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नई संसद की छत टपकने के मुद्दे पर लोकसभा में नहीं होगी चर्चा, आखिर क्या है माजरा; जानें किसने क्या बोला

Parliament News: नए संसद भवन की छत टपकने के मुद्दे को लोकसभा में उठाने की मांग कांग्रेस ने की, तो उसे स्पीकर ओम बिरला ने खारिज कर दिया। विपक्षी दलों ने बारिश में नई संसद टपकने के मुद्दे पर सरकार की जमकर चुकी ली। साथ ही एक सदस्य ने इस पर सदन में चर्चा करने की मांग की।

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बारिश में नए संसद भवन की छत टपकने पर सियासत।

Leaking New Parliament Building's Roof: दिल्ली में भारी बारिश के बाद संसद भवन में भी जलभराव देखने को मिला। मूसलाधार बारिश के चलते नई संसद की छत से पानी टपकने लगा। विपक्षी दलों ने इस मौके को दबोच लिया और इसे लेकर सरकार पर खूब तंज कसा। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने गुरुवार को लोकसभा में नए संसद भवन की छत टपकने का मुद्दा उठाने का प्रयास किया।

नए संसद भवन की छत टपकने पर चर्चा की मांग

सदन में प्रश्नकाल की कार्यवाही के समापन के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भारत यात्रा पर आए और उस समय सदन के विशेष बॉक्स में बैठे हुए जापानी संसदीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। इसके बाद कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने अपने द्वारा दिए गए स्थगन प्रस्ताव का हवाला देते हुए इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की।

कांग्रेस की मांग को लोकसभा स्पीकर ने किया खारिज

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मणिकम टैगोर की मांग को खारिज करते हुए कहा कि वे सभी सांसदों को आगाह करते हैं और भविष्य के लिए भी यह बताते हैं कि नियम और प्रक्रियाओं के तहत भी और कई बार बुलेटिन जारी कर भी यह बताया जाता है कि स्पीकर के अधिकार क्षेत्र से जुड़े मसले पर नोटिस नहीं लिया जाता। उन्होंने सांसदों से इसका भविष्य में ध्यान रखने को भी कहा।

1200 करोड़ की लागत से बनीं नई संसद पर सवाल

आपको बता दें कि, मणिकम टैगोर ने नए संसद भवन की छत टपकने का एक वीडियो शेयर करते हुए एक्स पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि, "बाहर पेपर लीक,अंदर पानी लीक।" उन्होंने अपने पोस्ट में नए संसद भवन की इमारत की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाया। करीब 1200 करोड़ की लागत से बनीं नई संसद की छत बारिश के बाद टपकने लगी, जिसका वीडियो कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने शेयर किया है गौर हो कि नई संसद की इमारत का उद्घाटन पिछले साल यानी 28 मई 2023 को हुआ था।

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने संसद के नए भवन में पानी लीकेज का वीडियो जारी कर लगाया स्थगन प्रस्ताव कागज़ बाहर लीक, अंदर पानी लीक। संसद के लॉबी में हाल ही में हुए पानी के रिसाव से मौसम सहनशीलता के मुद्दे उजागर होते हैं, जो नई इमारत के पूरा होने के सिर्फ एक साल बाद ही सामने आए हैं इस मुद्दे पर लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव लगाया।

Waterlogging in New Parliament Building

नई पार्लियामेंट की छत से टपक रहा पानी।

अखिलेश यादव ने कहा- क्यों न फिर से पुरानी संसद चलें

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्विटर पर एक वीडियो जारी करते हुए लिखा, 'इस नई संसद से अच्छी तो वो पुरानी संसद थी, जहां पुराने सांसद भी आकर मिल सकते थे। क्यों न फिर से पुरानी संसद चलें, कम-से-कम तब तक के लिए, जब तक अरबों रुपयों से बनी संसद में पानी टपकने का कार्यक्रम चल रहा है। जनता पूछ रही है कि भाजपा सरकार में बनी हर नई छत से पानी टपकना, उनकी सोच-समझकर बनायी गयी डिज़ाइन का हिस्सा होता है या फिर...।'

विपक्षी दलों के नेता लगातार ये सवाल उठा रहे हैं कि करोड़ों की लागत से नए संसद भवन का निर्माण किया गया, लेकिन एक साल में ही इसके निर्माण में लापरवाही और खामी के लिए कौन जिम्मेदार है। जाहिर है कि ये तो अभी शुरुआत है, इस मुद्दे को लेकर विपक्ष और भी बड़ा हंगामा करने पर विचार कर सकता है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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