास्ते से चलायी जा रही है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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